Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    'बेटा खोया, कटरा गैंग सरगना को सजा नहीं दिला सका':गाजीपुर में पिता बोले- 5 साल से इंसाफ का इंतजार; पुलिस ने अपराधी को पाला

    5 hours ago

    1

    0

    'मेरी तस्वीर मत लीजिए। वो लोग खतरनाक हैं। पुलिस और नेताओं में अच्छी पहचान है। मेरे बेटे का मर्डर केस कोर्ट पहुंचा, लेकिन शंकर कभी हाजिर नहीं हुआ।’ ये कहते हुए विनोद सिंह की आंख में आंसू आ जाते हैं। वे छात्र अंशुमान सिंह के पिता हैं, जिसकी कटरा गैंगे के सरगना शंकर पांडेय ने 5 साल पहले हत्या कर दी थी। गाजीपुर में होटल कारोबारी विनीत राय की सरेआम हत्या के बाद अंशुमान सिंह के मामले में भी सरगर्मी बढ़ गई है। कोर्ट ने शंकर के खिलाफ गैरजमानती वॉरंट (NBW) जारी किया है। इस मर्डर का केस लड़ रहे पिता विनोद सिंह से दैनिक भास्कर ने बात की। वे कहते हैं- शंकर को सजा क्यों होगी? गाजीपुर की पुलिस उससे हेरोइन (ड्रग्स) की तस्करी करवाती है। पुलिस ही उसको पाल पोस रही थी। किसी का भी अपहरण कर लेना, मारपीट कर सड़क किनारे फेंक देना, ये सब कटरा गैंग के लिए बहुत नॉर्मल था। वे आगे कहते हैं- अब बड़ा कांड कर दिया, तब सबको शंकर की याद आई। उससे जुड़े पुराने केस पर तेजी से सुनवाई होने लगी। कटरा गैंग के कुछ ही किस्से लोगों को मालूम हैं, क्योंकि ज्यादातर मामले पुलिस रिकॉर्ड में कभी दर्ज ही नहीं हुए। शंकर ने कई लोगों को मरवाया। मगर उसके खिलाफ सिर्फ विनीत और अंशुमान का मर्डर केस दर्ज है। 10वीं में गैंग बनाई, 12वीं के बाद पहली हत्या गाजीपुर शहर के ही गौसाबाद इलाके में शंकर पांडेय का करीब 2 हजार स्क्वायर फीट में आलीशान मकान बना है। वहां इस वक्त ताला लटका है। उसका पूरा परिवार फरार है, जबकि पिता ड्रग्स तस्करी मामले में पश्चिम बंगाल की जेल में बंद है। शंकर ने इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़ाई की है। साल 2014 में जब वह 10वीं में था, तभी से उसने स्कूल में गुटबाजी और मारपीट शुरू कर दी थी। साल 2016 में 12वीं पास करने के बाद उसने अपराध को ही अपना फुल टाइम पेशा बना लिया। इसी साल रेवतीपुर के उतरौली गांव के अंशुमान सिंह ने भी 12वीं पास की थी। अंशुमान ने शहर में ही रहकर आदर्श इंटर कॉलेज से पढ़ाई की थी। इसके बाद गाजीपुर के पीजी कॉलेज में बीकॉम में एडमिशन लिया। कुछ वक्त बाद लखनऊ में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए एक कोचिंग में एडमिशन ले लिया। कटरा गैंग के सत्यम से झगड़े के बाद मिलने लगी थीं धमकियां अंशुमान का स्कूल के टाइम पर सत्यम राय और उसके दोस्तों से झगड़ा हो गया था। ये कटरा गैंग के लड़के थे। झगड़े के बाद शंकर ने अंशुमान को कई बार फोन पर धमकाया। इससे वह बहुत परेशान रहने लगा था। हालांकि, उसने अपनी परेशानी घर पर किसी को नहीं बताई। अंशुमान के पिता विनोद सिंह कहते हैं, ‘अंशुमान होली की छुट्टी पर घर आया था। उस वक्त हमें उसके दोस्तों से पता चला कि वो परेशान है। कुछ लड़के उसे परेशान कर रहे हैं। इसके बाद हमने ही कहा कि तुम अब यहीं रहो। गाजीपुर में ही रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई पर फोकस करो। बेटा तैयार हो गया।' कॉलोनी में घुसे, मगर भागना पड़ा विनोद आगे बताते हैं, ‘अंशुमान शहर की ही एक कॉलोनी में रहने लगा। उसकी साथ एक दोस्त राघवेंद्र और हमारे रिश्तेदार का बेटा रहकर पढ़ाई करने लगे। यहां तक