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    World Asthma Day 2026 -हर मरीज तक इनहेलर पहुंचना जरूरी:मेरठ के विशेषज्ञों की सलाह धूल, वेपिंग और तनाव से बचें

    1 hour ago

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    World Asthma Day 2026 के अवसर पर शहर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सही इलाज अपनाने पर जोर दिया। वर्ल्ड अस्थमा दिवस हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है “हर अस्थमा रोगी तक anti-inflammatory (कंट्रोलर) इनहेलर की पहुंच सुनिश्चित करना”, जो दमा नियंत्रण के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है। चेस्ट फिजिशियन डॉ. वीररोतम तोमर ने बताया कि कंट्रोलर (स्टेरॉयड) इनहेलर सांस की नलियों की सूजन को कम करते हैं और दमा को जड़ से नियंत्रित करने में मदद करते हैं। उन्होंने सही इनहेलर तकनीक इसे हिलाना, सीधा बैठकर स्प्रे लेना, धीरे-धीरे सांस खींचना और 10 सेकंड तक रोकना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि “रिलीवर” इनहेलर केवल अटैक के समय लिया जाता है, जबकि “कंट्रोलर” इनहेलर नियमित लेने से अटैक से बचाव होता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। डॉ. तोमर के अनुसार दमा बच्चों और बड़ों दोनों में पाया जाता है। बच्चों में 4–8% और वयस्कों में करीब 2% तक इसकी दर देखी गई है। लक्षणों में सांस फूलना, सीटी जैसी आवाज, छाती में जकड़न और खांसी शामिल हैं। उन्होंने धूल, धुआं, पालतू जानवरों के बाल, प्रदूषण और मानसिक तनाव जैसे ट्रिगर्स से बचने की सलाह दी। साथ ही योग, प्राणायाम और धूम्रपान से दूरी को जरूरी बताया। युवाओं में बढ़ती वेपिंग और हुक्का को उन्होंने फेफड़ों और हृदय के लिए गंभीर खतरा बताया। वहीं डॉ. विजय नारायण त्यागी ने कहा कि दुनियाभर में करीब 26 करोड़ और भारत में 3–4 करोड़ लोग अस्थमा से प्रभावित हैं। मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ता वायु प्रदूषण, धूल और मौसम में बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं। डॉ. त्यागी का कहना है कि सही इनहेलर के नियमित उपयोग से 50–80% तक अटैक कम किए जा सकते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण मरीज इसका पूरा लाभ नहीं ले पाते। विशेषज्ञों का कहना है की अस्थमा कोई कमजोरी नहीं है सही जानकारी, नियमित कंट्रोलर इनहेलर और सावधानी से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
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