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    US Sanctions पर China का पलटवार, Blocking Law से अपनी कंपनियों को दिया सुरक्षा कवच

    3 hours from now

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    चीन सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका द्वारा पांच घरेलू तेल रिफाइनरियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को मानने से इनकार कर दिया है। बीजिंग ने एक औपचारिक आदेश जारी कर अपनी कंपनियों को इन अमेरिकी पाबंदियों को नजरअंदाज करने का निर्देश दिया है। अमेरिका ने इन रिफाइनरियों पर ईरान से तेल खरीदने का आरोप लगाया था।बीजिंग का कड़ा रुखचीन के सरकारी समाचार पत्र 'चाइना डेली' ने सरकार के इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के खिलाफ एक 'रक्षात्मक कदम' बताया है। बीजिंग का तर्क है कि अमेरिका बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के एकतरफा प्रतिबंध लगाकर दो संप्रभु देशों के बीच होने वाले व्यापार में दखल दे रहा है। चीन के अनुसार, अमेरिका अपनी घरेलू नीतियों और डॉलर के प्रभुत्व का इस्तेमाल दूसरे देशों को दबाने के लिए कर रहा है। इसे भी पढ़ें: Iran के Peace Proposal पर भड़के Donald Trump, दे डाली फिर से हमले की धमकीपहली बार 'अवरोधक कानून' का इस्तेमालचीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को 'अवरोधक उपाय' जारी किया है। यह पहली बार है जब बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर अपने 'अवरोधक कानून' का इस्तेमाल किया है। यह एक ऐसा कानूनी तंत्र है जो विदेशी कानूनों के असर को चीन की सीमा के भीतर बेअसर कर देता है। इस कदम से चीन ने संकेत दिया है कि वह अब केवल राजनयिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी तौर पर भी जवाबी कार्रवाई करेगा।किन कंपनियों को मिला सुरक्षा कवच?चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने जिन पांच प्रमुख रिफाइनरियों को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाने के लिए आदेश जारी किया है, वे हैं, हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनिंग कंपनी, शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल, शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप, हेबेई शिन्हाई केमिकल ग्रुप और शेडोंग शेंगशिंग केमिकल कंपनी। इसे भी पढ़ें: अफ्रीका में भारत ने खोद निकाला तेल का सबसे बड़ा कुआं, पूरी दुनिया को चौंका दियाक्या है विवाद की जड़?अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के कार्यालय ने इन स्वतंत्र चीनी रिफाइनरियों को ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का समर्थन करने वाला मुख्य खरीदार बताया है। अमेरिका का दावा है कि इन कंपनियों ने 2026 के दौरान अरबों डॉलर का ईरानी तेल खरीदा है, जिसके चलते उन्हें 'ब्लैकलिस्ट' किया गया और उनकी संपत्तियां फ्रीज करने के आदेश दिए गए। चीन ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा है कि यह सामान्य आर्थिक लेन-देन है जिसे अमेरिका अवैध रूप से रोकना चाहता है।
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