सब कुछ ठीक चल रहा था। फरवरी, 2020 में शंकर और उसकी गैंग के लड़कों ने अंशुमान पर पहला हमला किया। कॉलोनी पहुंचकर खुलेआम गाली-गलौच और मारपीट की। मगर, उस वक्त कॉलोनी के लोग मदद के लिए आ गए। गैंग के लड़कों को दौड़ा लिया। इन लोगों को वहां से भागना पड़ा। तब ये लोग धमकी दे रहे थे कि अभी जा रहे हैं, लेकिन तुम लोग बचोगे नहीं…।' अंशुमान से कहा- समझौता करेंगे, फिर बुलाकर हमला किया 21 मार्च, 2020 को कटरा गैंग के सत्यम राय ने अंशुमान को फोन किया। कहा कि सकलेनाबाद के पास शाह जुनैद पीर दरगाह है, वहां आ जाओ, समझौता कर लेते हैं। अंशुमान अपने दोस्त राघवेंद्र के साथ मौके पर पहुंच गया। उसे अंदाजा नहीं था कि सत्यम के साथ शंकर पांडेय और उसका ग्रुप भी वहां होगा। जब अंशुमान ने देखा कि शंकर गुट के लड़कों के हाथों में लाठी-डंडे हैं, तो वो लोग पीछे हट गए। शंकर पांडेय के साथ वहां प्रियांशु सिंह, सौरभ सिंह, बाबी सरकार, रणजीत, अभिषेक समेत 10 से ज्यादा लड़के थे। उन लोगों ने जैसे ही अंशुमान और राघवेंद्र को देखा, हमला कर दिया। लाठी-डंडों और हॉकी से बुरी तरह से पीटना शुरू कर दिया। फिर चाकू निकाल लिये। अंशुमान के पैर, हाथ और गर्दन पर ताबड़तोड़ वार किए। राघवेंद्र का तो जबड़ा ही फट गया। जब हमलावरों को लग गया कि दोनों मर गए हैं, तब वहां से भाग निकले। शोर-शराबा सुनकर जो लोग मजार के पास पहुंचे, उन्होंने दोनों को हॉस्पिटल पहुंचाया, लेकिन अंशुमान को बचाया नहीं जा सका। राघवेंद्र को वाराणसी रेफर किया गया। वहां करीब 1 महीने इलाज के बाद उसकी जान बची। विनोद सिंह कहते हैं, ‘राघवेंद्र ने जिन लड़कों की डिटेल हमें बताई, उनके आधार पर मैंने शंकर पांडेय, प्रियांशु सिंह, बाबी सरकार और सौरभ सिंह समेत 7 अज्ञात हमलावरों पर मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने 4 दिन बाद छापेमारी करके प्रियांशु, सौरभ और अज्ञात में दर्ज रंजीत राजभर, अभिषेक कुमार को गाजीपुर रेलवे स्टेशन के पीछे से पकड़ लिया। शंकर को पकड़ा नहीं जा सका।' अंशुमान के पिता भाजपा के बूथ अध्यक्ष, बोले- मैं कुछ नहीं कर पाया अंशुमान के पिता 42 साल से भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। वे गाजीपुर में बूथ अध्यक्ष हैं। कहते हैं, ‘बेटा खोया था, कोई कसर नहीं छोड़ी… थाने से लेकर कोर्ट तक अपनी पूरी ताकत से केस लड़ा। लेकिन शंकर पांडेय के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करवा सका।' वे कहते हैं, ‘जब विनीत को उसने उतनी ही बेरहमी से मार डाला, तब लोगों को अंशुमान की याद आई है। इन 5-6 सालों में शंकर और उसके गैंग ने 4-5 और हत्याएं कर डालीं। ये बदमाश हैं, इसलिए पुलिस-नेताओं से अच्छी सेटिंग है। शंकर के बारे में पता कर लीजिए, वो कभी 2 महीने से ज्यादा जेल में नहीं रहा। हमारे मामले में तो कभी कोर्ट में पेश ही नहीं हुआ। तारीख पर उसका वकील आता रहा, जिरह करके चला जाता था।' वे कहते हैं, ‘कटरा गैंग का सदस्य बाबी सरकार तो माफिया रंजीत सिंह के परिवार का है। इनके वकील भी तय हैं, कुछ दिन जेल में रहते हैं, फिर जमानत करवा लेते हैं।' विनोद अपने बेटे की मौत की कहानी सुनाते हुए रोने लगते हैं। वे कहते हैं, ‘शंकर को सजा क्यों ही होगी, उससे तो गाजीपुर में पुलिसवाले हीरोइन की तस्करी करवाते हैं। उसे तो पाल-पोसकर तैयार किया है। गाजीपुर में किसी को उठा लेना या सरेआम पीट देना, ये सब कटरा गैंग के लिए बहुत