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    West Bengal में ED जांच पर 'असाधारण' स्थिति, मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

    3 hours from now

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    कोलकाता से जुड़े एक मामले पर देश की सबसे बड़ी अदालत में सख्त टिप्पणियां सामने आई हैं, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने की उस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसी की कार्यवाही के दौरान मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया था।बता दें कि यह मामला ईडी द्वारा कोलकाता में एक संस्था के अधिकारी के आवास पर की जा रही जांच से जुड़ा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान मुख्यमंत्री के वहां पहुंचने और कुछ दस्तावेज हटाए जाने के आरोप लगे हैं, जिस पर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।गौरतलब है कि अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को “असाधारण स्थिति” बताते हुए कहा कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री का जांच के बीच इस तरह पहुंचना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लोकतंत्र पर खतरा पैदा हो सकता है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है।मौजूद जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दलील दी गई कि जांच एजेंसी को सीधे तौर पर मौलिक अधिकारों के तहत याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वह एक सरकारी संस्था है, न कि कोई व्यक्तिगत नागरिक। साथ ही यह भी कहा गया कि इस मामले में पहले से ही उच्च न्यायालय में कार्यवाही चल रही है, इसलिए एक ही विषय पर अलग-अलग अदालतों में सुनवाई उचित नहीं है।गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि मौलिक अधिकारों का उद्देश्य नागरिकों को राज्य से सुरक्षा देना है, न कि सरकारी संस्थाओं को अधिकार देना। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की याचिकाओं को मंजूरी दी जाती है तो इससे भविष्य में संवैधानिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।वहीं, अदालत ने इन तर्कों पर कहा कि केवल कानूनी पहलुओं को ही नहीं देखा जा सकता, बल्कि जमीनी हालात को भी ध्यान में रखना जरूरी है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में हाल के समय में कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां अधिकारियों के साथ असामान्य व्यवहार किया गया, जो चिंता का विषय है।बता दें कि इस पूरे मामले की अगली सुनवाई अब गुरुवार को होगी, जिसमें जांच एजेंसी अपनी दलीलें पेश करेगी। ऐसे में यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम बन गया है और आगे आने वाले फैसले पर सभी की नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों की सीमाओं को लेकर भी स्पष्टता आने की उम्मीद की जा रही है।
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