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    ट्रस्टों के जरिए व्हाइट होती थी ब्लैक मनी:बर्रा से कर्नाटक तक फैला साइबर ठगी का नेटवर्क, 8 ट्रस्ट पुलिस की रडार पर आए

    2 hours ago

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    कानपुर के बर्रा में पकड़े गए ठगों से पुलिस ने पूछताछ की तो कर्नाटक के जामिया इस्लाहुल बन्नत ईसी ट्रस्ट समेत करीब 8 ऐसे ट्रस्ट सामने आए, जिनके जरिए ठग काली कमाई को सफेद करते थे। कर्नाटक के इस ट्रस्ट में डिजिटल अरेस्ट के 30 करोड़ की रकम खपाई गई है। पुलिस अब जल्द ही कर्नाटक जाने की तैयारी में है। पुलिस ट्रस्ट के बारे में जानकारी करने के साथ हवाला और आतंकी फंडिंग की भी जांच कर रही है। यतीमखाना के मौलना ने भी भेजी थी ठगी की रकम डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बातया कि साइबर अपराधी ठगी की रकम का इस्तेमाल हवाला में प्रयोग करते थे। जिसे महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत कई राज्यों में भेजा जाता था। दो साल पहले यतीमखाना के मौलाना ने मदरसा कसीमुल उलूम फांउडेंशन के खाते में भी 32.50 लाख रुपए ठगी की रकम भेजी थी, जिसमें मौलाना को गिरफ्तार किया गया था। बर्रा इंस्पेक्टर रवींद्र श्रीवास्वतव ने बताया कि पकड़े गए साइबर अपराधियों ने बताया कि ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए ट्रस्ट तय रकम का 30 प्रतिशत हिस्सा लेते थे, इसके बाद 10 प्रतिशत हिस्सा फरार आरोपी राजवीर सिंह, अंचित गोयल व उसके साथियों को जाता था। इसके साथ ही भारी रकम विड्राल कर हवाला के जरिए देशभर के दूसरे राज्यों में भेजी जाती थी। इस रकम का प्रयोग किस काम में किया जा रहा था, इसकी भी पुलिस टीमें जांच कर रही है। तनिष हवाला के जरिए व्हाइट करता था रकम वरुण विहार बर्रा–8 निवासी तनिष गुप्ता का नाम 13 अप्रैल को आईपीएल सट्‌टा और प्रतिबंधित ऑनलाइन गेम खिलाने में पकड़े गए गिरोह में भी सामने आया था। गिरोह के पास से 150 से ज्यादा खातों की जानकारी मिली थी। उन खातों की जानकारी के दौरान संजय वर्मा और राजकुमार का नाम आया था, उनके खातों से तनिष्क गुप्ता के खातों में लेनदेन मिला। ये लेनदेन ठगी की रकम से दूसरी और तीसरी लेयर का लेनदेन था। राजकुमार और संजय के जरिए ठगी की रकम को व्हाइट करने का काम करता था।
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