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    बरेली में अनन्या किचन को बुलडोजर से तोड़ा:पीएम मोदी से प्रेरित होकर शुरू किया था स्टार्टअप, मेयर बोले- नुकसान की भरपाई करेंगे

    4 hours ago

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    'मैंने पीएम मोदी से इंस्पायर होकर 'अनन्या किचन' शुरू किया था। मगर नगर निगम की टीम ने मेरी अनुपस्थिति में मेरा किचन तोड़ दिया। निगम कर्मियों ने कहा कि अतिक्रण था। मेरा स्टॉल बीच में लगा था। मेरा ही हटाया गया। जबकि अन्य स्टॉलों को नहीं हटाया गया।' ये कहना है बरेली के सिविल लाइंस में जेल रोड पर किराए के कमरे में रहने वाली 24 वर्षीय अनन्या पांडे का। अनन्या ने करीब 6 महीने पहले 'अनन्या किचन' नाम से फास्ट फूड का स्टॉल शुरू किया था। चौकी चौराहा स्थित बटलर प्लाजा के सामने लगने वाले इस स्टॉल के स्वाद के लोग दीवाने हो गए थे। गुरुवार को नगर निगम के अतिक्रमण प्रभारी सच्चिदानंद प्रवर्तन दल की टीम और बुलडोजर के साथ वहां पहुंचे। अनन्या के स्टॉल को तोड़ दिया। इसके बाद अनन्या ने मेयर डॉ. उमेश गौतम से मदद मांगी। मेयर ने आश्वासन दिया- नुकसान की भरपाई की जाएगी। अनन्या को पहले से बेहतर स्टॉल बनवाकर दिया जाएगा। अनन्या ने कब और कैसे स्टॉल शुरू किया था? बाकी स्टॉल पर कार्रवाई हुई या नहीं? निगम अफसरों का क्या कहना है? पढ़िए रिपोर्ट… कौन हैं अनन्या, वो जानिए- पीलीभीत के बीसलपुर तहसील के हबीबुल्ला खां शुमाली की रहने वाली अनन्या अपने परिवार में सबसे बड़ी हैं। उनके पिता विवेक पांडे को पैरालिसिस होने के कारण वे बेड पर हैं। जिससे उनकी नौकरी छूट गई। माता-पिता दोनों शिक्षा मित्र हैं। अनन्या ने बीबीए और डीएलएड करने के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उनकी छोटी बहन अंशिका ऑप्टोमेट्री का डिप्लोमा कर रही है और भाई अच्युत 9वीं में पढ़ता है। भाई-बहनों की पढ़ाई और बीमार पिता की देखभाल के लिए ही अनन्या ने यह स्टार्टअप शुरू किया था। स्टॉल शुरू करने से पहले अनन्या ने बजाज फिंसर्व, फ्यूचर यूनिवर्सिटी और राजश्री मैनेजमेंट कॉलेज में नौकरियां कीं। इसी दौरान एक सड़क हादसे में उनके हाथ-पैर फ्रैक्चर हो गए। करीब एक साल तक बेड रेस्ट पर रहने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और 'अनन्या किचन' की नींव रखी। लेकिन नगर निगम की इस कार्रवाई ने उन्हें एक बार फिर आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। मैंने अपनी सारी सेविंग (पौने दो लाख रुपये) उस स्टील के स्टॉल में लगाई थी। मैंने चालान के पैसे दिए, मगर नहीं लिए अनन्या का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनके साथ बदसलूकी की गई। उन्होंने बताया, "मैंने उनसे कहा कि आप मेरा चालान काट लीजिए। लेकिन मेरा स्टॉल उठाकर मत ले जाइए। इस पर प्रभारी और अधिक भड़क गए और 25 हजार की पर्ची काटने की धमकी दी। अनन्या के अनुसार, विरोध के बावजूद उनके सामने ही उनके स्वाभिमान और रोजगार के साधन को तोड़ दिया गया। अनन्या ने बताया कि 9 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे अतिक्रमण की टीम आई। मेरी अनुपस्थिति में सिर्फ मेरा ही स्टॉल जेसीबी से उठाया गया, जबकि वहां पूरी लेन में 10-12 स्टॉल और लगे थे। मेरा स्टॉल बिल्कुल बीच में था। वहां मौजूद मेरे हेल्पर ने कहा कि आप सभी से हजार रुपये का चालान ले रहे हैं, तो मेरा भी ले लीजिए, तो उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इसका 10,000 का चालान कटेगा। मेरे पास वीडियो है कि जब तक मेरा स्टॉल ले जाया जा रहा था, बाकी सब वहीं लगे थे। अनन्या ने कहा- सिर्फ मेरा स्टॉल हटाया गया, बाकी सब लगे जब मैंने कहा कि मैं इस कार्रवाई के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाऊंगी, तो उन्होंने मेरा स्टॉल वहीं तोड़ दिया। उन्होंने मुझे कोई नोटिस या वार्निंग भी नहीं दी थी। मैं अतिक्रमण प्रभारी से कभी नहीं मिली। सिर्फ पर्ची काटते हुए देखा है। नगर निगम कह रहा है कि बाकी स्टॉल भी हटे हैं, लेकिन मेरे पास रिकॉर्डिंग है कि 1 बजकर 53 मिनट पर मेरा स्टॉल हटा और 2 बजकर 35 मिनट तक बाकी सब वहीं लगे थे। एक तरफ प्रधानमंत्री लोन देकर लोगों को स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन स्टार्टअप के लिए जगह कहां है? मैंने मेयर साहब से भी यही कहा था कि अगर सड़क चौड़ी करनी है तो हमारे लिए स्ट्रीट फूड मार्केट क्यों नहीं बनवा दिया जाता? अन्य लोग अपना दर्द नहीं कह पाते, मैं शायद एक इन्फ्लुएंसर मानी जाती हूं इसलिए यह मुद्दा बन गया। हजारों लोग ऐसे हैं जिनकी कोई गिनती ही नहीं है। बदसलूकी करने वाले पर कार्रवाई हो एक अधिकारी ने मेरे साथ बदसलूकी की। मैं उसके खिलाफ कार्रवाई चाहती हूं। एक महिला चाहे सड़क पर स्टॉल लगाए या कहीं और उसकी भी अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट होती है। जब मेरा स्टॉल तोड़ा गया, मेरे हाथ कांप रहे थे। कुछ लोग इसे 'फेम' के लिए किया गया नाटक बता रहे हैं, लेकिन जिस पर बीतती है वही जानता है। यह फेम नहीं, अपने हक की लड़ाई है।
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