Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    West Bengal SIR Case: 47 लाख आपत्तियों के निपटारे से Supreme Court खुश, कलकत्ता HC ने दी जानकारी

    3 hours from now

    2

    0

    कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में प्राप्त 60 लाख आपत्तियों में से लगभग 47 लाख आपत्तियों का निपटारा 31 मार्च तक कर दिया गया है। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा विपुल एम पंचोली की पीठ ने बताया कि उन्हें मंगलवार को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से एक पत्र प्राप्त हुआ है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "हम तथ्यों और आंकड़ों से बेहद खुश और आशावादी हैं।इसे भी पढ़ें: 8000 KM दूर बैठा दोस्त भारत के लिए खोलेगा खजाना! इस गरीब देश से मोदी ने गैस भंडार की कौन सी डील कर ली?मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सूचित किया है कि प्रतिदिन लगभग 175 लाख से 2 लाख आपत्तियों पर विचार किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने बताया है कि 7 अप्रैल तक सभी आपत्तियों का निपटारा कर दिया जाएगा। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सर्वोच्च न्यायालय को आगे सूचित किया कि प्रतिदिन लगभग 175,000 से 200,000 आपत्तियों पर विचार किया जा रहा है और सभी आपत्तियों का निपटारा 7 अप्रैल तक कर दिया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Bengal Election से पहले 'फॉर्म 6' पर नया बवाल, Election Commission दफ्तर के बाहर TMC-BJP में क्यों हुई झड़प?
    Next Article
    Assam में Priyanka Gandhi का BJP पर बड़ा हमला, Double Engine नहीं, ये दोहरी गुलामी की सरकार

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment