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    सड़क हादसे में मरने वाले दीपक-बृजभूषण का अंतिम संस्कार:विदाई देने पहुंचे हजारों लोग, ट्रक से टवेरा की टक्कर से 8 की हुई थी मौत

    1 hour ago

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    ललितपुर में मंगलवार को बृजभूषण तिवारी और दीपक तिवारी उर्फ शिवानंद का अंतिम संस्कार किया गया। बानपुर मार्ग स्थित बेदपुर मुक्तिधाम पर एक साथ दो शवों की अंतिम यात्रा निकाली गई। ये दोनों उन आठ लोगों में शामिल थे, जिनकी मौत जालौन जिले के कालपी में हुए सड़क हादसे में हुई थी। यह दुर्घटना अयोध्या से मूर्ति विसर्जन कर लौटते समय हुई थी, जब उनकी कार हाईवे किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई थी। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हजारों लोग बेदपुर मुक्तिधाम पहुंचे। राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ भी वहां मौजूद थे। उन्होंने मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी और कहा कि वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं। राज्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घटना से अवगत कराया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद दिलाने की मांग की है। बृजभूषण तिवारी अपने तीन भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर पर थे। वे खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी तीन पुत्रियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी पुत्री वैष्णवी ने इस वर्ष 12वीं कक्षा में जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। उनकी आठ वर्षीय दूसरी बेटी दिव्यांग है, जिसका वे इलाज करा रहे थे। वहीं, दीपक उर्फ प्रदीप तिवारी अपने दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे थे। वे कोचिंग पढ़ाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। बता दें ललितपुर मुख्यालय से 36 किलोमीटर दूर टीकमगढ़ रोड पर दो सौ साल से अधिक पुराना मंदिर है। यह मंदिर तिवारी परिवार का पुश्तैनी मंदिर है। इस मंदिर की पूजा अर्चना देखभाल परशुराम तिवारी करते चले आ रहे हैं। दो साल पहले राम जानकी मंदिर में भगवान रामचंद्र की प्रतिमा खंडित हो गई थी। जिसके चलते दो साल से ही मंदिर में नई प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की योजन परिवार बना था। जिसके बाद तिवारी परिवार जबलपुर से मूर्तियां लाए और 25 अप्रैल से भगवान श्री राम, लक्ष्मण व जानकी की मूर्तियो की अचल प्राण प्रतिष्ठा हेतु सहस्त्रधारा ( हजारा) अभिषेक कार्यक्रम शुरू हुआ 28 अप्रैल को कलश यात्रा निकाली गई थी और 30 अप्रैल को मूर्तियो की अचल प्राण प्रतिष्ठा हेतु सहस्त्रधारा ( हजारा) अभिषेक के बाद भंडारे का आयोजन किया गया था। इस के बाद खंडित मूर्तियों के विसर्जन के लिए 2 मई को दस लोग अयोध्या गए थे। जहां उन्होंने तीन मई को सरयू नदी में मूर्तियों का विसर्जन किया व शाम को ललितपुर के लिए रवाना हुए। चार मई की सुबह जालौन जिले कालपी में हादसा हो गया। जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना में मरने वाले मनोज भोड़ेले पुत्र ओमप्रकाश भोड़ेले (40 ) मंदिरों में पूजा व कथा वाचक का कार्य करते थे ,वह परिवार में इकलौते है, उनके बेटा और बेटी है। मृतक उमेश तिवारी बेरोजगार था। उसकी शादी नहीं हुई थी। दो भाइयों में सबसे छोटा था। राम जानकी मंदिर के पास निवासी देशराज नामदेव इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान खोले हुआ था। वह 8 भाइयों में 6 नम्बर का था। मृतक कृष्णकांत तिवारी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में संविदा पर टीचर था। वह इकलौता बेटा था। उसकी दो बेटियां हैं। मृतक शशिकांत तिवारी एक निजी मारुति शो रुम पर सेल्समैन का काम करते थे। वह चार भाइयों में बड़े थे। उनके एक बेटा और एक बेटी है। वहीं मृतक स्वामी प्रसाद तिवारी प्राइवेट स्कूल में शिक्षक थे ,उनके तीन बेटे दो बेटियां हैं। मृतक बृज भूषण तिवारी किसान थे। दीपक तिवारी प्राइवेट टीचर था। वह कोचिंग पढ़ाता था।
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