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    2 हेक्टेयर में कालानमक धान से 3.40 लाख का मुनाफा:द्धार्थनगर में जयराम की सफलता बनी मिसाल; डीएम ने खेत पहुंचकर देखा रोपाई का काम

    2 hours ago

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    सिद्धार्थनगर में कालानमक धान की खेती किसानों के लिए बेहतर आमदनी का जरिया बनती जा रही है। बर्डपुर विकासखंड के नोनहवा गांव निवासी किसान जयराम ने पिछले खरीफ सीजन में दो हेक्टेयर क्षेत्र में कालानमक धान की खेती कर करीब 3.40 लाख रुपए का शुद्ध लाभ कमाया। बेहतर मुनाफे से उत्साहित होकर उन्होंने इस वर्ष खेती का रकबा बढ़ाकर चार हेक्टेयर कर दिया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने उनके खेत पर पहुंचकर रोपाई का निरीक्षण किया और खेती की पूरी जानकारी ली। डीएम ने देखा रोपाई का कार्य निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने खेत में कालानमक धान की उन्नत प्रजाति केएन-1 समेत अन्य किस्मों की रोपाई का अवलोकन किया। उन्होंने रोपाई की व्यवस्था, उत्पादन क्षमता, बाजार में मांग और खेती से होने वाली आय के बारे में किसान से विस्तार से जानकारी ली। एक लाख की लागत, 4.40 लाख की आय किसान जयराम ने बताया कि पिछले खरीफ सीजन में दो हेक्टेयर क्षेत्र में कालानमक धान की खेती पर करीब एक लाख रुपए की लागत आई थी। फसल तैयार होने पर 45 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ, जिससे करीब 30 क्विंटल कालानमक चावल तैयार हुआ। बाजार में कालानमक चावल की बेहतर गुणवत्ता और मांग के चलते इसकी बिक्री 14 से 15 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से हुई। इससे उन्हें करीब 4.40 लाख रुपए की आय हुई। लागत निकालने के बाद करीब 3.40 लाख रुपए का शुद्ध लाभ मिला। मुनाफे से खरीदा ट्रैक्टर, अब दोगुनी की खेती जयराम ने बताया कि खेती से हुई कमाई से उन्होंने एक छोटा ट्रैक्टर खरीदा, जिससे खेती के काम आसान हो गए और लागत व समय दोनों की बचत होने लगी। इसी सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने इस वर्ष कालानमक धान की खेती का रकबा बढ़ाकर चार हेक्टेयर कर दिया है। फिलहाल खेतों में रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है। किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन रही कालानमक खेती निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि कालानमक धान की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने खेती की प्रगति और किसान के अनुभवों की जानकारी लेते हुए उत्पादन, लाभ और बाजार की संभावनाओं पर चर्चा की। जयराम का कहना है कि यदि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक सलाह और बेहतर विपणन व्यवस्था लगातार मिलती रहे तो अधिक से अधिक किसान कालानमक धान की खेती अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। देश-विदेश तक है कालानमक चावल की पहचान सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल अपनी विशेष सुगंध, स्वाद और पोषण गुणों के कारण देश-विदेश में पहचान बना चुका है। बाजार में इसकी लगातार मांग रहने से जिले के किसान अब पारंपरिक धान की तुलना में कालानमक धान की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। जयराम जैसे किसानों की सफलता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो कम क्षेत्रफल में अधिक आय देने वाली खेती की तलाश में हैं।
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