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    युद्ध के बीच भारत ने निकाला 1000 मिसाइलों का बाहुबली, पाकिस्तान में भगदड़!

    3 hours from now

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    मिडिल ईस्ट में जंग चल रही है। मिसाइलें चल रही हैं। ड्रोन गिर रहे हैं और आसमान में ताकत की असली परीक्षा हो रही है। लेकिन इसी बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अब भारत की तरफ खींच लिया है। भारत ने पहली बार अपनी अगली पीढ़ी की एयर डिफेंस ताकत की झलक पूरी दुनिया को दिखा दी है। यह सिर्फ एक सिस्टम नहीं है। यह एक साफ संदेश है कि आने वाले समय में भारत सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा बल्कि आसमान पर कंट्रोल की लड़ाई में भी पीछे नहीं रहेगा। बता दें कि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी कि डीआरडीओ ने अपने स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुशा का पहला डेवलपमेंट टेस्ट सफलतापूक पूरा कर लिया है। जिसे आधिकारिक तौर पर एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम यानी कि ईआरएडीएस कहा जा रहा है और इसे सीधे तौर पर S400 एयर डिफेंस सिस्टम जैसे सिस्टम के बराबर माना जा रहा है। करीब ₹21,700 करोड़ का यह प्रोजेक्ट भारत के सबसे अहम सैन्य और नागरिक ठिकानों को एक अभै सुरक्षा कवच देने के लिए बनाया जा रहा है। लेकिन इस सिस्टम की असली ताकत क्या है? इसका जवाब छिपा है इसके तीन लेयर वाले डिफेंस में।इसे भी पढ़ें: ईरान में फंसी थी दुनिया, रूस ने यूक्रेन पर दाग दिए एक साथ 948 ड्रोनपहला M1 इंटरसेप्टर 150 कि.मी. की रेंज जो फाइटर जेट्स और प्रसीजन वेपंस को हवा में ही खत्म कर सकता है। दूसरा M2 इंटरसेप्टर 350 कि.मी. की रेंज एईएसए रडार के साथ और ज्यादा सटीक और ज्यादा खतरनाक। तीसरा M3 इंटरसेप्टर। 350 से 400 कि.मी. की रेंज जो एब्ल्यूएसीएस जैसे हाई वैल्यू टारगेट और बैलस्टिक मिसाइल तक को निशाना बना सकता है। यानी एक ऐसा मल्टी लेयर शील्ड जो दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को कई स्तरों पर रोक सकता है। स्टेल्थ फाइटर, क्रूज मिसाइल, ड्रोन या फिर बैलस्टिक मिसाइल सबके लिए जवाब तैयार है और टाइमलाइन भी साफ है। 2026 फ्लाइट टेस्ट शुरू। 2028 शुरुआती तैनाती और 2030 तक पूरा ऑपरेशनल नेटवर्क। भारतीय वायुसेना पहले ही कई स्क्वाड्रनों की जरूरतों को मंजूरी दे चुकी है। यानी भरोसा साफ है और यह सिस्टम मिशन सुदर्शन चक्र का हिस्सा है। जिसका लक्ष्य है साल 2035 तक पूरे भारत में एक इंटीग्रेट एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार करना।इसे भी पढ़ें: रूसी इलाके में इजरायल ने दागी मिसाइल? तगड़ा जवाब आया जहां आकाश, एमg और अन्य बैलस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक साथ काम करेंगे। लेकिन अब आते हैं सबसे अहम सवाल पर। क्या यह भारत का अपना S400 है या फिर उससे भी आगे की तैयारी? क्योंकि जब दुनिया मिडिल ईस्ट की जंग में एयर डिफेंस की असली परीक्षा देख रही है। भारत उसी वक्त अपने भविष्य की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह साफ कहा है कि इस जंग में मिलने वाले हर ऑपरेशनल और टेक्निकल सबक भारत अपनी रणनीति में शामिल करेगा। यानी सिर्फ यह एक टेस्ट नहीं है। यह एक संकेत है कि आने वाले समय में भारत सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा बल्कि आसमान में अपनी पकड़ को और भी ज्यादा मजबूत करेगा और यही इस कहानी का सबसे बड़ा सच है।
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