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    Raghav Chadha की लोकप्रियता से घबरा गये थे Kejriwal या बात कुछ और थी? उपनेता पद से क्यों हटाया?

    3 hours from now

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    जनहित से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा पर उनकी पार्टी ने बड़ी कार्रवाई की है। पहले से ही इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि राघव चड्ढ़ा और आम आदमी पार्टी के बीच दूरियां बढ़ रही हैं और अब उनकी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को जो पत्र लिखा है उसने राजनीतिक रूप से सनसनी मचा दी है। हम आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी ने अपने पत्र में राघव चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता के पद से हटाने की मांग की है। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें राज्यसभा में पार्टी के कोटे से बोलने का समय भी नहीं दिया जाए। आम आदमी पार्टी ने अपने पत्र में अशोक मित्तल को राज्यसभा में नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव दिया है और सचिवालय से इस नियुक्ति को जल्द से जल्द औपचारिक रूप देने का अनुरोध किया है।हम आपको बता दें कि वर्तमान में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल दस सदस्य हैं, जिनमें से सात पंजाब से और तीन दिल्ली से आते हैं। जहां तक राघव चड्ढा के राजनीतिक सफर की बात है तो यह काफी तेज और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 2012 में अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली लोकपाल विधेयक पर काम करते हुए की थी। इसके बाद वह तेजी से पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। वर्ष 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और फिर सबसे कम उम्र के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने दक्षिणी दिल्ली से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजेंद्र नगर सीट से जीत हासिल की। बाद में उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। वर्ष 2022 में राघव चड्ढा मात्र 33 वर्ष की उम्र में राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य बने। इसके बाद उन्होंने पार्टी के संसदीय और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने मनीष सिसोदिया और भगवंत मान जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर पार्टी की नीतियों और रणनीतियों को आगे बढ़ाया। वर्ष 2023 में उन्हें राज्यसभा में पार्टी का नेता भी बनाया गया था, जहां उन्होंने संजय सिंह की जगह ली थी।इसे भी पढ़ें: Raghav Chadha से AAP का मोहभंग? Rajya Sabha में पंख कतरे, Ashok Mittal को मिली जिम्मेदारीसंसद में राघव चड्ढा कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सरपंच पति या पंचायत पति जैसी प्रथा को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर चुनी गई महिलाएं अक्सर केवल नाममात्र की प्रतिनिधि बनकर रह जाती हैं, जबकि असली निर्णय उनके पुरुष रिश्तेदार लेते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि महिलाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए, ताकि संविधान संशोधन का उद्देश्य पूरा हो सके।इसके अलावा उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता के मुद्दे को भी संसद में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इसे स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता से जुड़ा बड़ा विषय बताया, जो देश की करोड़ों महिलाओं और बालिकाओं को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता उत्पादों, पानी और गोपनीयता की कमी के कारण लड़कियों का स्कूल से अनुपस्थित रहना एक सामाजिक और व्यवस्थागत विफलता को दर्शाता है। उन्होंने इस विषय पर समाज में व्याप्त संकोच और गलत धारणाओं की भी आलोचना की।इस वर्ष की शुरुआत में उन्होंने एक अलग पहल करते हुए गिग श्रमिकों की समस्याओं को समझने के लिए खुद एक दिन डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम किया था। इस अनुभव के जरिए उन्होंने इन श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों और दबावों को करीब से समझने की कोशिश की थी, जिससे उनकी संवेदनशीलता और जमीनी जुड़ाव का भी पता चलता है।देखा जाये तो ऐसे सक्रिय और चर्चित नेता को उपनेता पद से हटाने का प्रस्ताव कई सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के अंदर नई रणनीति, संतुलन और नेतृत्व संरचना को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे आंतरिक मतभेदों के रूप में भी देख रहे हैं। माना जा रहा है कि राघव चड्ढा के संबंध पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से अच्छे नहीं चल रहे हैं और इसी के चलते ना तो उन्हें पार्टी की बैठकों में बुलाया जाता है ना ही वह पार्टी के कार्यक्रमों में जाते हैं और ना ही पार्टी के मामलों पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं।आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा सचिवालय इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेता है और आम आदमी पार्टी अपने इस बदलाव के जरिए संसद में अपनी भूमिका को किस तरह नया आकार देती है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि पार्टी अपने संगठन और संसदीय नेतृत्व में बदलाव के जरिए नए समीकरण स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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