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    रायपुर में फहीम बोले-सैयारा गाते इमोशनल हो गए थे:कहा- इसलिए लोगों के दिल को छू गया गाना, कॉन्सर्ट से पहले खूब पानी पीता हूं

    3 hours ago

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    बॉलीवुड के मशहूर सिंगर फहीम अब्दुल्ला रविवार को रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने SSIPMT मुजगहन में ऑर्गेनाइज लाइव कॉन्सर्ट में शानदार परफॉर्मेंस देकर ऑडियंस का दिल जीत लिया। उन्होंने एक के बाद एक अपने सुपरहिट गाने इश्क, झेलम और सैयारा गाकर युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। सिंगर फहीम अब्दुल्ला ने ‘दैनिक भास्कर डिटिजल’ से खास बातचीत की और अपने जर्नी के बारे में बताया। इसके अलावा उन्होंने AI को लेकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टाइल ले सकता है, लेकिन हमारी अदायगी नहीं ले सकता। फहीम ने बताया कि सैयारा सॉन्ग रिकॉर्ड करने के दौरान वे बहुत इमोशनल हो गए थे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… देखिए पहले ये तस्वीरें- सवाल: बचपन से लेकर अब तक का आपके सिंगिंग का सफर कैसा रहा? जवाब: घर में म्यूजिक बैकग्राउंड से कोई भी नहीं था। मुझे ही म्यूजिक में इंटरेस्ट था। मैं एक सामान्य कश्मीरी लड़के की लाइफ जिया हूं। मेरा परिवार कश्मीर का एक मध्यमवर्गीय परिवार है, मेरे बचपन से जो सिंगिंग के प्रति रुचि थी, बाद में पैशन बन गई। सवाल: अपने झेलम से शुरुआत की, फिर इश्क गाया और अब सैयारा गाना सुपरहिट हुआ है? आप अपने करियर से कितने संतुष्ट हैं। जवाब: मेरा सफर बहुत खूबसूरत था। मैंने हमेशा कोशिश की कि मैं वह गाने गाऊ, जो मेरे दिल को अच्छा लगे और दिल से ही निकले। कहा जाता है जब दिल से कोई बात निकलती है तो वहा दिल तक ही जाती है। मेरे पूरे सफर की यही एक खास बात रही, जो मैं आगे भी अपने साथ रखना चाहूंगा। सवाल: हम लोग जो गाने सुनते हैं वह स्टूडियो में तैयार होकर पूरे फिल्टर के साथ हम तक पहुंचते हैं। गाने रिकॉर्डिंग करने के समय क्या चुनौतियां होती हैं? जवाब: मुझे लगता है स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करने में कोई चुनौती नहीं होती, जितना लाइव कॉन्सर्ट में होती है। यह ठीक वैसा ही है जैसे फिल्म में एक्टिंग और थिएटर करने में। हम जब स्टूडियो में रिकॉर्ड करते हैं तो कई टेक ले सकते हैं, लेकिन कॉन्सर्ट में अपना बेस्ट देना पड़ता है। रही बात ऑटोट्यून की तो इसे सभी लोग इस्तेमाल करते हैं, लेकिन लाइव कॉन्सर्ट में हम रियल सिंगिंग करते हैं और लोग हमसे कनेक्ट कर जाते हैं। सवाल: यंग जनरेशन में सैयारा सॉन्ग सुनकर कई लोग रो पड़े, जब आप गाना रिकॉर्ड कर रहे थे उस दौरान आपका इमोशंस किस तरह था? जवाब: इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान मैं भी काफी भावुक हो गया था, और वही एहसास गाने में झलकता है। शायद इसी वजह से यह लोगों को पसंद आया। इसकी कंपोजिशन, म्यूजिक और लिरिक्स सभी बहुत प्यार और मेहनत से बनाए गए थे। जब लोगों ने इस गाने को सुना, तो उन्होंने उस भाव और प्यार को भी महसूस किया। सवाल: आपने एआर रहमान के साथ भी कुछ म्यूजिक्स बनाए हैं, उनसे आपको क्या सीखने को मिला? जवाब- रहमान सर के साथ काम करना एक अलग ही अनुभव होता है। वे आपको किसी तरह का दबाव महसूस नहीं होने देते, जिससे आप पूरी तरह फ्री होकर काम कर पाते हैं। अगर आपकी कोई अदायगी उन्हें पसंद आ जाती है, तो वे कहते हैं कि इसे दोहराइए। फिर उसमें कुछ और सुधार करके बेहतर ट्रैक बनाने की कोशिश करते हैं। इस दौरान आप उनके साथ काफी सहज और घुला-मिला महसूस करते हैं। मैंने बचपन से उनका संगीत सुना है, इसलिए मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं उनके साथ पहली बार काम कर रहा हूं। सवाल: किसी भी कॉन्सर्ट करने से पहले क्या तैयारी करते हैं? जवाब: यह सब का अपना अलग-अलग तरीका होता है। मैं हाइड्रेट रहना पसंद करता हूं। कॉन्सर्ट के