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    डिलीवरी ब्वॉय के खाते से रोजाना 3.5 करोड़ का ट्रांजेक्शन:250 पेज का बैंक स्टेटमेंट मिला, फ्रॉड के लिए मंडी समिति का लाइसेंस लिया

    2 hours ago

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    कानपुर में डिलीवरी बॉय के बैंक खाते की जांच में साइबर टीम को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। जांच में सामने आया कि डिलीवरी बॉय के खाते से रोजाना 50 लाख से लेकर 3.50 करोड़ रुपये तक का ट्रांजेक्शन किया जाता था। पुलिस की रडार पर ऐसे करीब 20 खाते आए हैं, जिनमें डिलीवरी बॉय के खाते से रकम भेजी गई। पुलिस के हाथ 9 माह की 250 पेज की ट्रांजेक्शन शीट लगी है। साइबर सेल प्रभारी तनुज सिरोही ने बताया कि बेकनगंज के पेचबाग निवासी डिलीवरी बॉय ओवेस ने साल 2024 में कमला टॉवर स्थित एचडीएफसी बैंक की मुख्य शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया था। इस खाते में 9 माह के दौरान 130 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया। आरोपी मो. अमान और सरताज ने ओवेस का डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक के साथ-साथ बैंक में रजिस्टर्ड सिम कार्ड भी अपने पास रख लिया था, ताकि उसे खाते में हो रहे लेनदेन की जानकारी न मिल सके। 50 लाख का मिनिमम रोज होता था ट्रांजेक्शन ओवेस को बैंक खाता देने के बदले आरोपियों ने उसे प्रतिमाह करीब 9 हजार रुपए दिए। कुछ समय बाद जब उसने बैंक दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपी आनाकानी करने लगे। शक होने पर वह बैंक पहुंचा और खाते की जानकारी ली, तो पता चला कि 6 माह में 35 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हो चुका है। इसके बाद वह साइबर सेल में शिकायत करने पहुंचा। पुलिस ने जांच शुरू की तो आंकड़े इससे कई गुना अधिक सामने आए। साइबर सेल प्रभारी ने बताया कि 9 माह में देशभर की करीब 19 फर्मों से 130 करोड़ रुपए इस खाते में आए। इस रकम को खपाने के लिए ओवेस के खाते से रोजाना कम से कम 50 लाख और अधिकतम 3.50 करोड़ रुपये तक ट्रांजेक्शन किया जाता था। अब तक 20 से अधिक ऐसे खाते मिले हैं, जिनमें यह रकम भेजी जाती थी और वहां से पैसा निकाला जाता था। इतनी बड़ी रकम का रोजाना ट्रांजेक्शन होने के बावजूद बैंक की चुप्पी पर सवाल उठे। जांच में सामने आया कि खाते में मंडी परिषद की ओर से आढ़त का लाइसेंस जमा किया गया था, जिसके आधार पर अनलिमिटेड ट्रांजेक्शन संभव हो जाते हैं और टीडीएस कटौती में भी छूट मिल जाती है। हालांकि, खाते में जमा मंडी समिति का लाइसेंस फर्जी था या नहीं, इसकी जांच पुलिस अब करने की तैयारी में है। बैंकों से मांगी खातों की डिटेल साइबर प्रभारी ने बताया कि इन खातों में रकम कहां से आ रही थी, कहां खपाई जा रही थी, इसकी जांच की जा रही है। बताया कि अब तक ओवेस के खाते से 9 माह की डिटेल में यह रकम की जानकारी सामने आई है, ओवेस के अब तक के सभी ट्रांजेक्शनों की जानकारी के लिए बैंक को पत्र लिखा गया है। साथ ही जांच में सामने आए 20 खातों की जानकारी के लिए भी बैंक के नोडल अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है। वहीं स्वाट टीम के प्रभारी शिव कुमार मौर्या ने बताया कि ओवेस, मो. अमान और सरताज एक ही इलाके के रहने वाले है, ओवेस और अमान दोनों एक साथ काम भी करते थे। जिस कारण दोनों की एक दूसरे से अच्छी पहचान थी। आरोपियों ने ओवेस को ज्यादा पैसे कमाने का झांसा देकर जाल में फंसाया। उन्होंने बताया कि आरोपी बेरोजगारों को नौकरी और लोन का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे। उनके नाम का फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाते थे। खातों की चेकबुक, पासबुक, एटीएम अपने कब्जे में रखते और खातों से बड़ी धनराशि मंगवाकर कैश का आपस में बंटवारा कर लिया था। अब जानिए पूरा मामला… शक होने पर डिलीवरी बॉय पहुंचा बैंक बेकनगंज के पेचबाग निवासी ओवेस कुछ साल पहले तक फलों का कारोबार करते थे। उन्होंने बैंक में अपनी फर्म के नाम से करंट खाता भी खुलवाया था। हालांकि बाद में घाटा होने पर उन्होंने व्यापार बंद कर दिया और डिलीवरी बॉय की नौकरी करने लगे। इसी दौरान बेकनगंज निवासी मो. अमान और चमनगंज निवासी मो. वसीउद्दीन उर्फ सरताज, जो उनके परिचित थे, उनसे संपर्क में आए। दोनों ने स्क्रैप कारोबार में रुपए के लेन-देन का हवाला देते हुए ओवेस से उनका बैंक खाता 9 हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर ले लिया। इसके बाद आरोपियों ने डेबिट कार्ड से लेकर चेकबुक और अन्य बैंक दस्तावेजों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ समय बाद आरोपियों ने किराए की रकम दोगुनी कर दी, जिससे ओवेस को शक हुआ। वह बैंक पहुंचा और खाते की जानकारी ली तो उसमें करोड़ों रुपये के टर्नओवर का खुलासा हुआ। इसके बाद उसने स्वरूप नगर थाने में दोनों युवकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डपकेश्वर धाम के पास से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों में वसीउद्दीन उर्फ सरताज बीए पास है, जबकि अमान बीकॉम अंतिम वर्ष का छात्र है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पिछले 9 माह में ओवेस के खाते से 1.30 अरब रुपये का लेन-देन किया है। आरोपियों के पास मिली नोट गिनने की मशीन पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक नोट गिनने की मशीन बरामद की है। साथ ही दो फर्मों के बैनर, 39 ब्लैंक चेक, दो किरायेदारीनामा, दो एग्रीमेंट, एक सहमति पत्र और तीन आधार कार्ड भी बरामद किए गए हैं। पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए एजेंटों ने शहर के साथ ही दिल्ली और प्रदेश की करीब 19 कंपनियों के खातों से लेन-देन किया है। आरोपियों के पास ऐसे कितने म्यूल बैंक अकाउंट हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
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