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    Pinarayi Vijayan Resignation | केरल में एक युग का अंत! पिनरायी विजयन ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, UDF की 'प्रचंड जीत' से राज्य में सत्ता परिवर्तन

    3 hours from now

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    नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में एलडीएफ की करारी हार के बाद पिनरायी विजयन ने सोमवार को केरल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे उनका एक दशक लंबा कार्यकाल समाप्त हो गया। राजभवन के एक बयान के अनुसार, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और विजयन से अनुरोध किया है कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहें। पिछले 10 वर्षों में लगातार दो कार्यकाल तक राज्य का नेतृत्व करने वाले विजयन ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) की शानदार जीत के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया।इसे भी पढ़ें: 'गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल', बंगाल की जीत पर पीएम मोदी का 'बदले के बजाय बदलाव' का संदेश | PM Narendra Modi Full Speech  यूडीएफ ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ ने 102 सीट जीती हैं, जबकि माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने 35 सीट जीती हैं। भाजपा ने राज्य में तीन सीट जीतकर एक बड़ी सफलता हासिल की और विधानसभा में अपना खाता खोला।इसे भी पढ़ें: माकपा ने चुनावी नतीजों को बताया 'बड़ा झटका', भाजपा की बढ़त को धर्मनिरपेक्षता के लिए चुनौती करार दिया इसके अवाला आपको बता दें कि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की हार से न सिर्फ इस प्रदेश से वामपंथी सरकार की विदाई हो गयी, बल्कि पांच दशक बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी जब देश के किसी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है। जिस केरल से वाम दलों ने पहली बार 1957 में सत्ता का सूर्योदय देखा था, आज वहीं से उनका सूर्यास्त हो गया। वर्ष 1957 में देश में गैर-कांग्रेसवाद को उस वक्त हवा मिली जब ईएमएस नंबूदिरीपाद की अगुवाई में पहली बार केरल में वामपंथी सरकार बनी। इसके बाद कम्युनिस्ट पार्टियों ने धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने पैर पसारे और पश्चिम बंगाल में तो 1977 से लगातार 34 वर्षों तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में रही, जहां आज वह एक विधानसभा सीट जीतने के लिए संघर्ष कर रही है। वर्ष 1977 के बाद पहली बार ऐसा होगा कि जब देश के किसी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है। 
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