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    बनारसी साड़ी उद्योग में ग्रहण लगा रहा सूरत:कारोबारी बोले- हमें व्यावसायिक केंद्र या दुकान नहीं चाहिए, बस डुप्लीकेसी पर हो सख्ती

    2 hours ago

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    वाराणसी में बनारसी साड़ी के व्यापार को नयी धार देने के लिए वाराणसी नगर निगम मालगोदाम, कैंट पर नमो: बनारस केंद्र विकसित करने जा रहा है। जिसमें साड़ी कारोबारियों को दुकाने दी जाएंगी। जहां वो अपना कारोबार करेंगे। लेकिन काशी के बुनकर व्यसायिक केंद्र नहीं बल्कि अपने प्रोडक्ट्स के लिए बाजार चाहते हैं। साड़ी कारोबारियों से बात की तो उन्होंने कहा हमें कोई व्यावसायिक केंद्र नहीं बल्कि अपनी साड़ी का बाजार चाहिए। सूरत से डुप्लीकेसी को रोकने का उपाय चाहिए। बुनकरों ने नमो व्यसायिक केंद्र का विरोध नहीं किया पर उन्होंने कहा कि पहले हमारे कारोबार के बारे में सोचा जाए की उसे कैसे बचाया जाएगा। नाकि व्यावसायिक केंद्र खोला जाए। वाराणसी में पहले से ट्रेड फेसिलिटी सेंटर, बड़ा लालपुर में मौजूद है। जहां बुनकरों के लिए कारोबार की जगह दी गई है। इसके बाद अब नामों- बनारस केंद्र की कल्पना नगर निगम ने की है। ऐसे में दैनिक भास्कर ने वाराणसी के बुनकरों से इस बनारस केंद्र और मौजूदा हालत पर बुनकरों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले देखिये बनारसी साड़ी उद्योग की कुछ तस्वीरें… सबसे पहले बुनकर एसोसिएशन के अध्यक्ष से जानिए क्या है समस्या और क्या होना चाहिये?… पहले की प्लानिंग फ्लॉप हुई तो ये कैसे चलेगी वाराणसी बुनकर एसोसिएशन के अध्यक्ष हाजी इकरामुद्दीन ने बताया - जब पहले की प्लानिंग फ्लॉप हो चुकी है। तो दोबार उसी प्लानिंग पर काम करने का क्या फायदा। टीएफसी सेंटर का क्या हाल है सबको पता है। आपको यहां जो भी बुनकर माल तैयार करता है। उसे सरकार खरीद ले और मार्केट में बेचे जैसे पहले यूपीका और यूपी हैंडलूम हाउस थी। ये माल बुनकरों से लेकर अपने शोरूम में बेचती थी। इससे बनारस की गुडविल और मार्केट बढ़ी थी। सूरत के लोग कॉपी करके हमें बर्बाद कर रहे हैं हाजी इकरामुद्दीन ने कहा - आज स्थिति ये है कि सूरत वाले बनारस का सेम माल कॉपी करके बना रहे हैं। वो हमसे सस्ता माल वाराणसी में लाकर बेच रहे हैं। हमारे नाम से बनारस से सस्ता बेच रहे हैं। इससे बनारसी साड़ी के कारोबार से जुड़े लोग का गुडविल बर्बाद हो रहा है। हमार बिजनेस खत्म हो रहा है। यदि इस इन्ही रोका गया तो महामारी हो जाएगी। बनारसी साड़ी पर टैग लगे ताकि उसकी कॉपी न हो सके इकरामुद्दीन ने कहा - नमो बनारस केंद्र कभी सक्सेज नहीं होगा। क्योंकि सूरत हमारी टेक्नोलॉजी को कॉपी करके हमार माल पूरे बनारस के साथ ही साथ देश में बेच रहे हैं। इसे रोकने के लिए बनारसी साड़ी में एक जीआई टैग लगना चाहिए ताकि कोई भी इसकी डुप्लीकेसी न हो सके। इकरामुद्दीन ने कहा - सिर्फ बड़े व्यापारी जीआई टैग का इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे