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    सिद्धार्थनगर में पराली जलाने के 631 मामले चिह्नित:प्रशासन सख्त, इटवा तहसील में सर्वाधिक घटनाएं

    7 hours ago

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    सिद्धार्थनगर में गेहूं की कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामलों में तेजी आई है। इस पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सख्ती शुरू कर दी है। सैटेलाइट सर्वे के माध्यम से अब तक कुल 631 मामलों की पुष्टि हुई है, जिसके बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इटवा तहसील में सर्वाधिक 266 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बांसी में 178, डुमरियागंज में 121, नौगढ़ में 60 और शोहरतगढ़ में सबसे कम 6 मामले सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह संख्या और बढ़ सकती है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि रबी की मुख्य फसल गेहूं की कटाई के बाद किसान कंबाइन हार्वेस्टर व अन्य कृषि यंत्रों का प्रयोग करते हैं। इसके बाद खेतों में बचे अवशेषों को जलाना एक आसान विकल्प माना जाता है, लेकिन यह पर्यावरण के लिए घातक है। साथ ही, इससे आगजनी की घटनाओं का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। हाल के वर्षों में ऐसी लापरवाही के कारण कई किसानों की तैयार फसलें आग की भेंट चढ़ चुकी हैं। इसी बीच, उस्का बाजार थाना क्षेत्र के सोहांस सुमाली गैस एजेंसी के पास एक खेत में डंठल में आग लगने से अफरातफरी मच गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। ग्रामीणों के सहयोग से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। गैस एजेंसी संचालक सुनील जायसवाल ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत सूचना दी थी। एसओ हरे कृष्ण उपाध्याय ने बताया कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। शोहरतगढ़ क्षेत्र में भी पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जहां परसिया, छतहरा और अगया गांव के सीवान में अज्ञात लोगों द्वारा डंठल जलाए जाने की सूचना मिली। एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने सभी लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि ऐसे मामलों में तुरंत संबंधित व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाए और जुर्माना लगाया जाए। उप कृषि निदेशक राजेश कुमार ने बताया कि पराली जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है और यह कानूनन दंडनीय अपराध है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के प्रावधानों के तहत दो एकड़ से कम क्षेत्र पर ₹5000, दो से पांच एकड़ तक ₹10000 और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹30000 प्रति घटना जुर्माना निर्धारित किया गया है। बार-बार उल्लंघन करने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कठोर कार्रवाई, जिसमें कारावास तक का प्रावधान है, की जा सकती है। प्रशासन द्वारा गांव स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें ग्राम प्रधान, लेखपाल और कृषि विभाग के कर्मचारियों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है। सैटेलाइट निगरानी के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल अवशेष न जलाएं और कृषि यंत्रों जैसे कंबाइन हार्वेस्टर, स्ट्रा रीपर व थ्रेशर का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
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