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    राहुल गांधी की नागरिकता मामले में सुनवाई आज:लखनऊ हाईकोर्ट ने पहले FIR का दिया था आदेश, फिर अपना ऑर्डर रोका

    3 hours ago

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    कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई होनी है। इस केस में कोर्ट आगे की कानूनी प्रक्रिया और नोटिस को लेकर महत्वपूर्ण फैसला ले सकता है। दरअसल, इस मामले की सुनवाई़ 17 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। उसमें याचिकाकर्ता समेत केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से पूछा गया था कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत है? वकीलों ने नोटिस जारी करने की कोई जरूरत नहीं बताई थी। इसके बाद FIR दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया गया था। अगले ही दिन 18 अप्रैल को सांसद राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का अपना ही आदेश बदल दिया। कोर्ट ने शनिवार 18 अप्रैल को अपनी वेबसाइट पर नया आदेश जारी किया। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने FIR कराने के आदेश को टाइप होने से पहले अपने फैसले को परखा। उन्होंने पुराने केसों की स्टडी में पाया कि ऐसे मामलों में नोटिस भेजना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी को नोटिस जारी किए बिना फैसला करना उचित नहीं है। राहुल गांधी को जारी हो सकता है नोटिस सूत्रों के अनुसार, कोर्ट आज की सुनवाई में राहुल गांधी को नोटिस जारी कर सकता है। यदि नोटिस जारी होता है तो उनसे मामले में जवाब मांगा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इससे पहले 17 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता की शिकायत को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए FIR दर्ज कर जांच कराने के निर्देश दिए थे। CBI जांच का विकल्प भी खुला रखा अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार चाहे तो इस मामले की जांच सीबीआई से भी कराई जा सकती है। यह पूरा मामला राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। CBI से जांच कराने का आदेश दिया था इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा था- FIR दर्ज करके मामले को CBI को ट्रांसफर किया जाए। हालांकि, इससे पहले 28 जनवरी, 2026 को MP-MLA कोर्ट ने विग्नेश शिशिर की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने मंत्रालय से ‘टॉप सीक्रेट’ फाइलें ली थीं सुनवाई के दौरान जज सुभाष विद्यार्थी ने गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन को निर्देश दिए थे कि मामले से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज पेश करें। मंत्रालय ने केस से जुड़ी सभी फाइलें हाईकोर्ट में पेश की थीं। विग्नेश शिशिर का दावा है कि उन्होंने कोर्ट में दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए। इनसे संकेत मिलता है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम में मतदाता रहे हैं। वहां चुनावों में भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद हैं। शुक्रवार को सुनवाई में यूपी सरकार की तरफ से वकील डॉ. बीके सिंह पेश हुए थे। केंद्र सरकार का पक्ष वकील एसबी पांडेय ने रखा। याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की तरफ से बिंदेश्वरी पांडेय कोर्ट पहुंचे थे। रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर हुआ था केस 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी ही याचिका खारिज कर दी थी सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में राहुल की भारतीय नागरिकता से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। उस समय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अगर कोई कंपनी किसी फॉर्म में राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक के तौर मेंशन करती है, तो क्या ऐसा कर देने से ही वे ब्रिटिश नागरिक हो गए। सीजेआई गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा था- 'हम यह याचिका खारिज करते हैं। इसमें कोई आधार नहीं है। 'याचिका में कहा गया था, 'कोर्ट राहुल की नागरिकता के बारे में मिली शिकायत पर जल्द फैसला करने के लिए गृह मंत्रालय को निर्देश दे।' याचिका में राहुल गांधी को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता जय भगवान गोयल ने ब्रिटेन की कंपनी के 2005-06 के सालाना ब्योरे का जिक्र किया था। इसमें कथित तौर पर राहुल को ब्रिटिश नागरिक बताया गया था। राहुल के खिलाफ यूपी में 3 केस मोदी सरनेम केस में गई थी सांसदी मोदी सरनेम केस में गुजरात की एक कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद 24 मार्च 2023 को राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने 7 अगस्त 2023 को उनकी सदस्यता बहाल कर दी थी।
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