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    शाम को जहां मजार थी, वहां सुबह 'जंगल' खड़ा:इटावा में रातों-रात बुलडोजर से ढहाई, जमीन समतल करके पौधे लगाए

    6 hours ago

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    यूपी के इटावा में सैयद बाबा की मजार बुधवार रात बुलडोजर से जमींदोज कर दी गई। गुरुवार सुबह जब गांव वाले पहुंचे तो वहां मजार का नामो-निशान तक नहीं बचा था। पूरी जमीन समतल कर दी गई थी। कमर तक ऊंचे पौधे लगा दिए गए थे। जगह जंगल जैसी लग रही थी। यह देखकर लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि 12 घंटे पहले यहां मजार थी। बुधवार शाम 6 बजे वन विभाग की टीम तीन बुलडोजर लेकर पहुंची। 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी मजार तक जाने वाले रास्ते पर तैनात कर दिए। किसी के आने-जाने पर रोक लगा दी। इसके बाद 7 घंटे में मजार ढहा दी गई। रात 1 बजे तक बुलडोजर एक्शन चला। मजार के केयरटेकर का दावा है कि मजार 800 साल पुरानी थी। वन विभाग का कहना है कि मजार सरकारी जमीन पर बनी हुई थी, इसलिए कार्रवाई की गई। 3000 स्क्वायर फीट में बनी यह मजार इटावा शहर से डेढ़ किलोमीटर दूर बीहड़ के फिशर वन क्षेत्र में स्थित थी। मजार “बीहड़ वाले सैयद बाबा” के नाम से प्रसिद्ध थी। जनवरी में मजार की शिकायत सीएम पोर्टल पर की गई थी। इसके बाद वन विभाग ने जांच की और मजार हटाने के निर्देश दिए। मजार के केयरटेकर वन विभाग की कोर्ट गए, लेकिन उनकी अपील खारिज हो गई। 3 तस्वीरें देखिए- दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- 5 पॉइंट में पूरा मामला जानिए मजार किसने बनाई, कब बनाई, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं हर साल फरवरी में मजार पर उर्स का आयोजन होता था, जिसमें 5 से 7 हजार लोग शामिल होते थे। इस बार फरवरी में उर्स नहीं हुआ। मजार कब बनी, किसने बनाई और इसकी स्थापना कब हुई, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों के पास भी इसके निर्माण से जुड़ा कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। वन विभाग का कहना है कि समय के साथ धीरे-धीरे संरक्षित वन भूमि पर निर्माण बढ़ता गया और बाद में यहां एक स्थायी ढांचा खड़ा हो गया। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी वैधानिक अनुमति के हुई थी, इसलिए इसे अवैध निर्माण माना गया है। मौलाना बोले- मोहम्मद गोरी के सेनापति की मजार होने का दावा गलत मजार की देखरेख इटावा शहर के आकालगंज निवासी फजले इलाही करते हैं। उनके सहयोगी मौलाना नदीम ने बताया कि यह मजार करीब 800 साल पुरानी है। कुछ लोग इसे मोहम्मद गौरी के सेनापति शमसुद्दीन की मजार बताते हैं, लेकिन यह दावा पूरी तरह गलत और निराधार है। उन्होंने कहा- ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि 1194 में इटावा में इस्लामी आक्रांता मोहम्मद गौरी और कन्नौज के राजा जयचंद के सिपहसालार सुमेर सिंह के बीच युद्ध हुआ था। इसमें गौरी का सेनापति शमसुद्दीन और कई मुस्लिम सैनिक मारे गए थे। इनमें से कुछ को बाइस ख्वाजा में दफनाया गया, लेकिन शमसुद्दीन की मजार फिशर वन में कैसे बनी, इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं है। ------------------ ये खबर भी पढ़ें.. यूपी में अब एक कैंपस में 12वीं तक पढ़ाई होगी:लॉटरी या मेरिट से होगा एडमिशन; रोबोटिक्स लैब से मिलेगी प्रैक्टिकल नॉलेज अपने बच्चे को अच्छे कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन आसमान छूती फीस देखकर पैर पीछे खींच लेते हैं, तो अब चिंता छोड़ दीजिए। यूपी सरकार आपके इस सपने को सच करने जा रही है। प्रदेश में अब बेहद कम फीस पर कॉन्वेंट जैसी वर्ल्ड क्लास एजुकेशन देने के लिए 'CM कंपोजिट स्कूल' खोले जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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