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    स्टूडेंट बनकर पहुंचा रिपोर्टर-₹1 में दरोगा बनाने वाली कोचिंग एक्सपोज:टीचर बोले- ये मार्केटिंग, खान सर की कोचिंग में ₹100 का ऑफर, 10 हजार तक फीस

    15 hours ago

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    दो साल पहले दरोगा की तैयारी करने संजय पूर्णिया से पटना आया था। एक रुपए में दरोगा बनाने वाली फैक्ट्री का नाम बहुत सुना था। पटना आते ही वहां एडमिशन ले लिया। 7 दिन पढ़ाई की तो पता चला कि यह तो ट्रायल था, आगे की तैयारी के लिए पैकेज चुनना होगा। 1 रुपए में बस मैप ही पढ़ाया जाएगा। बाद में घर वालों को पूरी कहानी बताई और पैसे मंगाकर स्पेशल पैकेज भी चुन लिया। 2 साल बाद भी संजय दरोगा नहीं बन पाया। संजय कोचिंग के जाल में ऐसा फंसा कि 2 साल बाद भी नहीं निकल पाया..। संजय के साथ बिहार के लाखों स्टूडेंट्स की यही कहानी है। वह हर साल कोचिंग के नाम पर ऑनलाइन और ऑफलाइन पैकेज के जाल में फंसते हैं। एक रुपए से लेकर 200 रुपए फीस में नौकरी का दावा करने वाले कोचिंग सेंटर्स की ये ट्रिक स्टूडेंट्स को फंसाने की है। बिहार में करीब 12 हजार करोड़ रुपए सालाना की कोचिंग इंडस्ट्री है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए 1 रुपए में दरोगा बनाने वाले दावों का काला सच..। पैकेज के नाम पर कोचिंग का धोखा खान सर और रौशन आनंद के बीच हुई कोचिंग वर्चस्व की लड़ाई के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पड़ताल के लिए पटना के मुसल्लहपुर हाट पहुंची। ये इलाका बिहार की कोचिंग का हब कहलाता है। हमारी नजर यहां लगे बड़े-बड़े पोस्टर्स पर पड़ी। यहां हर कोई एक रुपए में दरोगा बनाने का दावा कर रहा है। एक रुपए से लेकर 200 रुपए की फीस में सरकारी नौकरी का पैकेज देने वाले रेलवे, SSC, बिहार पुलिस और BPSC जैसी परीक्षाओं को क्वालीफाई कराने का दावा करते हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम सबसे पहले मुसल्लहपुर हाट के किसान कोल्ड स्टोरेज कैंपस पहुंची। यहां हम खान ग्लोबल स्टडीज में स्टूडेंट बनकर दाखिल हुए। यहां हमें फाउंडेशन और टारगेट 2 तरह के बैच के बारे में बताया गया। फाउंडेशन में बेसिक से हायर लेवल तक की पढ़ाई होती है, जिसका टाइम ड्यूरेशन 18 महीने का है। टारगेट बैच में सिर्फ रिवीजन करवाया जाता है, जिसकी क्लास 6 महीने तक होती है। इसके अलावा फिजिकल और पॉलिटिकल मैप की भी पढ़ाई कराई जाती है। इसकी फीस 200 रुपए से लेकर 300 रुपए तक है। खान सर की कोचिंग के ऑफिस में बैठे निरंजन से हमारी बातचीत हुई। रिपोर्टर - मुझे क्लास जॉइन करनी है। निरंजन -एक क्लास चल रही है, ये टारगेट बैच है। इसका टाइम ड्यूरेशन 6 महीने का है। इसमें पीटी-मेंस का रिवीजन कराया जाएगा। इसकी फीस 2 हजार रुपए है। रिपोर्टर - मुझे फाउंडेशन बैच जॉइन करनी है। निरंजन - इसमें बेसिक से पढ़ाई कराई जाएगी, इसमें जीके-जीएस खान