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    एवरेस्ट पर फतह कर वापस गोरखपुर पहुंची दिव्या:डेढ़ साल से कर रही थी तैयारी, बोलीं- जुनून हो तो हर मंजिल आसान

    3 hours ago

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    गोरखपुर की दिव्या सिंह जब माउंट एवरेस्ट बेस कैंप से लौटकर शहर पहुंचीं तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। लोगों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया, मिठाई खिलाई और बधाई दी। इसे लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। दिव्या सिंह ने 24 मार्च को 17,560 फीट की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप तक साइकिल से पहुंचकर इतिहास रच दिया। वह ऐसा करने वाली भारत की पहली और दुनिया की दूसरी महिला बन गईं। इस दौरान वहां तापमान माइनस 12 डिग्री तक दर्ज किया गया, जो इस सफर की कठिनाई को साफ दिखाता है। डेढ़ साल पहले आया था विचार दिव्या सिंह ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले वह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए गई थीं। वहीं उन्हें जानकारी मिली कि अब तक कोई महिला साइकिल से बेस कैंप तक नहीं पहुंची है। इसी के बाद उन्होंने तय किया कि वह यह कर दिखाएंगी और उसी दिन से तैयारी शुरू कर दी। इस चुनौती के लिए दिव्या सिंह ने खुद को मजबूत बनाने के लिए लगातार अभ्यास किया। उन्होंने माउंट आबू, नेपाल और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में साइक्लिंग कर अपनी तैयारी की। ऊंचाई, ठंड और कठिन रास्तों में अभ्यास कर उन्होंने अपने शरीर और मन दोनों को तैयार किया। 16 मार्च से शुरू हुआ 14 दिन का कठिन सफर दिव्या सिंह ने 16 मार्च को काठमांडू से अपनी साइकिल यात्रा शुरू की। इसके बाद सलेरी, सुरखे, फाकडिंग, सागरमाथा नेशनल पार्क, नामचे बाजार, डीबोचे, फिरचे, लोबुचे और गोरखशेप जैसे दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए 24 मार्च को एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचीं। यह पूरा सफर उन्होंने 14 दिनों में पूरा किया, जिसमें हर दिन नई चुनौती सामने आई। इस यात्रा में मौसम सबसे बड़ी चुनौती रहा। कई दिनों तक लगातार बर्फबारी और बारिश होती रही। तेज ठंडी हवाएं चलती रहीं और तापमान माइनस में बना रहा। कई जगह रास्ते इतने खराब थे कि उन्हें साइकिल कंधे पर उठाकर चलना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी होने लगी, जिससे सांस लेने में दिक्कत हुई और शरीर जल्दी थकने लगा। कई बार दिल की धड़कन तेज हो जाती थी, लेकिन इसके बावजूद दिव्या सिंह ने रोजाना 10 से 12 घंटे तक साइक्लिंग जारी रखी और अपने लक्ष्य तक पहुंचीं। दिव्या सिंह ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच उमा सिंह को दिया। उन्होंने बताया कि कोच के सही मार्गदर्शन, योजना और लगातार सहयोग से ही यह अभियान सफल हो सका। कठिन समय में कोच का अनुभव उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। लड़कियों और युवाओं के लिए बनीं बड़ी प्रेरणा गोरखपुर में स्वागत के दौरान दिव्या सिंह ने कहा कि अगर आपके अंदर कुछ करने का जुनून और जज्बा है, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह सफर अपने माता-पिता, गोरखपुर और देश का नाम रोशन करने के लिए पूरा किया। दिव्या सिंह की इस उपलब्धि से खासकर लड़कियों और युवाओं में नया जोश देखने को मिल रहा है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सीमित साधनों के बावजूद अगर मेहनत, हिम्मत और सही दिशा हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। पिपरौली ब्लॉक के बनौड़ा गांव की रहने वाली दिव्या सिंह पेशे से शिक्षक हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि छोटे गांव से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। उनकी सफलता अब गोरखपुर ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व की बात बन गई है।
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