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    संघ का लक्ष्य भारत को पुनः विश्व गुरु बनाना-अनिल:उन्नाव में संघ शिक्षा वर्ग का समापन, 26 जिलों के 334 शिक्षार्थियों ने लिया प्रशिक्षण

    6 hours ago

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    उन्नाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का समापन समारोह आयोजित किया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से संगठित, सक्षम और राष्ट्रभक्त समाज का निर्माण करना है, जिससे भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित किया जा सके। समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अनिल ने कहा कि संघ की शाखा पद्धति व्यक्ति निर्माण का प्रभावी माध्यम है। शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, समर्पण, सेवा और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित होते हैं, जो समाज जागरण और व्यवस्था परिवर्तन की आधारशिला बनते हैं। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग केवल शारीरिक या बौद्धिक प्रशिक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत आज भौतिक और आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है और विश्व पटल पर उसकी प्रतिष्ठा बढ़ रही है। हालांकि, युवाओं में राष्ट्रभावना का क्षय, जनसंख्या असंतुलन, पाश्चात्य अनुकरण, अत्यधिक भौतिकता और जीवन मूल्यों में गिरावट जैसी चुनौतियां समाज के सामने मौजूद हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए कर्तव्यों के निर्वहन की आवश्यकता है। अनिल ने संघ द्वारा प्रतिपादित "पंच परिवर्तन" की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वबोध और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता आज समय की मांग है। यदि समाज इन विषयों पर गंभीरता से कार्य करे तो राष्ट्र जीवन में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भन्ते शील रतन ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ और प्रसन्न मन का निवास होता है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी विश्व गुरु था और भविष्य में भी रहेगा। राष्ट्र और समाज में परिवर्तन किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के छोटे-छोटे योगदान से आता है। यदि हर स्वयंसेवक अपने घर, मोहल्ले और गली को बेहतर बनाने का प्रयास करे तो पूरा देश बदल सकता है। 22 मई से संचालित इस प्रशिक्षण वर्ग में अवध प्रांत के 26 जिलों के 169 खंड एवं नगरों के 281 स्थानों से कुल 334 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। इनमें 24 परास्नातक, 64 स्नातक, 12 शिक्षक तथा 192 इंटरमीडिएट छात्र शामिल रहे। सभी शिक्षार्थियों ने वर्ग शुल्क, गणवेश और आवागमन का खर्च स्वयं वहन किया। वर्ग की एक विशेष उपलब्धि भोजन व्यवस्था रही। इसके लिए ग्राम और नगर के परिवारों से प्रतिदिन दोनों समय 20-20 रोटियों का संग्रह किया गया। पूरे प्रशिक्षण वर्ग के दौरान लगभग 1.20 लाख रोटियों का संग्रह हुआ, जो समाज की सक्रिय सहभागिता का प्रतीक बना। समापन समारोह में अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख नवल जी, वर्ग के सर्वाधिकारी प्रमोद, वर्ग कार्यवाह कृष्ण कुमार, सर्व व्यवस्था प्रमुख लालता प्रसाद, सह व्यवस्था प्रमुख सुशील, प्रांत प्रचारक कौशल, सह प्रांत प्रचारक संजय, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अशोक दुबे सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, शिक्षार्थी, गणमान्य नागरिक और संघ कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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