लोग परेशान हैं क्योंकि छोटे लोग बड़े सप्लायर्स को माल बेचते हैं। जब वहीं काम नहीं होगा तो कैसे आगे बढ़ेगा व्यापार। बनारसी के नाम से न बिके सूरत का माल हाजी इकरामुद्दीन ने कहा - नमो बनारस केंद्र के पहले सरकार को चाहिये कि जो बनारसी साड़ी को बर्बाद कर रहा सूरत उसकी डुप्लीकेसी को रोका जाए। हमारे माल पर हमारा नाम और टैग हो और सूरत की साड़ी पर लिखा हो कि यह सूरत की साड़ी है बनारसी नहीं है। इसके बाद ही किसी भी प्रकार से व्यापार और बुनकर को लाभ मिलेगा। आसाम सरकार ने किया है क्रिमिनल केस का प्रावधान इकरामुद्दीन ने कहा - आसाम का गमछा बहुत फेमस है। यह आसाम में 250-300 रुपए में बनता है। लेकिन अकबरपुर जिले के जलापुर में लोगों ने इसे 50 रुपए की कास्ट पर बनाया और आसाम में बड़े स्तर पर सप्लाई शुरू की। जिससे वहां के व्यापारियों का व्यापार चौपट हो रहा था। इसपर वहां के लोगों ने सीएम से शिकायत की जिसके बाद सीएम के हेमंत बिस्वा शर्मा के निर्देश पर वहां के दुकानदारों को नोटिस मिली की कोई भी डुप्लीकेट सामान को यहां का बताकर बेचेगा तो उसपर क्रिमिनल केस होगा। वैसे ही मेक्ला चादर भी बनारस और मुबारकपुर में बनता था। उसे भी बैन कर दिया और वो खुद बनाने लगे। सीएम योगी भी करें क्रिमिनल केस, डुप्लीकेसी पर सख्ती हो इकरामुद्दीन ने कहा - जिस तरह से आसाम सरकार ने वहां के लोगों के लिए सोचा वैसे ही यहां की योगी सरकार भी सोचे। यहां भी यदि सूरत की साड़ी बनारसी साड़ी के नाम पर बिके तो उस दुकानदार पर केस हो। साथ ही ऐसा प्रोसीजर प्रधानमंत्री निकालें जिससे रोजगार बढ़ जाए। हमें कोई दुकान की जरूरत नहीं है। यहां तो घर-घर में दुकान है। लोग 100 किलोमीटर दूर से यहां आते हैं और माल खरीद के ले जाते हैं। सरकार इस तरफ ध्यान दे ताकि हमारा कारोबार बचा रहे। अब जानिए बुनकर हाजी अनवार अंसारी ने क्या कहा? और वो क्या चाहते हैं सरकार से?… TFC से कोई लाभ नहीं मिला तो इससे क्या मिलेगा हाजी अनवर अहमद अंसारी: देखिए, सरकार तो बुनकरों के लिए बढ़िया ही सोच के दुकान लगाने का प्रयास कर रही है। लेकिन इसके पहले जो बड़ा लालपुर टीएफसी (Trade Facilitation Centre) खुला, उससे बुनकरों को कुछ लाभ ऐसा मिलता दिख नहीं रहा है। इससे ज्यादा सरकार को इसपर ज्यादा ध्यान देना चाहिए की बुनकर पलायन कर रहे हैं। बुनकर पलायन करके सूरत जा रहे हैं। उसकी वजह यह है कि यहं कारोबार सूरत की मार्केट ने ठप्प कर दिया। यहां काम नहीं है और वहां काम है। दुकानें खुलने पर हमारे एरिया में, शहर से बाहर नहीं हाजी अनवार ने कहा - सरकार को सबसे पहले ये देखना चाहिए किस कारण से बनारस के बुनकर बनारस छोड़ के सूरत पलायन कर रहे हैं। उसकी व्यवस्था यहां करें ताकि वो पलायन न करे। और दूसरी बात कि दुकान जो खुल रही है थोड़ा यहां से दूर है। दुकान अगर से हम लोगों के एरिया में खुले, गोलगड्डा जैसे यहां के मालगोदाम पर तो हमें फायदा मिलेगा वरना नहीं। सूरत का माल सस्ता पड़ रहा, प्रोडक्शन ज्यादा