सर खुद पढ़ाएंगे। इसके साथ साइंस, आर्ट्स, इंटरनेशनल रिलेशन, कंप्यूटर भी खान सर पढ़ाएंगे। बाकी सब्जेक्ट दूसरे टीचर पढ़ाएंगे। क्लास सुबह के 7 बजे से शुरू होगी। शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। रिपोर्टर - फाउंडेशन बैच की फीस कितनी है? निरंजन - फाउंडेशन बैच के लिए 6 हजार रुपए फीस है, लेकिन अभी ऑफर चल रहा है। ऑफर में एडमिशन लेते हैं तो वन टाइम पेमेंट पर 3 हजार रुपए देने होंगे। इसमें 50% की छूट है। रिपोर्टर - बाकी सब्जेक्ट के लिए जो टीचर हैं, उनकी फीस अलग से जमा करनी होगी या इसी फीस में पढ़ाएंगे। निरंजन -उसके लिए अलग से देना होगा। शाम के समय में संतोष सर मैथ पढ़ाते हैं, उसके लिए 1500 रुपए फीस है, लेकिन अभी ऑफर में 750 रुपए जमा करना होगा। इसी तरह इंग्लिश और रीजनिंग के लिए भी अलग-अलग टीचर हैं, सभी की फीस 1500 रुपए हर सब्जेक्ट की है।ऑफर में 750 रुपए देने होंगे। अगर आप मैथ्स, रीजनिंग और इंग्लिश तीनों को एक साथ लेते हैं तो 2 हजार रुपए में हो जाएगा। खान सर और इन सभी की एक साथ क्लास जॉइन करने पर टोटल 5 हजार में हो जाएगा। ऑफर खत्म होने पर इसकी फीस 10,500 रुपए हो जाएगी । रिपोर्टर - कब तक ऑफर चलेगा? निरंजन - अभी ऑफर चल रहा है, जल्दी ही खत्म हो जाएगा। रिपोर्टर - यह क्लास ऑनलाइन चलेगी या ऑफलाइन? निरंजन - यह सारी क्लास ऑफलाइन चलेगी। रिपोर्टर - इस बैच में किसकी तैयारी कराई जाएगी? निरंजन - इसमें रेलवे, SSC, बिहार पुलिस की तैयारी कराई जाएगी। रिपोर्टर - हमने तो सुना है कि खान सर 100 रुपए फीस लेकर पढ़ाते हैं? निरंजन - वह सब कुछ ऑनलाइन क्लास में होता है, ऑफलाइन क्लास की फीस 100 रुपए नहीं है। आपको ऑनलाइन में यह सब कुछ मिलेगा, जिसमे खान सर की लाइव क्लास मिलेगी। रिकॉर्डिंग वीडियो मिलेगा। लोग 100 रुपए का ऑफर देखकर आते हैं, लेकिन यहां उन्हें पूरा फीस स्ट्रक्चर बताया जाता है। रिपोर्टर - वह कैसे मिलता है? निरंजन - वह आपको मोबाइल में एप डाउनलोड करना होगा, वहां से आपको मिल जाएगा। खान सर की कोचिंग में जो फैसिलिटी दी जाती है, उसके हिसाब से यहां फीस बाकी कोचिंग की अपेक्षा कम है। रिपोर्टर- बीपीएससी और यूपीएससी की फीस कितनी है? निरंजन- बीपीएससी के लिए 20 हजार फीस है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लास चलती है। इसमें प्री, मेंस और इंटरव्यू तक की तैयारी कराई जाती है। उसी फीस में किताब भी साथ में मिलेगी। अगर आप 6 हजार वाली क्लास लेते हैं तो उसमें किताब अलग से लेनी होगी। रिपोर्टर - आपने तो मुझे पहले बताया था कि 5 हजार रुपए लगेंगे। निरंजन - वह फाउंडेशन क्लास की है। वहां बेसिक पढ़ाई कराई जाती है। 