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    सहारा सिटी का कब्जा वापस लेने की अपील खारिज:लखनऊ हाईकोर्ट ने याचिका सुनने से किया इनकार, कहा- केस सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग

    9 hours ago

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    लखनऊ हाईकोर्ट ने ‘सहारा सिटी’ का कब्जा वापस लेने की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मेसर्स सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका को पोषणीयता के आधार पर खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। नगर निगम ने पट्टा रद्द कर दिया याचिका में सहारा ने नगर निगम द्वारा 8 सितंबर 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत 1994 में दिए गए जमीन के पट्टे को रद्द कर दिया गया था। साथ ही, 11 सितंबर 2025 के आदेश में संबंधित जमीन खाली कराने के निर्देश भी दिए गए थे। सहारा की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2017 में हुए एक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) मामले में उक्त जमीन को लेकर उनके पक्ष में निर्णय आ चुका है। इसके बावजूद नगर निगम ने उस आदेश की अनदेखी करते हुए पट्टा रद्द कर दिया, जबकि कंपनी पट्टे की अवधि बढ़ाने के लिए आवश्यक धनराशि जमा करने को तैयार है। वहीं, नगर निगम ने याचिका का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिकाएं लंबित हैं सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि सहारा-सेबी विवाद से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिकाएं लंबित हैं। इसी क्रम में सहारा समूह ने 14 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन देकर अपनी कुछ संपत्तियों-जिसमें सहारा शहर भी शामिल है। अडानी ग्रुप को हस्तांतरित करने की अनुमति मांगी है, ताकि प्राप्त राशि से सेबी खाते में धन जमा कर कोर्ट के आदेशों का अनुपालन किया जा सके। अदालत ने कहा कि जब सहारा शहर से संबंधित मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और उस पर अंतरिम आदेश भी पारित हो चुके हैं, तो हाईकोर्ट के लिए इस मामले में हस्तक्षेप करना संभव नहीं है। ऐसे में इस विवाद पर अलग से रिट याचिका की सुनवाई नहीं की जा सकती है। लीज उल्लंघन पर नगर निगम ने जब्त की जमीन गोमतीनगर स्थित सहारा सिटी को लेकर नगर निगम ने आरोप लगाया था कि वर्ष 1994 में हुई लीज की शर्तों का पालन नहीं किया गया। जांच में सामने आया कि निर्माण और उपयोग से जुड़े कई नियमों का उल्लंघन किया गया। इसके बाद निगम ने पूरे परिसर के छहों गेट सील कर प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट से भी सहारा को नहीं मिली राहत सुप्रीम कोर्ट ने सहारा शहर की लीज खत्म करने के निर्णय को सही माना है। इसके साथ ही लीज डीड को रद्द करने के निर्णय को गैर कानूनी बताने वाली सहारा की याचिका को भी खारिज कर दिया गया है। नगर निगम ने 30 साल की लीज अवधि पूरा होने और शर्तों के उल्लंघन पर 6 अक्तूबर में सहारा शहर को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद परिसर के गेटों को सील कर वहां सुरक्षा कर्मी तैनात कर दिए थे। इस कार्रवाई के कारण सहारा प्रमुख रहे सुब्रत रॉय सहारा की पत्नी स्वप्ना रॉय को भी परिसर खाली करना पड़ा था। लीज निरस्त करने की कार्रवाई के विरोध में सहारा कंपनी पहले हाईकोर्ट गई। वहां से राहत नहीं मिली तो वह सुप्रीम कोर्ट गई। वहां भी उसे राहत नहीं मिली। कोर्ट ने 16 मार्च को अपील खारिज कर दी। दरअसल, सहारा ने देश भर में अपनी 88 संपत्तियों की लिस्टिंग करते हुए सेबी से अटैच किया था। इसमें सहारा शहर का 130 एकड़ का परिसर भी था। इसी पर मालिकाना हक को लेकर नगर निगम ने विरोध किया था। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया- सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम की जीत हुई है। इसका मालिकाना हक नगर निगम के पास है। कॉलोनी बनाने के लिए दी गई थी जमीन नगर निगम की ओर से आवासीय योजना विकसित करने के लिए सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड कंपनी को 1994 में लाइसेंस पर शर्तों के तहत 170 एकड़ जमीन दी थी। इसमें 130 एकड़ में आवासीय प्लॉट-मकान बनाकर कॉलोनी विकसित करनी थी और 40 एकड़ का ग्रीन बेल्ट है। अब सहारा से जमीन खाली कराने के बाद इसपर नगर निगम का कब्जा है। जबकि शासन की तरफ से इसपर नया विधानभवन बनाने की तैयारी है। इसके लिए एलडीए को नोडल एजेंसी बनाया गया है। अब इसी जमीन पर बनेगा नया विधानसभा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इस जमीन के इस्तेमाल को लेकर सरकार की योजना स्पष्ट होती नजर आ रही है। गोमतीनगर स्थित इस बड़े भूखंड पर नया विधानभवन बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एलडीए ने शासन के निर्देश पर कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो इस परियोजना की डीपीआर और डिजाइन तैयार करेगा। शासन के निर्देश पर सहारा शहर की जमीन की पैमाइश कर रिपोर्ट पहले ही भेजी जा चुकी है। उच्च स्तर पर इस स्थान को विधानभवन निर्माण के लिए उपयुक्त मानते हुए सहमति भी बन चुकी है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के अनुसार, अब आगे की प्रक्रिया के तहत कंसल्टेंट की नियुक्ति और परियोजना की विस्तृत योजना पर काम तेजी से किया जा रहा है। सुब्रत रॉय ने 75 साल की उम्र में ली थी अंतिम सांस सुब्रत रॉय सहारा को मेटास्टैटिक स्‍ट्रोक, हाई ब्‍लड प्रेशर और डायब‍िटीज की समस्‍याएं थी। कार्डियोरेस्पिरेटरी अरेस्ट के कारण 14 नवंबर 2023 को रात 10.30 बजे उनका निधन हो गया था। उस वक्त वे 75 साल के थे। 12 नवंबर से कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल और मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (केडीएएच) में भर्ती थे। सुब्रत रॉय का लखनऊ में अंतिम संस्कार हुआ था। उनके दोनों बेटे सुशांतो और सीमांतो विदेश में थे। वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए थे। पोते ने चिता को मुखाग्नि दी थी। ----------------------- यह खबर भी पढ़ें... सुब्रत रॉय के सहाराश्री बनने की कहानी कारोबारी सुब्रत रॉय नहीं रहे। 75 साल की उम्र में मंगलवार को मुंबई में उनका निधन हो गया। लेकिन उनकी जिंदगी के कई चैप्टर बेहद खास रहे हैं। सामान्य जिंदगी से बड़े कारोबारी बन जाने तक की। पूरी खबर पढ़ें
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