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    समुद्र में उतरा भारतीय नौसेना का नया बाहुबली, Advanced Stealth Frigate Taragiri के पानी में आते ही कांपे दुश्मन, Rajnath Singh बोले- ये नया भारत है

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    हिंद महासागर क्षेत्र की सामरिक तस्वीर को नया आकार मिल गया है। हम आपको बता दें कि भारत की समुद्री ताकत को नई धार देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी को भारतीय नौसेना में शामिल कर दिया। यह सिर्फ एक जहाज का शामिल होना नहीं है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं का प्रदर्शन भी है।इस ऐतिहासिक अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हम आपको बता दें कि आईएनएस तारागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत तैयार चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने बनाया है। करीब 6670 टन वजनी यह युद्धपोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक से लैस है, जो भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम है।आईएनएस तारागिरी सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय इंजीनियरिंग और मेक इन इंडिया की ताकत का जीवंत उदाहरण है। यह उस पुराने लीनडर श्रेणी के जहाज की जगह लेता है, जिसने 1980 से 2013 तक सेवा दी थी। यानी यह सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि एक पीढ़ीगत छलांग है।इसे भी पढ़ें: INS Taragiri से बढ़ी Indian Navy की समुद्री ताकत, Rajnath Singh बोले- दुश्मनों की अब खैर नहींइस युद्धपोत की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टेल्थ क्षमता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका रडार सिग्नेचर बेहद कम हो, जिससे यह दुश्मन की नजरों से बचते हुए खतरनाक इलाकों में भी ऑपरेशन कर सके। इसकी गति और सहनशक्ति को बढ़ाने के लिए इसमें डीजल और गैस आधारित संयुक्त प्रणोदन प्रणाली दी गई है, जो इसे लंबे समय तक समुद्र में सक्रिय रख सकती है।हथियारों के मामले में भी आईएनएस तारागिरी किसी से कम नहीं है। इसमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली और उन्नत पनडुब्बी रोधी प्रणाली शामिल है। इन सभी को एक आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के जरिए जोड़ा गया है, जिससे किसी भी खतरे पर तुरंत प्रतिक्रिया संभव है। साथ ही इसमें स्वदेशी सोनार प्रणाली भी लगी है, जो इसे जल, थल और वायु तीनों क्षेत्रों में युद्ध करने में सक्षम बनाती है।इस समय जब हिंद प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और समुद्री गतिविधियां तेज हो रही हैं, ऐसे में आईएनएस तारागिरी का शामिल होना बेहद महत्वपूर्ण है। भारत का पूर्वी समुद्री तट और हिंद महासागर क्षेत्र अब वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं। ऐसे में यह युद्धपोत भारत की मौजूदगी को और मजबूत करेगा और किसी भी चुनौती का जवाब देने की क्षमता को बढ़ाएगा।रणनीतिक नजरिए से देखें तो यह कदम साफ संकेत देता है कि भारत अब सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय समुद्री शक्ति बनने की राह पर है। आईएनएस तारागिरी न केवल युद्ध के समय बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे मिशनों में भी अहम भूमिका निभाएगा। यानी यह जहाज सिर्फ युद्ध का हथियार नहीं, बल्कि कूटनीतिक और मानवीय ताकत भी है।इसकी तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा और मजबूत होगी और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी पकड़ और गहरी होगी। बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच यह जहाज भारत के लिए एक रणनीतिक ढाल और आक्रामक शक्ति दोनों का काम करेगा।देखा जाये तो आईएनएस तारागिरी का नौसेना में शामिल होना एक निर्णायक मोड़ है। यह भारत की सैन्य ताकत, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक सोच का ऐसा प्रदर्शन है, जिसे नजरअंदाज करना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए भारी पड़ सकता है।इस अवसर पर दिये गये रक्षा मंत्री के संबोधन की बात करें तो आपको बता दें कि राजनाथ सिंह ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति समेत देश का 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्ग से होता है और ऐसे में उभरते समुद्री खतरों के बीच वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आईएनएस तारागिरी के जलावतरण समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है, चाहे वह फारस की खाड़ी हो या मलक्का जलसंधि। पश्चिम एशिया में मौजूदा परिस्थितियों के कारण तेल आपूर्ति में बाधा और टैंकरों को रोके जाने की स्थिति के बीच उनकी ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।उन्होंने कहा कि एक मजबूत और सक्षम नौसेना देश के लिए विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘समुद्र में कई संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां हमारी नौसेना लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखती है ताकि वस्तुओं की आपूर्ति सुचारु बनी रहे। जब भी वहां तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है, भारतीय नौसेना हमारे वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।’’ राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने यह साबित किया है कि वह न केवल देश के हितों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुनिया भर में अपने नागरिकों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठा सकती है।इतिहास का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नौसैनिक शक्ति को मजबूत किए बिना कोई भी देश सही मायनों में शक्तिशाली नहीं बन सकता इसलिए जब नरेंद्र मोदी 2047 तक ‘विकसित भारत’ की बात करते हैं, तो उसमें समुद्री शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
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