हाजी अनवार अंसारी ने कहा - बुनकारी यहां पर 25 प्रतिशत ही बची है। पहले क्या होता था यहां पर हैंडलूम से वीविंग होती थी। अभी हैंडलूम से पावरलूम ने जगह ले ली है। लेकिन सूरत में क्या होता है कि सूरत में जो भी सरकार की व्यवस्था है। उसकी वजह से वहां हाई-टेक सब न्यू मशीन आई है। हाई स्पीड वाली मशीन आई है। जिसकी वजह से वहां का माल काफी सस्ता पड़ रहा है। और हमारे यहां बुनकर गरीब परिवार से आते है। गरीब बुनकर हैं। तो यहां पर जो मशीनें हैं नॉर्मल मशीन है। तो उसमें प्रोडक्शन उतना नहीं हो पाता है। सूरत में चार साड़ी एक घंटा में प्रोडक्शन हो जाता और यहां दो साड़ी एक दिन में बनेगी। सूरत का माल लेकर बनारस के लोग बनारसी के नाम से बेच रहे हाजी अनवार अहमद ने कहा - सूरत ने बनारसी साड़ी के कारोबार को हाईजैक कर लिया है। यहां कहने में यह गुरेज नहीं है कि बनारसी साड़ी के बड़े कारोबारी अब सूरत की साड़ी को बनारसी साड़ी के नाम पर बेच रहे हैं। इससे बड़ी और क्या दुर्दशा और खराबी हो सकती है बनारस के लिए। ये बड़ी सोचने वाली बात है। ये मुख्यमंत्री जी को सोचना होगा कि एक बार बुनकर को बुनकर पर ध्यान दें, कैसे बुनकर यहाँ से जो पलायन कर रहे हैं, कर चुके हैं वो बनारस में आ जाएं, ऐसी यहां की व्यवस्था बनाएं। अब जानिए क्या है नगर निगम प्लान और क्या होगा दुकानों का एरिया?… वाराणसी नगर निगम कैंट स्थित मालगोदाम की बेशकीमती भूमि पर नमो: बनारस केंद्र विकसित करते का निर्णय लिया है । यह केंद्र न केवल वाराणसी के पारंपरिक बुनकरों और व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि शहर के आर्थिक ढांचे को भी मजबूती प्रदान करेगा। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में सोमवार को निगम के सभागार में हुई कार्यकारिणी की बैठक में नमो: बनारस केंद्र प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई ।​ नगर निगम की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत कुल 0.82 हेक्टेयर भू-भाग पर 145.36 करोड़ रुपये की लागत से जी-प्लस 6 मल्टीस्टोरी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। इस कॉम्प्लेक्स का कुल निर्माण क्षेत्रफल 48365.10 वर्ग मीटर होगा, जिसमें छोटे-बड़े कुल 844 आधुनिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव है। व्यापारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसमें 155 वर्ग फीट से लेकर 655 वर्ग फीट तक की दुकानें उपलब्ध होंगी। परियोजना के वित्तपोषण के लिए निगम ने एक मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत व्यापारियों के माध्यम से करीब 100 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि शेष 45.36 करोड़ रुपये की धनराशि निगम राज्य वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान की बचत से खर्च करेगा। यह केंद्र बनारसी साड़ी उद्योग और सप्तसागर दवा मंडी के व्यवसायियों को आवंटित किया जाएगा।
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