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    ईरान जंग के बीच पुतिन ने दिल्ली भेजा अपना खास अफसर, अब खेल होना तय!

    2 hours from now

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    मिडिल ईस्ट में जंग, तेल की कीमतों में उबाल और दुनिया की सबसे बड़ी ताकतें आमने-सामने और इसी बीच नई दिल्ली में एक ऐसी मुलाकात होती है जिसने कूटनीतिक गलियारों में इस वक्त खतरनाक हलचल मचा दी है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने रूस के उप विदेश मंत्री एंड्री से दिल्ली में मुलाकात की है। बता दें कि नई दिल्ली में हुई इस हाई लेवल मीटिंग में भारत और रूस ने अपने स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और भी ज्यादा मजबूत करने पर चर्चा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जो दावे सामने आए हैं उसमें यह कहा गया कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पर बातचीत हुई है और सबसे अहम मिडिल ईस्ट का बढ़ता संकट भी चर्चा का बड़ा मुद्दा रहा। यानी यह कोई सामान्य डिप्लोमेटिक मुलाकात नहीं थी बल्कि सीधे-सीधे ग्लोबल क्राइसिस मैनेजमेंट से जुड़ी बातचीत थी। अब आप यह समझिए कि असली गेम क्या हो रहा है।इसे भी पढ़ें: युद्ध के बीच भारत ने निकाला 1000 मिसाइलों का बाहुबली, पाकिस्तान में भगदड़!दरअसल बता दें कि इस वक्त मिडिल ईस्ट में जो तनाव है उसका सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। तेल की सप्लाई हो या फिर गैस की कीमतें और इतना ही नहीं ग्लोबल ट्रेड भी इस में इसका असर पड़ रहा है। भारत और रूस दोनों ही इस सिस्टम के बड़े खिलाड़ी हैं। रूस दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा निर्यातकों में से एक है। वहीं भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयतकों में से एक है। और खास बात यह है कि रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर भी बन चुका है। यानी अगर मिडिल ईस्ट में संकट बढ़ता है तो भारत और रूस के बीच का जो ये तालमेल है यह और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। बता दें कि इसके पीछे कई कारण हैं। भारत इस समय एक अनोखी पोजीशन में है। अमेरिका से भी रिश्ते मजबूत हैं। रूस के साथ भी टाइम टेस्टेड दोस्ती और मिडिल ईस्ट के देशों से भी गहरे संबंध। यानी भारत एक ऐसा देश है जो हर ब्लॉक से बात कर सकता है। रिपोर्ट्स ये बताती है कि भारत जो है वो लगातार ग्लोबल मंचों पर शांति, स्थिरता और सप्लाई चेन की सुरक्षा के लिए लगातार बातचीत कर रहा है। यानी भारत अब सिर्फ एक देश नहीं बल्कि डिप्लोमेटिक ब्रिज भी बन रहा है मिडिल ईस्ट क्राइसिस के बीच में। इसे भी पढ़ें: मछली पकड़ते ही पुतिन का होश उड़ा देने वाला ऐलान, बचा भारत, डरी दुनियाइस मीटिंग के पीछे कई बड़े संकेत छिपे हैं। पहला मिडिल ईस्ट क्राइसिस पर कोऑर्डिनेशन। भारत और रूस जो है वो दोनों ही देश ये चाहते हैं कि ऊर्जा सप्लाई बाधित ना हो और ग्लोबल मार्केट स्थिर रहे। दूसरा आने वाला इंडिया रूस समिट। रूस ने यह साफ कहा है कि इस साल बड़ा समिट हो सकता है। भारत रूस शिखर सम्मेलन जो है वो होने वाला है और प्रधानमंत्री की मॉस्को यात्रा की तैयारी चल रही है। तीसरा मल्टीप्लेयर वर्ल्ड का एजेंडा। भारत और रूस दोनों एक ध्रुवीय दुनिया के बजाय मल्टीप्लेयर वर्ल्ड ऑर्डर को सपोर्ट करते हैं। यानी यह मीटिंग सिर्फ आज के लिए नहीं बल्कि आने वाले ग्लोबल पावर बैलेंस के लिए भी काफी अहम बताई जा रही है। भारत और रूस का रिश्ता कोई नया नहीं है। बता दें कि रक्षा हो या फिर परमाणु ऊर्जा और या फिर स्पेस कॉरपोरेशन। इन सभी क्षेत्रों में दोनों देश दशकों से एक दूसरे के साथ काम कर रहे हैं और यही वजह है कि आज भी रूस भारत के लिए सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में से एक है।
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