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    अब कर्मकांड से खुलेगा सेना में भर्ती का रास्ता:CSJMU में शुरू हुआ डिप्लोमा कोर्स; जेसीओ पद पर मिलेगी नौकरी; उम्र की सीमा नहीं

    15 hours ago

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    सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का सपना अब केवल दौड़ लगाने से ही पूरा नहीं होगा, बल्कि मंत्रों और संस्कारों की पढ़ाई भी आपको भारतीय थल सेना का हिस्सा बना सकती है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के दीनदयाल शोध केंद्र ने 'मिशन एडमिशन 2026-27' के तहत एक ऐसा कोर्स पेश किया है, जिसे करने के बाद आप सेना में 'धर्मगुरु' बन सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए किसी विशेष आयु सीमा का बंधन नहीं है, बस इंटरमीडिएट पास होना अनिवार्य है। थ्योरी के साथ मंदिर में मिलेगी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग विश्वविद्यालय में संचालित 'डिप्लोमा इन कर्मकांड' एक साल का कोर्स है। इसमें छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि कैंपस में स्थित श्री विशेश्वर मंदिर में हवन-पूजन और संस्कारों का व्यावहारिक ज्ञान (प्रैक्टिकल) भी दिया जाता है। यह कोर्स उन युवाओं के लिए बेहतरीन मौका है जो पौरोहित्य कर्मकांड, मंदिर अर्चक या भारतीय परंपराओं के विशेषज्ञ के रूप में करियर बनाना चाहते हैं। सेना में जेसीओ (JCO) बनने के लिए अनिवार्य है यह डिप्लोमा भारतीय सेना में धार्मिक शिक्षक (धार्मिक गुरु) बनने के लिए अब नियमों में कुछ बदलाव हुए हैं। पहले केवल शास्त्री या आचार्य की डिग्री ही काफी होती थी, लेकिन अब एक साल का कर्मकांड डिप्लोमा अनिवार्य अर्हता (योग्यता) बना दिया गया है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र सेना की लिखित परीक्षा में बैठ सकते हैं। फिजिकल टेस्ट और इंटरव्यू पास करने के बाद उन्हें सेना की विभिन्न कोर में जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) के पद पर सीधी नियुक्ति मिलती है। कैंपस से निकलकर दर्जन भर छात्र बन चुके हैं सेना का हिस्सा यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में यहां से कर्मकांड की पढ़ाई करने वाले एक दर्जन से अधिक विद्यार्थियों का चयन भारतीय सेना में धर्मगुरु के पद पर हो चुका है। शोध केंद्र में न केवल विषय की पढ़ाई होती है, बल्कि सेना के इंटरव्यू के लिए जरूरी बारीकियां भी सिखाई जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोर्स छात्रों को अपनी सनातन परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ एक सम्मानजनक रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है। 9200 रुपए फीस और 50 सीटें, सीधे मिल सकता है प्रवेश अगर आप भी इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो विश्वविद्यालय ने इसके लिए बहुत ही सरल प्रक्रिया रखी है। कोर्स की कुल सीटें 50 हैं और पूरे साल की फीस मात्र 9200 रुपए तय की गई है। इंटरमीडिएट पास करने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो, इस कोर्स में दाखिला ले सकता है। विवि का लक्ष्य इस प्राचीन परंपरा को सहेजने के साथ-साथ युवाओं को ग्लोबल मंच पर नेतृत्व के लिए तैयार करना है।
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