100-200 वाली क्लास लेकर बीपीएससी, यूपीएससी या रेलवे, एसएससी की क्लास नहीं होती है। वह सब ऑनलाइन या कम दिन की टारगेट क्लास होती है। खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग से निकलकर हम कैंपस में ही अंकुश मैथमेटिक्स कोचिंग सेंटर पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात दीपक से हुई, जिन्होंने फीस से लेकर कोर्स की पूरी जानकारी दी। रिपोर्टर - सर की क्लास जॉइन करनी थी। दीपक - सर सिर्फ मैथ्स पढ़ाते हैं, वन टाइम पेमेंट करेंगे तो 4250 रुपए जमा करना होगा। अगर इंस्टॉलमेंट में करना चाहते हैं तो पहली बार 3 हजार और क्लास स्टार्ट होने के एक महीने के भीतर 2 हजार जमा करने होंगे। रिपोर्टर - कितने दिनों तक क्लास चलेगी। दीपक - क्लास 10 से 12 महीने तक ही चलेगी। रिपोर्टर - आपके यहां पैसा ज्यादा लिया जा रहा है, कई जगहों पर पोस्टर देखा है कि 100 से 200 रुपए में पढ़ाया जाता है। दीपक - अरे, उसकी सच्चाई कुछ और ही है। 100 से 200 रुपए में फाउंडेशन की क्लास नहीं होती है। वह मैप पढ़ाने की फीस होती है। कई लोग टारगेट क्लास कराते हैं। इसकी 8 से 10 दिन तक की ही क्लास चलती है। उस सब की फीस 100 से 200 रुपए है। जिसकी परीक्षा होती है, उसी की स्पेशल क्लास चलती है, जैसे रेलवे या बिहार पुलिस तो उसी की पढ़ाई कराई जाएगी। रिपोर्टर - यहां 100 रुपए वाली क्लास नहीं चलती है क्या? दीपक - चलती है न, यहां 99 रुपए में रेलवे की स्पेशल क्लास चलती है। सर को बेटा हुआ था तो 11 रुपए में एडमिशन हो रहा था, लेकिन अब उसे बढ़ाकर 99 रुपए कर दिया गया हैंं। यह बैच 2 महीने में खत्म हो जाएगा। रिपोर्टर - तो इतने कम दिन में क्या पढ़ाते होंगे? क्या सिलेबस कंप्लीट हो जाता है? दीपक - यह सब टारगेट बैच होता है। इस बैच में ऊपर-ऊपर पढ़ाया जाता है, जिसका एग्जाम है, उसी की स्पेशल पढ़ाई होती है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम मुसल्लहपुर हाट में स्थित कौटिल्य जीएस पहुंची तो यहां हमारी मुलाकात संतोष से हुई। संताेष ने कोचिंग का पूरा सच बताया और कहा अगर प्रचार में 1 रुपए या चौंकाने वाली कम फीस नहीं रखी जाए तो स्टूडेंट्स कैसे आएंगे। रिपोर्टर - फाउंडेशन बैच में एडमिशन लेना है, कितनी फीस लगेगी? संतोष - फाउंडेशन जीएस के लिए वन टाइम पेमेंट करेंगे तो 6500 रुपए लगेगा। अगर इंस्टॉलमेंट में देते हैं तो 7100 रुपए देने होंगे। अगर इंस्टॉलमेंट में पैसा देना चाहते हैं तो एडमिशन के समय 2000 रुपए जमा करने होंगे। बाकी बचे पैसे तीन टर्म में देने होंगे। रिपोर्टर - इस बैच में किस परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी? संतोष - बैंकिंग, SSC, बिहार पुलिस, रेलवे की तैयारी कराई जाएगी। रिपोर्टर - 100 से 200 रुपए में जो क्लास चल रही है। उस बैच में कैसे एडमिशन होगा? हमने कई जगहों पर देखा कि 100 रुपए में क्लास करने का पोस्टर लगा है? संतोष - यह सब 10 से 15 दिन की क्लास होती है। हमारे यहां भी एक टेस्ट के 15 रुपए लिए जाते हैं। 