एक-दो दिन पहले ही ज्यादा पानी पीना शुरू कर देता हूं। कॉन्सर्ट के पहले थोड़ा रियाज इसलिए भी किया जाता है, जिससे पता चले कि आप सही साउंड कर रहे हैं कि नहीं। सवाल: आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) लोगों की आवाज कॉपी कर रहा है। इसे सिंगिंग के भविष्य के लिए आप किस तरह देखते हैं? जवाब: AI आपके टेक्सचर कॉपी कर सकता है, आपकी अदायगी कॉपी नहीं कर सकता न ही प्रोजेक्शन कॉपी कर सकता है। ज्यादा से ज्यादा एआईं आपका स्टाइल कॉपी कर सकता है, जैसे कि आप ज्यादातर किस तरीके से गाते हैं उसे पकड़ लेगा। लेकिन इसके अलावा जो इमोशन और डेप्थ है, उसे नहीं पकड़ पाएगा। जैसे मैं यह डिसाइड कर सकता हूं कि कोई गाने की एक लाइन को मैं सॉफ्ट गाऊंगा और कोई दूसरे लाइन को हार्ड करूंगा। एआई कैन नॉट डू डिस। सवाल: आप खाली समय पर क्या करते हैं आपकी हॉबी क्या है? जवाब: मुझे बाइक चलाना खूब पसंद है, मैं पेंटिंग भी खूब किया करता था, लेकिन मसरूफियत की वजह से अब समय नहीं दे पा रहा हूं। मुझे गार्डनिंग भी बहुत पसंद है, लेकिन अभी भी जब फ्री रहता हूं तो यही सब करता हूं। सवाल: ऐसा सुना है कि आप इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर सिंगिंग की लाइन में आए, ये पूरा किस्सा क्या है? जवाब: इंटरनेट पर कुछ बातें गड़बड़ तरीके से मिक्स हो गई हैं। यह मेरे दोस्त असलान की कहानी है। वह इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर मेरे साथ मुंबई आया था। उस दौरान मैं भी अपनी मास्टर्स की पढ़ाई कर रहा था। बाद में मैंने भी अपना मास्टर्स पूरा कर लिया। सवाल: सिंगिंग की दुनिया में कई बार प्रतिस्पर्धा बहुत व्यक्तिगत हो जाती है। बॉलीवुड में भी ऐसा कई बार देखा गया है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं? जवाब: मैं कॉम्पिटिशन में यकीन नहीं करता। कला की दुनिया में और भी संभव नहीं है, क्योंकि से नापने और तौलने का कोई मेजरमेंट नहीं है। तीन लोगों के ज्यूरी होती है, सामने कोई सिंगिंग कर रहा है उस दौरान उनका मूड कैसा है। इससे किसी का इमोशन तय नहीं किया जा सकता। सभी अपने इमोशंस को अच्छे तरीके से रखने की कोशिश करते हैं। म्यूजिक के लिए यही सबसे महत्वपूर्ण है। सवाल: अरिजीत सिंह ने बैकग्राउंड सिंगिंग नहीं करने का फैसला लिया है। आपके सामने एक लंबा सफर और कई मौके हैं आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: मैं इसे बिल्कुल ऐसा नहीं मानता। अरजीत सर ने जो बेंचमार्क सेट किया है वह बहुत ही बड़ा है। उन तक पहुंचने के लिए दो-ढाई साल लग जाएंगे। अभी जितने भी बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगर है वह सब कमाल का काम कर रहे हैं जुबिन है, विशाल भाई है। यहां कौन ऊपर है, कौन नीचे है मैटर नहीं करता। मैटर ये करता है कि आप लोगों के कितने फिलिंग्स को महसूस कर रहे हो। सवाल: जो लोग सिंगिंग में अपना करियर देखते हैं, उनके लिए कोई टिप्स ? जवाब: सिंगिंग में करियर बनाना काफी मुश्किल होता है। यह एक अनकन्वेंशनल फील्ड है। भारत में पैरेंट्स आमतौर पर चाहते हैं कि बच्चे पारंपरिक करियर चुनें, लेकिन जिस बच्चे में लगन और पैशन हो, उसे लगातार कोशिश करते रहना चाहिए। साथ ही, फॉल बैक के लिए भी तैयार रहना जरूरी है। रायपुर कॉन्सर्ट की ये तस्वीरें भी देखिए… …………………… यह इंटरव्यू भी पढ़िए… निकिता बोलीं- छत्तीसगढ़ी फिल्मों में गाने की इच्छा: कहा- एआर रहमान के साथ काम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जैसा, 'राब्ता' गर्ल की परफॉर्मेंस पर झूमे फैन्स ‘राब्ता’, ‘जुगनू’, ‘लट्टू’ और ‘बुर्ज खलीफा’ जैसे सुपरहिट गानों से युवाओं के बीच खास पहचान बनाने वाली निकिता गांधी ने ‘दैनिक भास्कर डिजिटल’ से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने सफर, एआर रहमान के साथ काम करने के अनुभव और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बात की। पढ़ें पूरी खबर…
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