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    गोरखपुर में पेंटर की बेटी बनी 2nd टॉपर:रात में कट जाती थी बिजली, दिन में की पढ़ाई, मैथेमेटिक्स में 99 मार्क्स लाई

    1 hour ago

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    यूपी बोर्ड की ओर से जारी रिजल्ट में गोरखपुर के APJ अब्दुल कलाम मेमोरियल एकेडमी की बिदिशा मौर्या ने 95 प्रतिशत के साथ जिले में दूसरा स्थान हासिल किया है। इतना ही नहीं मैथेमेटिक्स में उन्होंने 99 नंबर प्राप्त किया है। उन्होंने मात्र दो से तीन घंटे की सेल्फस्टडी में यह मुकाम हासिल किया है। रिजल्ट आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है।विदिशा बेहद ही सामान्य परिवार से आती हैं। उनके पिता पेंटर का काम करते हैं। मां हाऊस वाइफ हैं। बातचीत में उन्होंने बताया कि यह सफर आसान नहीं था। घर में व्यवस्थाएं बहुत कम है। रात में बिजली कट जाने की वजह से दिन में ही ज्यादा पढ़ाई करती थी। बिदिशा ने अपने सफलता का श्रेय माता- पिता और टीचर्स को दी है। उनका कहना है कि ये अभी शुरुआत है आगे बहुत कुछ करना है। जानिए बिदिशा के सफलता की कहानी… गोरखपुर के रायगंज कोइरीटोला की रहने वाली 15 साल की विदिशा मौर्या ने यूपी बोर्ड के रिजल्ट में क्लास 10th में जिले भर में दूसरा स्थान हासिल किया है। वह APJ अब्दुल कलाम मेमोरियल एकेडमी की छात्रा हैं। पिता चंद्रशेखर मौर्या हैदराबाद में पेंटर का काम करते हैं। मां बबिता मौर्या हॉउस वाइफ हैं। बिदिशा का यह सफर इतना भी आसान नहीं था। पढ़ाई करने के लिए घर में संसाधन और गांव में माहौल दोनों की कमी थी। लेकिन बिदिशा ने परेशानियों पर नहीं बल्कि अपने लक्ष्य पर ध्यान दिया। सिर्फ 2 से 3 घंटे की सेल्फ स्टडी में हासिल की मुकाम दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि रात में बार- बार बिजली कट जाने की वजह से पढ़ाई करने में बहुत दिक्कत होती थी। इसलिए ज्यादातर पढ़ाई दिन में ही कर लेती थी। मैंने घंटा देखकर पढ़ाई नहीं की है। सिर्फ दो से तीन घंटे सेल्फस्टडी को देती थी। उतने देर मन लगाकर पढ़ाई करती थी। जो टॉपिक शुरू करती उसे अच्छे से समझ कर ही छोड़ती थी। साथ ही स्कूल में हमेशा टीचर्स के बताए गए हर एक बात पर दिया। खुद नोट्स बनाकर की पढ़ाई रेगुलर स्कूल जाती थी। कोई क्लास मिस नहीं करती थी। मैंने सिर्फ मैथ्स का ट्यूशन किया है। बाकी सब्जेक्स्ट्स का नोट्स बना कर खुद ही पढ़ाई करती थी। बिदिशा का कहना है कि घंटा देखकर पढ़ाई करने से अच्छा रेगुलर पढ़ाई करना जरुरी है। साथ ही पढ़ें गए हर टॉपिक को रिवाइज करना बहुत जरुरी होता है। मैथेमेटिक्स पढ़ कर माइंड फ्रेस करती थी बिदिशा ने बताया कि मैथेमेटिक्स मेरा फेवरेट सब्जेक्ट है। इसलिए जब किसी और सब्जेक्ट को पढ़कर मन ऊब जाता था तो मैथ्स खोल के बैठ जाती थी। उसके सम्स सॉल्व करते ही माइंड फ्रेस हो जाता था। उन्होंने इस सब्जेक्ट में 99 नंबर लाए हैं। रात में जगती थी मां उन्होंने बताया कि पापा बाहर मजदूरी करते हैं। मां घर संभालती है। अकेले घर और बाहर का देखने के बावजूद उन्होंने मुझे हर तरीके से सपोर्ट किया। कोई काम नहीं करने देती थी। इसके अलावा जब भी मुझे रात में पढ़ाई करती होती थी। मुझसे पहले जग कर मुझे जगाती थी। डर न लगे इसलिए जब तक मैं पढ़ती थी तब तक वो जगी रहती थी। रिजल्ट आने के बाद सबसे ज्यादा खुश वही थी। साईकिल से रोज 4 km का सफर तय करती थी बिदिशा ने बताया कि घर से स्कूल की दूरी करिब 4 किलोमीटर है। मैं साईकिल से रोज स्कूल जाती थी। ठंड में तो बहुत दिक्कत होती थी। लेकिन फिर मैंने स्कूल मिस नहीं किया। पैरेंट्स और टीचर्स को दी सफलता का श्रेय वहीं उन्होंने अपने सफलता का श्रेय अपने माता- पिता और स्कूल के टीचर्स को दी है। उनका कहना है कि बिना उनके विश्वास और सपोर्ट के यह कर पाना मुश्किल था। उनसे मुझे हमेशा मोटिवेशन मिला है। जीवन का लक्ष्य बड़ा है बिदिशा का कहना है कि जीवन में उनका लक्ष्य बड़ा है। जब तक वह अपने सपने को हासिल नहीं कर लेती हैं, ऐसे ही मेनहत करती रहेंगी। उनका मानना है कि हार्ड वर्क से ज्यादा स्मार्ट वर्क करना चाहिए। सफलता जरूर मिलेगी। जानिए बिदिशा के परिवार के बारे में उनके परिवार में पिता- माता और उनकी छोटी बहन रहती है। जो क्लास 3rd में पढ़ती है। बिदिशा आगे अपनी पढाई PCM सब्जेक्ट्स से जारी रखना चाहती हैं। आगे चलकर क्या बनना है, अभी इसे राज ही रखना चाहती हैं।
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