200 रुपए में एक महीने तक टेस्ट दीजिए। यहां अभी हाल में ही 100 रुपए वाला बैच खत्म हुआ है। वह 10 दिन तक चला। इसमें सिर्फ किसी एक खास एग्जाम को लेकर तैयारी कराई जाती है। रिपोर्टर - प्रचार तो ऐसे किया जाता है कि 100 रुपए में पूरी तैयारी कराई जाएगी। इसकी सच्चाई क्या है? संतोष - पूरे पटना में, 100 रुपए में कोई टीचर नहीं पढ़ाएगा। मेरे पास पूरी तैयारी करने के लिए 6500 रुपये लगेंगे। 100 रुपए वाली क्लास में सिर्फ टॉपिक वाइज डिस्कशन होगा। अगर आपने फाउंडेशन की पढाई नहीं की है, तो 100 रुपए वाली क्लास में आपको कुछ समझ में ही नहीं आएगा। रिपोर्टर - 6500 रुपए के बाद अलग से कोई पैसा नहीं देना होगा क्या? संतोष - बुक के लिए आपको अलग से पैसे देने होंगे। पड़ताल के दौरान भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम आशा मैथमेटिक्स क्लासेस पहुंची। वहां हमारी मुलाकात शुभम से हुई। शुभम ने कोर्स से लेकर फीस तक की पूरी डील की। शुभम ने कोचिंग मार्केट की पूरी गणित समझाई। रिपोर्टर - मैथ्स-रीजनिंग के लिए एडमिशन लेना है। शुभम - इसके लिए शाम में क्लास चलती है, 6 महीने तक रीजनिंग की और 1 साल तक मैथ्स की क्लास चलेगी। मैथ्स के लिए 4500 फीस है, लेकिन ऑफर में 2500 रुपए में एडमिशन हो जाएगा। रीजनिंग के लिए 1550 रुपए है, लेकिन ऑफर में 750 रुपए ही लगेंगे। रिपोर्टर - लेकिन यहां तो हर जगह 100 रुपए वाली क्लास का पोस्टर लगा है। शुभम - मेरे यहां 100 रुपए में क्लास नहीं चलती है, जितनी कम फीस वाली बैच है, वह फाउंडेशन बैच नहीं होता है। वह ज्यादा से ज्यादा एक महीने का होता है। रिपोर्टर - इसमें टीचर्स को क्या फायदा होता होगा? शुभम - यह बहुत बड़ा बिजनेस है। एक 1 हजार रुपए बोलकर क्लास शुरू करते हैं। अगर 1000 स्टूडेंट्स ने 1000 - 1000 देकर एडमिशन लिया तो 1 से 2 महीने में टीचर ने करोड़ों रुपए कमा लिए। बच्चों को लगता है कि 1000 रुपए ही लग रहा है। लेकिन उसी 1000 हजार से टीचर लाखों-करोड़ो बना लेते हैं। क्योंकि हजारों लड़के एडमिशन लेते हैं। इसमें किसी भी तरह से टीचर को 1 महीना बिताना होता है। रिपोर्टर - एक महीने में बच्चों को क्या ही पढ़ा पाते होंगे? शुभम- यह चालाक लड़के समझ पाते हैं, लेकिन बाकी लड़के बड़े नाम पर जाते हैं। 1 महीने में कोई क्या ही पढ़ा पाएगा। अगर बच्चे बेसिक पढ़ाई नहीं किए होते हैं, तो एक महीने की क्लास में बच्चों को कुछ समझ में नहीं आता है। जब तक हम ए टू जेड पढ़े नहीं रहेंगे, तब तक कुछ नहीं समझ पाएंगे। बच्चों को लगता है कि एक ही हजार तो लग रहा है। ऐसे में टीचर अच्छे-खासे पैसे बना लेते हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम मुसल्लहपुर के ही सिलेक्शन तक कोचिंग सेंटर पहुंची। यहां हमारी मुलाकात टीचर पी के (प्रभु कुमार) और प्रेमजीत सिंह से हुई। दोनों टीचर्स ने फीस के साथ कोचिंग से जुड़ी जानकारी दी। दोनों टीचर ने कोचिंग में चल रहे मार्केटिंग के तरीके का भी खुलासा किया। रिपोर्टर - फाउंडेशन बैच के लिए एडमिशन लेना है। प्रेमजीत - पूरे फाउंडेशन बैच के लिए फीस 8500 रुपए है। रिपोर्टर - चारों तरफ 100 रुपए में तैयारी कराने और 1 