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    चंद्रशेखर आजाद बोले- शिक्षा और अधिकार ही असली ताकत:सहारनपुर में अंबेडकर जयंती पर हुए कार्यक्रम में पहुंचे, कहा- संघर्ष से मिली पहचान

    5 hours ago

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    सहारनपुर में मंगलवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अंबेडकर स्टेडियम सहित कई स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पहुंचे, जहां उनके समर्थकों ने बड़ी संख्या में उनका स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने सहारनपुर की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके जीवन में इस धरती का विशेष योगदान रहा है। आजाद ने बताया कि 16 महीने जेल में रहने के दौरान उन्होंने डॉ. अंबेडकर के विचारों का गहन अध्ययन किया और उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन की दिशा निर्धारित की। अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए आजाद ने कहा कि संसद तक पहुंचना उनका संकल्प था, जिसे उन्होंने पूरा किया। उन्होंने बताया कि संसद में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के सामने खड़े होकर उन्होंने अपने वादों को दोहराया और समाज के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। आजाद ने डॉ. अंबेडकर को 'इतिहास और दर्पण' बताते हुए कहा कि उनके विचार इतने व्यापक हैं कि उन्हें समझने के लिए एक जीवन भी कम पड़ सकता है। आजाद ने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्षों का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बचपन में भेदभाव और स्कूल में बाहर बैठने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद डॉ. अंबेडकर ने हार नहीं मानी। उनके द्वारा रचित संविधान ने देश के हर नागरिक को समान अधिकार प्रदान किए, जिसमें महिलाओं को मतदान और शिक्षा का अधिकार मिलना एक ऐतिहासिक देन है। चंद्रशेखर आजाद ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल नारेबाजी से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि पढ़ने और समझने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों और संवैधानिक सुरक्षा दिलाने वालों के बारे में जानें। आजाद ने कहा कि आज के तकनीकी युग में जानकारी हासिल करना आसान है, इसलिए जागरूकता भी बढ़नी चाहिए। उन्होंने समाज में एकता, अनुशासन और भाईचारा बनाए रखने की अपील की।
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