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    व्यास ने सुनाई श्रीकृष्ण लीला और गोवर्धन कथा:बाल लीलाओं, माखन चोरी, चीर हरण लीला और गिरिराज के महत्व का वर्णन

    4 hours ago

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    संभल में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। मंगलवार को संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र के मौहल्ला ठेर स्थित धर्मशाला में कथा महोत्सव के पांचवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। वृंदावन धाम से आए कथा व्यास आचार्य अनन्तदास महाराज ने कथा का वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी, चीर हरण लीला और गिरिराज के महत्व का वर्णन किया गया। आचार्य अनन्तदास ने गोवर्धन महाराज की कथा सुनाई और भक्तों के प्रति भगवान के प्रेम का मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को समाप्त कर यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही जीवन का सबसे बड़ा आधार है। कथा व्यास ने कहा कि जब भी भक्त सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है, प्रभु उसकी रक्षा के लिए अवश्य आते हैं। इस अवसर पर गोवर्धन महाराज को छप्पन भोग लगाया गया। आज की कथा के यजमान सचिन पाटील और रुक्मणी रहे। आचार्य अनंतदास ने श्रीकृष्ण लीला का वर्णन करते हुए एक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब भगवान कृष्ण (ठाकुरजी) ने नंदलाल से निमंत्रण के बारे में पूछा, तो कृष्ण ने अपनी मां की कसम खाकर कहा कि उन्होंने किसी को निमंत्रण नहीं दिया है। वास्तव में, निमंत्रण कृष्ण के सखाओं मनसुखा, मधुमंगल और श्रीदामा ने दिया था। जब कृष्ण के सखा मुश्किल में पड़ गए और सभी ग्वाल-बालों द्वारा उन्हें बुलाया जा रहा था, तब भगवान कृष्ण अपने सखाओं की रक्षा के लिए आगे आए। उन्होंने ग्वाल-बालों के सामने खड़े होकर कहा कि उनके दोस्तों को कुछ न कहा जाए। कृष्ण ने अपने सखाओं से पूछा कि वे कौन हैं, जिस पर बालकों ने उत्तर दिया कि वे छोटे बालक हैं। इसके बाद कृष्ण ने कहा कि उन्होंने जंगल में जाकर अश्वमेध यज्ञ किया था, जिससे उनके सखाओं को डांट से बचाया जा सके।
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