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    CSJMU तैयार करेगा सेमीकंडक्टर इंजीनियर:कानपुर में 12वीं के बाद छात्रों को इंडस्ट्री में मौका मिलेगा

    22 hours ago

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    आने वाला समय चिप और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी का है। भारत जिस तरह से दुनिया का 'चिप हब' बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए कुशल इंजीनियरों की भारी मांग होने वाली है। इसी भविष्य को भांपते हुए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के यूआईईटी संस्थान ने युवाओं के लिए खास 'मिशन एडमिशन 2026-27' शुरू किया है। यहां के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में संचालित इंटीग्रेटेड एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स (VLSI एवं IoT सिस्टम) कोर्स छात्रों को सीधे ग्लोबल टेक इंडस्ट्री के लिए तैयार कर रहा है। 5 साल का कोर्स, दो डिग्रियां और करियर की गारंटी यह प्रोग्राम उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो 12वीं के बाद ही अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं। यह एक पांच वर्षीय (3+2) ड्यूल डिग्री प्रोग्राम है, जिसमें छात्रों को स्नातक और परास्नातक दोनों डिग्रियां एक साथ मिलती हैं। खास बात यह है कि 12वीं पास छात्र पहले साल में और बीएमसी (PCM) कर चुके छात्र सीधे चौथे साल में प्रवेश ले सकते हैं। बिना जेईई (JEE) रैंक के भी छात्र कोर टेक्नोलॉजी के इस बड़े क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं। मात्र 30 हजार फीस और वर्ल्ड क्लास लैब की सुविधा प्राइवेट संस्थानों में जहाँ ऐसे कोर्सेज की फीस लाखों में होती है, वहीं CSJMU में इसकी वार्षिक फीस मात्र 30,200रु रखी गई है। कम फीस के बावजूद यहाँ छात्रों को विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर जैसे Xilinx और Cadence पर ट्रेनिंग दी जाती है। यही वो टूल्स हैं जिनका उपयोग दुनिया की बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियां करती हैं। विभाग में ड्रोन लैब, एआई लैब और वीएलएसआई डिजाइन जैसी अत्याधुनिक लैब मौजूद हैं, जहाँ छात्र चिप डिजाइनिंग की बारीकियां सीखते हैं। लाखों के पैकेज वाली जॉब्स और ग्लोबल अवसर सेमीकंडक्टर मिशन के तहत भारत में कई विदेशी कंपनियां निवेश कर रही हैं। इस कोर्स को करने के बाद छात्र वीएलएसआई डिजाइन इंजीनियर, आईओटी डेवलपर और सिस्टम आर्किटेक्ट जैसे हाई-सैलरी पदों पर काम कर सकते हैं। आईआईटी कानपुर और एचसीएल जैसी बड़ी संस्थाओं के साथ जुड़ाव होने के कारण छात्रों को रियल-टाइम प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका भी मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो छात्र आज इन तकनीकों को सीखेंगे, वे कल की ग्लोबल टेक इंडस्ट्री के लीडर होंगे। केवल 30 सीटें, मेरिट से होगा चयन इस हाई-डिमांड कोर्स में सीटों की संख्या काफी कम है। विभाग में केवल 30 सीटें उपलब्ध हैं, जिन पर प्रवेश विश्वविद्यालय के नियमानुसार मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। कम सीटें और बढ़ती मांग के कारण प्रवेश प्रक्रिया काफी प्रतिस्पर्धात्मक रहने वाली है। इच्छुक छात्र समय रहते आवेदन कर भविष्य की इस स्मार्ट टेक्नोलॉजी का हिस्सा बन सकते हैं।
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