रुपए में दरोगा की पूरी तैयारी के पोस्टर-बैनर लगे हैं। प्रेमजीत - यह सब मार्केटिंग का तरीका है। आपको 1 रुपए के बहाने ऑफिस बुलाया जाएगा। वहां एक रुपए में एडमिशन लेकर क्लास रूम तक बुलाया जाएगा। फिर अलग-अलग सिलेबस के नाम पर आपसे पैसे वसूल लिए जाएंगे। रिपोर्टर - यह पूरा खेल कैसे होता है? प्रेमजीत - एक रुपए तो दिखावा है। एक रुपए के नाम पर जब स्टूडेंट पहुंच जाते हैं, तो 10 दिन तक पढ़ाया जाता है। स्टूडेंट्स से कहा जाता है कि 1 रुपए की क्लास 10 दिन की है। आगे बताया जाता है कि 10 दिन में क्या होगा? क्लास कंटिन्यू करने लिए किसी फाउंडेशन क्लास में एडमिशन ले लीजिए। कोई भी टीचर क्वालिटी एजुकेशन देगा तो वह पैसा तो लगेगा। अगर कोई 1 रुपए में या 10 रुपए में पढ़ा रहा है तो वह क्या क्वालिटी एजुकेशन देगा। रिपोर्टर - खान सर का प्रचार है कि वह 200 रुपए लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं? प्रेमजीत - हां, 200 रुपए में पढ़ाते हैं लेकिन उस 200 रुपए में क्या पढ़ाया जाता है, यह किसी को नहीं बताया जाता है। 200 में मैप की क्लास चलती है, जो 10 से 15 दिन की होती है। कम पैसे में बच्चों को क्लास रूम तक बुलाया जाता है। फिर उनसे पैसे वसूले जाते हैं। खान सर 9 से 10 रुपए का भी बैच लेकर आए हैं। एक बार बच्चे आ जाते हैं फिर उनसे अलग-अलग एग्जाम की तैयारी के नाम पर पैसे लिए जाते हैं। क्या कोई 9 से 10 रुपए में अधिकारी बन पाएगा? यह सब मार्केटिंग है। रिजल्ट हो या न हो, कोचिंग वाले रिजल्ट खरीद लेते हैं। फिर उन्ही को दिखाया जाता है कि इतने सारे लड़के हमारे पास पढ़कर नौकरी पाए हैं। ऐसे में और भी लड़के एडमिशन लेने चले आते हैं। रिपोर्टर - ये लोग कैसे मार्केटिंग करते हैं? प्रेमजीत - कोचिंग वाले बड़े-बड़े लोगों के पॉडकास्ट और शो में जाते हैं। वहां अपने कोचिंग का प्रचार करते हैं। वह कहते हैं कि हम 200 रुपए में ही पढ़ाते हैं। वहां यह नहीं बताते कि इस 200 रुपए में क्या पढ़ाते हैं। 75 हजार रुपए भी फीस लेते हैं, यह नहीं बताते हैं। बच्चे यही सुनकर क्लास में आ जाते हैं कि 200 रुपए में पढ़ाई हो रही है। क्लास में आने के बाद 10 दिन क्लास होती है और फिर बोला जाता है कि आप फाउंडेशन बैच में एडमिशन लीजिए। इन्वेस्टिगेशन में 1 रुपए में दरोगा बनाने का दावा फर्जी निकला भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि सोशल मीडिया और बैनर पोस्टर पर 1 रुपए में दरोगा बनाने का दावा पूरी तरह से फर्जी है। ये स्टूडेंट्स को बुलाने का एक ट्रेंड है। इसी तरह से 99, 199 और 200 का भी कोचिंग प्लान है। भास्कर की इन्वेस्टिगेश्न में साफ हो गया कि 200 रुपए सरकारी नौकरी की तैयारी का दावा स्टूडेंट्स को बुलाकर उन्हें बड़े पैकेज वाले कोर्स में पढ़ाने का ट्रेंड है। सामने आया कि 1 रुपए या 200 रुपए में पूरी सिलेबस की पढ़ाई नहीं होती है, बल्कि वह किसी टॉपिक या मैप पढ़ाने के बहाने टीचर बच्चों को अपने क्लासरूम तक बुलाते हैं। 