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    1984 कानपुर दंगों पर इलाहाबाद हाइकोर्ट सख्त:हाईकोर्ट ने नरसंहार बताकर केस रद्द करने से किया इंकार

    1 hour ago

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    इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 1984 के कानपुर सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में आदेश पारित कर आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी। साथ ही आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया है। अदालत ने इन घटनाओं को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध बताया। जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता की कोर्ट ने 9 आरोपियों द्वारा दायर 7 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी या मूल रिकॉर्ड के अभाव के आधार पर मुकदमा समाप्त नहीं किया जा सकता। प्रदीप अग्रवाल व अन्य की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चार्जशीट एवं सीजेएम कानपुर नगर की कोर्ट में चल रही समूचे आपराधिक प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की गई थी। अर्जी बीएनएसएस की धारा 528 एवं सीआरपीसी की धारा 482 के अन्तर्गत दाखिल की गई थी। कोर्ट ने कहा यह नरसंहार जैसा था अदालत ने कहा, “यह घटनाएं देशभर में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुई हिंसा का हिस्सा थीं, जो एक तरह से नरसंहार जैसा था।” आरोपियों ने दलील दी थी कि मूल दस्तावेज जैसे एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने गवाहों के बयान में देरी और पहचान पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल गठित कर चुका है और पुनः जांच के आदेश दिए गए, भले ही मूल रिकॉर्ड उपलब्ध न हों। जल्दबाजी में अंतरिम रिपोर्ट प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि उस समय जल्दबाजी में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। अदालत ने भी माना कि कई रिकॉर्ड नष्ट हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद गवाहों के स्पष्ट बयान और पुनर्निर्मित एफआईआर के आधार पर मामला बनता है। अदालत ने पाया कि गवाहों ने आरोपियों की पहचान की है और घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया, जिससे प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने गंभीर मामलों में केवल समय बीत जाने के आधार पर कार्यवाही खत्म नहीं की जा सकती। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया। साथ ही एक आरोपी द्वारा कहे गए कि घटना स्थल पर मौजूद न होने के तर्क को अदालत ने ट्रायल के दौरान साबित करने योग्य बताया तथा कहा कि इस आधार पर मामला खत्म नहीं किया जा सकता है। हाइकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही को जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया।
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