Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    West Bengal Congress: West Bengal में 4 दशक तक राज, अब वजूद की लड़ाई, क्या है Congress का Mission Comeback 2026

    3 hours from now

    1

    0

    पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होना है। दूसरे चरण के मतदान 29 अप्रैल 2026 को होने हैं। वहीं 04 मई 2026 को नतीजे आएंगे। किसी भी सियासी दल को सरकार बनाने के लिए 148 सीटों पर बहुमत हासिल करना जरूरी है। इस चुनाव पर पूरे देश की नजरें है। वहीं जीत और हार का फैसला सिर्फ पश्चिम बंगाल तक की सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की सियासत पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।ऐसे में इस बार भी पश्चिम बंगाल का चुनाव एक तरफा नहीं है। सभी सियासी दल आक्रामक तैयारी में हैं, लेकिन इस बार स्थिति विधानसभा 2021 जैसी नहीं है। वहीं 5 सालों में बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल चुका है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की ताकत और चुनौतियां क्या हैं।इसे भी पढ़ें: Bengal Election के बीच ममता की हुंकार, पहले बंगाल, फिर Delhi से BJP को उखाड़ फेकेंगेकांग्रेस पार्टी की ताकत और चुनौतियांबता दें कि कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2026 में वाम दलों से गठबंधन तोड़कर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपनी प्रासंगिकता को एक बार फिर से बहाल करने के लिए यह फैसला लिया है। मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया जैसे पारंपरिक गढ़ों से कांग्रेस को काफी ज्यादा उम्मीदें हैं। वहीं पार्टी को यह भी उम्मीद है कि इस क्षेत्रों में वह अपने पुराने वोट बैंक को फिर से सक्रिय कर सकती है।पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने करीब 4 दशक तक राज किया है। लेकिन जब यहां से जमीन खिसकी तो जनता ने इसको हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया। इमरजेंसी के दौरान बंगाल की जनता को बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया। जिसके चलते साल 1977 में हुए चुनावों में बंगाल के लोगों ने कांग्रेस को नकार दिया था। वहीं बंगाल में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी।वहीं अगर राज्य में पार्टी की कमजोरियों की बात करें, तो कांग्रेस के पास संसाधनों की कमी है। वहीं बंगाल के कई जिलों में कमजोर नेटवर्क कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी कमजोरी बन सकते हैं। कांग्रेस भी पश्चिम बंगाल अपनी खोई हुई जमीन को तलाशने में जुटे हैं। लेकिन यह वक्त और बंगाल की जनता ही बता पाएगी कि उनका रुझान किस ओर है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Anti-Incumbency, SIR और बीजेपी की घेराबंदी, ममता के लिए क्यों है सबसे मुश्किल चुनाव?
    Next Article
    Rahul Gandhi के 'Polarization' वाले आरोप पर BJP का पलटवार, Rijiju बोले- कांग्रेस का स्टैंड ही साफ नहीं है

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment