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    'तू इस तरह से लौटेगा, मुझे अंदाजा नहीं था':कानपुर में बेटे की लाश देखकर रोई मां, 3 साल पहले पिता की भी जलकर हुई थी मौत

    1 day ago

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    'इसका तो फर्ज मुझे कंधे पर ले जाने का था, लेकिन मेरे सामने इस तरह आएगा..इसका मुझे अंदाजा नहीं था। हे भगवान मैंने तो पूरी निष्ठा के साथ तुम्हारी पूजा की, जिसका परिणाम मुझे यह मिला।' यह कहती हुए सूरज सिंह की मां मीरा सिंह बिलख पड़ीं। लखनऊ अग्निकांड में कानपुर के बर्रा निवासी सूरज सिंह (25) की जान चली गई। मंगलवार को सूरज सिंह का शव घर पहुंचा। जवान बेटे की लाश देखकर मां मीरा सिंह बेसुध होकर गिर पड़ी। वह बेटे का चेहरा देखने के लिए बार-बार कफन हटाने का प्रयास करती रहीं। लेकिन शव की हालत ऐसी नहीं थी कि चेहरा दिखाया जा सके। परिवार वालों ने उन्हें संभाला, लेकिन उनका दर्द थम नहीं रहा था। सूरज घटना से एक दिन पहले ही रविवार को लखनऊ गया था। सोमवार को बिल्डिंग में आग लगने से उसकी मौत हो गई। गमगीन माहौल में मंगलवार को सूरज का अंतिम संस्कार भैरवघाट पर किया गया। ऋषिकेश से लौटे छोटे भाई सम्राट ने मुखाग्नि दी। अब विस्तार से पढ़िए…. छोटे भाई की पढ़ाई और बहन के भविष्य का सहारा था सूरज बर्रा के रहने वाला सूरज सिंह (25) परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। पिता की मौत के बाद उसने घर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। वह नौकरी करके छोटे भाई सम्राट की एमबीए की पढ़ाई का खर्च उठा रहा था। सम्राट किदवई नगर स्थित डॉ. वीरेंद्र स्वरूप मैनेजमेंट कालेज से एमबीए कर रहा है। घटना के समय वह दोस्तों के साथ ऋषिकेश गया हुआ था। भाई की मौत की खबर मिलते ही वह दिल्ली पहुंचा और वहां से फ्लाइट से कानपुर पहुंचा। परिवार वालों ने बताया कि सूरज अपनी छोटी बहन सौम्या की पढ़ाई का खर्च भी उठा रहा था। उसके भविष्य को लेकर हमेशा चिंता करता था। उसकी मौत ने परिवार के सपनों और खुशियों को उजाड़ कर रख दिया। पिता की भी आग में जलकर मौत हुई थी हंसपुरम में रहने वाले सूरज के मामा जितेंद्र सिंह ने बताया कि सूरज के पिता शिवराम सिंह मलिक दादानगर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक पेट्रोल पंप पर मैनेजर थे। 8 मार्च 2023 को होली के दिन पेट्रोल पंप के केबिन में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इस हादसे में वह गंभीर रूप से झुलस गए थे। लखनऊ के केजीएमयू में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद सूरज ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन अब आग ने परिवार से उसे भी छीन लिया। मां को आखिरी वक्त तक नहीं दी गई बेटे की मौत की खबर मामा जितेंद्र सिंह ने बताया कि सोमवार को जब सूरज की मौत की सूचना छोटे भाई सम्राट को मिली, तब वह ऋषिकेश में था। उसने सीधे मां मीरा को फोन करने के बजाय मुझे फोन कर इसकी जानकारी दी। मैं तुरंत घर पहुंचा, लेकिन मीरा को बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी। देर रात तक रिश्तेदार घर पहुंचते रहे, फिर भी किसी ने मीरा को इस अनहोनी का एहसास नहीं होने दिया। शव पहुंचा तो मां ने बेटे को सीने से लगा लिया मंगलवार सुबह करीब 6:45 बजे सूरज का शव घर पहुंचा। पहले तो मां मीरा को विश्वास ही नहीं हुआ कि एंबुलेंस में उनका बेटा है। लेकिन जैसे ही उन्हें सच्चाई पता चली, वह बेटे के शव से लिपटकर बिलख पड़ीं। रोते मीरा ने कहा- कल ही तो गया था। अगर मुझे पता होता तो मैं जाने ही नहीं देती। तू इस तरह कंधे पर आएगा, मैंने कभी सोचा भी नहीं था। उनकी चीखें सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। इलाके के लोगों ने कहा- बहुत जिम्मेदार था सूरज पड़ोसियों और परिचितों ने बताया कि सूरज बेहद जिम्मेदार और मिलनसार युवक था। पिता की मौत के बाद उसने छोटे भाई और बहन की पढ़ाई की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई। सभी को उम्मीद थी कि जल्द ही उसके घर में शादी की खुशियां आएंगी, लेकिन एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया। मामा जितेंद्र सिंह ने बताया कि परिवार सूरज की शादी की तैयारी कर रहा था। मां मीरा और रिश्तेदार उसके लिए लड़की देख रहे थे। परिवार चाहता था कि एक साल के भीतर उसकी शादी हो जाए, लेकिन शादी की तैयारियां शुरू होने से पहले ही घर में मातम छा गया। छोटे भाई ने दी मुखाग्नि लखनऊ की जिस इमारत में सूरज काम करते थे, उस इमारत में सोमवार दोपहर में आग लग गई। आग में फंसकर सूरज सिंह समेत 15 लोगों की मौत हो गई। इनमें अधिकतर स्टूडेंट थे। परिजनों के अनुसार, आग लगने के बाद सूरज जान बचाने के लिए इमारत की दूसरी मंजिल पर बने बाथरूम में छिप गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। मंगलवार को भैरव घाट पर सूरज का अंतिम संस्कार किया गया। ऋषिकेश से लौटे छोटे भाई सम्राट ने नम आंखों से अपने बड़े भाई को मुखाग्नि दी। पूरे अंतिम संस्कार के दौरान परिवार, रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग गमगीन रहे। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें 'मुझे बेटे के साथ जाना है, मैं कैसे जिऊंगी':कानपुर में लिपटकर रोई मां, लखनऊ-अग्निकांड में जान गंवाने वाले संयम का हुआ अंतिम संस्कार मेरे बेटे को कहां ले जा रहे। वो नहीं जाएगा, छोड़ दो उसको। मैं इसकी मां हूं, ये मेरा बच्चा है। मैं अपने बेटे के साथ जाऊंगी, मुझे भी अपने बच्चे के साथ जाना है। यह कहना है उस बेबस मां सोनिया का है, जिसने लखनऊ के भीषण अग्निकांड में अपने जवान बेटे को खो दिया। लखनऊ अग्निकांड में कानपुर के गोविंद नगर ए ब्लॉक निवासी संयम विज की जिंदगी छीन ली। पढ़ें पूरी खबर…
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