7-10 दिन की क्लास कराते हैं और इस दौरान बच्चों से नौकरी के लिए सिलेबस की पूरी तैयारी के नाम पर 6500-8500 रुपए तक लेकर एडमिशन कराते हैं। पूरे पटना में कोई ऐसा टीचर या कोचिंग नहीं मिला जहां 1 रुपए या 200 रुपए में पूरी तैयारी कराई जाती हो। बिहार की कोचिंग इंडस्ट्री की ताकत समझिए… एक्सपर्ट बोले- इस तरह की मार्केटिंग से बच्चों को क्लासरूम तक लाया जाता है इसके बाद हमने एक्पर्ट्स से बात की हमने पूछा, कोचिंग का धंधा बिहार में इतना तेजी से कैसे फैल रहा है? इस पर बिहार के पूर्व DGP और शिक्षाविद अभ्यानंद ने बताया कि 1 रुपए में नौकरी की तैयारी कराने का दावा सिर्फ मार्केटिंग का तरीका है। बच्चों को पहले क्लासरूम तक बुलाया जाता है फिर उनसे महंगे कोर्स बेचे जाते हैं। सम्राट सरकार कर रही कोचिंग बिल लाने की तैयारी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को कोचिंग संस्थानों के संचालन के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। स्कूल, कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कोचिंग न जाएं नए नियमों के अनुसार, अब राज्य का कोई भी कोचिंग संस्थान स्कूल और कॉलेज के तय समय के दौरान अपनी कक्षाएं नहीं चला सकेगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपनी मुख्य स्कूली या कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कोचिंग न जाएं। दरअसल, पटना में दो बड़े कोचिंग संस्थानों को चलाने वालों (खान सर और रौशन आनंद) के बीच विवाद के चलते सरकार को इस बारे में फैसला लेना पड़ा। क्यों लिया जा रहा कोचिंग के लिए ये फैसला ? 27 मई को बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद बिहार की कई कोचिंग ने अपने - अपने छात्रों की सफलता का दावा किया। खान सर द्वारा जारी खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद ने बड़ी संख्या में परीक्षा में सफल छात्रों के लिए प्रचार अभियान शुरू किया। दोनों कोचिंग सेंटर ने सफल उम्मीदवारों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किए। शहर में पोस्टर, होर्डिंग और बैनर लगाए गए। इसी दौरान आरोप लगा कि खान ग्लोबल स्टडीज के कुछ कर्मचारियों ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के बोर्ड के ऊपर अपना प्रचार बैनर लगा दिया। यह तनाव धीरे-धीरे बढ़ा। जिसके चलते तोड़फोड़, पथराव और फायरिंग की घटनाएं सामाने आईं। क्या है डमी स्कूल : ये ऐसे स्कूल हैं जहां छात्रों के लिए नियमित रूप से जाना जरूरी नहीं है। इसके लिए कोचिंग संस्थान छात्रों पर स्कूल के लोड को कम करने के लिए रेग्यूलर स्कूलों के साथ गठजोड़ करते हैं। इस तरह उन्हें अपनी एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी पर ध्यान देने के लिए अधिक समय मिलता है। डमी स्कूलों में एडमिशन जेईई और नीट के लिए सबसे ज्यादा है।
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