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    ईरान वॉर के बीच रूस ने दिया भारत को ऐसा तगड़ा ऑफर, हिल गया अमेरिका

    3 hours from now

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     आज की दुनिया में हवा में युद्ध का मतलब सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं बल्कि स्मार्ट सिस्टम, ड्रोन नेटवर्क और टीम वर्क होता है। और ठीक इसी समय जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव है, जंग चल रही है। रूस ने भारत को एक ऐसा ऑफर दे दिया है जो भारत की हवाई ताकत को पूरी तरह से बदल सकता है। जी हां, रूस ने भारत को दो सीटों वाला एसयू 57 स्टील फाइटर जेट पूरी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ देने का प्रस्ताव रखा है। यह ऑफर विंग्स इंडिया 2026 एयर शो के दौरान पेश किया गया है। और सबसे खास बात कि यह दो सीट वाला एसयू 57 मानव रहित टीमिंग के लिए तैयार किया गया है। यानी यह युद्ध के मैदान में स्वाम डोन को अपने कंट्रोल में ले सकता है।  एसयू 57 पायलट उड़ान भर रहा है और उसके पीछे की सीट पर दूसरा ऑफिसर दर्जनों ड्रोन को कमांड कर रहा हो। यह ड्रोन टोही करेंगे। दुश्मन के रडार को ब्लाइंड करेंगे, हमला करेंगे और मुख्य जेट को सुरक्षित रखेंगे। इसे भी पढ़ें: रूसी इलाके में इजरायल ने दागी मिसाइल? तगड़ा जवाब आयायह सिर्फ एक जेट नहीं है बल्कि एक पूरा कमांड सेंटर है हवा में। यह ऑफर इसलिए भी महत्वपूर्ण है भारत के लिए क्योंकि यह जंग के बीच आया है। रूस स्वयं यूक्रेन जंग में लगा हुआ है। लेकिन फिर भी वो भारत जैसे मित्र देश को अपनी सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी देने के लिए तैयार है। बिना किसी रोक-टोक के और यह साबित करता है कि भारत और रूस की दोस्ती कितनी गहरी है, कितनी भरोसेमंद है। पुराने एफजीएफए डील से क्या सीख पाया भारत और यह इंडोपेसिफिक की हवाई ताकत कैसे बदल सकता है? सबसे पहले समझते हैं कि आखिर एसयू 57 असल में है क्या? एसयू 57 रूस का पांचवी पीढ़ी का स्टील फाइटर जेट है जिसे सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने बनाया है। बता दें कि नाटो इसे फैलन कहता है और यह जेट इतना एडवांस है कि यह दुश्मन के रडार पर बहुत कम दिखाई देता है। यानी कि यह अदृश्य रहता है। इसमें सुपर क्रूज क्षमता यानी कि बिना आफ्टर बर्नर के ही यह साउंड बैरियर तोड़कर उड़ान भर सकता है। इसे भी पढ़ें: युद्ध के बीच भारत ने निकाला 1000 मिसाइलों का बाहुबली, पाकिस्तान में भगदड़!एसयू 57 में 360° सेंसर फ्यूजन है। मतलब ये चारों तरफ से आने वाले हर जानकारी को एक साथ प्रोसेस करके पायलट को आसान तस्वीर भेज देता है। इसके हथियार बे आंतरिक है यानी मिसाइल अंदर छिपी रहती है ताकि स्टिल बनी रहे। ये एयर टू एयर, एयर टू ग्राउंड और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सब कुछ कर सकता है। लेकिन सिंगल सीट एसयू 57 में पायलट को बहुत कुछ अकेला संभालना पड़ता था। जैसे कि उड़ान, नेविगेशन, हथियार सेंसर और दुश्मन का सामना। यहीं आता है दो सीटों वाला वेरिएंट का जादू। अब इस जादू में रूस ने क्या बताया जान लीजिए। तो रूस का दावा है कि दो सीटों वाला एसयू 57 को खासतौर पर कमांड वेरिएंट के रूप में तैयार किया गया है।
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