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    साढ़े तीन घंटे सांसों पर भारी पड़ा क्लोरीन का रिसाव:रात में घर लौटे, पल्लवपुरम में दहशत इस कदर हावी कि जागकर बिताई पूरी रात

    2 hours ago

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    मेरठ के मोदीपुरम स्थित पल्लवपुरम फेस-2 में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से क्लोरीन गैस का रिसाव शुरू होते ही करीब साढ़े तीन घंटे तक लोगों की सांसें अटकी रहीं। तीखी गैस की गंध और आंखों में जलन के बीच लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि घरों में रहना सुरक्षित है या बाहर निकलना। अनहोनी की आशंका में कई परिवार घरों पर ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए जो रात में वापस लौटे। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम थी। बड़ी संख्या में लोग खतरा पूरी तरह टलने तक रिश्तेदारों के घर ही रुके रहे। स्थानीय लोगों ने उस खौफनाक पल को साझा किया, जब अचानक इलाके में क्लोरीन की तेज गंध फैलने लगी। लोगों के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें कुछ समझ नहीं आया। जैसे-जैसे गंध तेज होती गई, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगी। इसके बाद परिवारों में अफरातफरी मच गई। लोग बच्चों और बुजुर्गों को लेकर घरों से बाहर निकलने लगे। घरों पर आधी रात तक लटके ताले कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने घरों पर ताले लगाए और दूसरे स्थानों पर चले गए। कुछ लोग परिचितों और रिश्तेदारों के यहां पहुंचे तो कुछ ने खुले और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों पर समय बिताया। गैस रिसाव पर नियंत्रण की सूचना मिलने के बाद लोग धीरे-धीरे वापस लौटे, लेकिन डर का असर देर रात तक बना रहा। आधी रात में कुछ परिवार लौटे। वंदिता आचार्य बताती हैं कि गला घुटने लगा था। प्लांट संचालकों ने लोगों को मुश्किल में डाला मोनू धनखड़ ने कहा कि अचानक से शरीर में जलन सी महसूस होने लगी। बच्चों की स्थिति और ज्यादा खराब थी और वे बहुत परेशान हो रहे थे। बिना देरी किए वह अपने बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच गए और इलाज शुरू कराया। उनका आरोप है कि प्लांट संचालक इस पूरे हादसे के जिम्मेदार हैं। उन्हें पहले क्षेत्रीय लोगों को सूचित करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और अपनी जान बचाकर भाग निकले। कई घंटे रही क्लोरीन की दहशत स्थानीय लोगों का कहना था कि कुछ घंटे उनके लिए बेहद भयावह रहे। घर छोड़ते समय सबसे बड़ी चिंता यही थी कि पता नहीं स्थिति कब सामान्य होगी और वापस लौटना सुरक्षित है या नहीं। कई परिवारों ने रात अपने घर के बजाय रिश्तेदारों के यहां बिताना ही बेहतर समझा। कुछ घर रात में ऐसे मिले जो अंदर से बंद थे। बाद में पता चला कि सेंट्रल लॉक लगाकर वह रिश्तेदारी में चले गए थे। घर लौटे, लेकिन डर नहीं गया गैस रिसाव पर काबू पाए जाने के बाद इलाके में स्थिति सामान्य होने लगी। इसके बावजूद लोगों में पूरी तरह भरोसा नहीं था। कई परिवारों ने रात में घर लौटने के बजाय रिश्तेदारों के यहां रुकना उचित समझा। लोगों का कहना था कि घटना ने एसटीपी प्लांट और आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर सवाल इस हादसे के बाद पल्लवपुरम के लोग दहशत में हैं। उनका कहना है कि क्लोरीन गैस के मामूली रिसाव ने एक किलोमीटर की परिधि में आबादी को प्रभावित किया है। ऐसे में आबादी वाले इलाके में इसकी मौजूदगी हमेशा से दहशत का सबब बनी रहेगी। कुछ लोग तो इसका विरोध भी करते दिखाई दिए।
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