आसान हो गया था। अब जब बड़ा अपराध किया, तब लोगों को पता चला कि ये तो गुंडा है।' अंशुमान का मामला गाजीपुर कोर्ट में चल रहा है। इस मामले को सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह देख रहे हैं। हमने कोर्ट में उनसे बात की। वे बताते हैं, ‘शंकर कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था। उसके खिलाफ पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम भी रखा है। इन बातों को हमने एडिशनल जिला जज शक्ति सिंह के सामने रखा। तब उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ है। उसे 25 जून को कोर्ट में पेश होना होगा।’ वकील बोले- जाम लगने से कपड़ा कारोबारी बचे, नहीं तो किडनैप हो गए थे अखिलेश सिंह कहते हैं, ‘गाजीपुर के ही महुआबाद में सचिन चौरसिया की गारमेंट्स की दुकान है। शंकर पांडेय और एनकाउंटर में मारे गए कमलेश चौधरी ने 5 सितंबर, 2024 को दिन दहाड़े सचिन को पीटा और अपहरण कर लिया था। काली स्कॉर्पियो से भागने लगे, तब आसपास के लोगों ने शोर मचाया। सड़क पर जाम लगा था, इसलिए उन्हें सचिन को छोड़कर भागना पड़ा। इस मामले में भी गैरजमानती वारंट जारी हुआ है। अगर ये उस तारीख पर भी नहीं पेश हुआ तो धारा 82 के तहत भगोड़ा अपराधी माना जाएगा। धारा 83 के तहत उसकी संपत्तियां कुर्क की जाएंगी।' आलोक दुबे, सोनू पर भी 1-1 लाख का इनाम, ये दोनों भी फरार शंकर पांडेय के खिलाफ हत्या, हत्या का कोशिश, अपहरण, मारपीट जैसे 10 मुकदमें दर्ज हैं। कई मामलों में इसकी गैंग के सदस्यों ने इसके इशारे पर अपराध किया। उन मामलों में शंकर पांडेय का नाम दर्ज नहीं है। शंकर के साथ इस वक्त आलोक दुबे और सोनू यादव भी फरार हैं। इन तीनों पर 1-1 लाख रुपए का इनाम घोषित हुआ है। पुलिस यूपी के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में छापेमारी कर रही है। गाजीपुर पुलिस ने जिले में 49 गैंग चिह्नित किए हैं। इसमें कटरा गैंग भी है, लेकिन अब तक कटरा गैंग के किसी भी मेंबर को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। शंकर पांडेय के सोशल मीडिया अकाउंट पर तमाम ऐसी रील हैं, जो भौकाल दिखाने के लिए बनाई गई हैं। कई ऐसे हैं जिसमें पुलिस शंकर के सामने हाथ जोड़ रही है। ----------------------------------------- कटरा गैंग से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… खुद को 'श्रीप्रकाश शुक्ला' समझता था कटरा-गैंग सरगना शंकर पांडेय:वॉट्सएप ग्रुप में थे 300 गुर्गे; गाजीपुर में 49 अन्य गैंग पुलिस के रडार पर होटल कारोबारी के बेटे की हत्या के बाद गाजीपुर का खोड़ा और कटरा इलाका पुलिस छावनी में बदल चुका है। वारदात को अंजाम देने वाले 'कटरा गैंग' का सरगना शंकर पांडेय खुद को कुख्यात अपराधी ‘श्रीप्रकाश शुक्ला’ जैसा दिखाता था। गैंग का नेटवर्क वॉट्सएप से ऑपरेट होता था। गैंग में जुड़े करीब 300 लड़के सिर्फ एक मैसेज पर हॉकी-डंडे लेकर मारपीट करने पहुंच जाते थे। पढ़िए पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    यूपी की लड़की जहरीले सांपों से नहीं डरती:देखते ही दबोच लेती है; अब तक 393 सांपों को बचा चुकी; VIDEO में स्नेक गर्ल
    Next Article
    रिश्वत लेकर साहब को नहीं देंगे तो बाथरूम धोना पड़ेगा:कुशीनगर का जवान बोला- जैसा पैसा, वैसी पोस्टिंग; पुलिस अफसर क्या वाकई 'काले अंग्रेज' हैं

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment