Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Prabhasakshi NewsRoom: 'Jagdeep Dhankhar ने ED के दबाव में दिया था इस्तीफा', Sanjay Raut की पुस्तक में किया गया दावा

    3 hours from now

    1

    0

    सियासी बयानबाजी के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। अपनी किताब अनलाइकली पैराडाइस के जरिए उन्होंने कई ऐसे विस्फोटक दावे किए हैं, जिन्हें लेकर राजनीतिक हलकों में सनसनी फैलाने की कोशिश साफ नजर आती है। यह किताब आरोपों, संकेतों और सवालों का ऐसा मिश्रण पेश करती है, जो सीधे तौर पर सत्ता, जांच एजेंसियों और लोकतंत्र के रिश्ते पर उंगली उठाती है।इसे भी पढ़ें: Assam Elections से पहले BJP में बगावत, टिकट बंटवारे पर Himanta Sarma के खिलाफ दिग्गजों ने खोला मोर्चाहम आपको बता दें कि संजय राउत का सबसे बड़ा दावा यह है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 2025 में दबाव के चलते पद छोड़ा था। उनके मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी ने कथित तौर पर एक फाइल तैयार की थी, जिसे धनखड़ के सामने तब रखा गया जब उन्होंने सरकार के खिलाफ स्वतंत्र राजनीतिक रुख अपनाने के संकेत दिए थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह के आरोप सियासत में एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करते हैं।किताब में यह भी कहा गया है कि जयपुर स्थित धनखड़ के घर की बिक्री और विदेश में धन हस्तांतरण को लेकर अफवाहों के आधार पर जांच एजेंसियों ने दबाव बनाने की कोशिश की। यह दावा अपने आप में कई परतें खोलता है, लेकिन इसके पीछे के तथ्यों को लेकर स्पष्टता अब तक सामने नहीं आई है।यही नहीं, पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को लेकर भी किताब में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संजय राउत का कहना है कि जब लवासा ने आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में असहमति जताई, तो उनके खिलाफ जांच और दबाव की कार्रवाई शुरू हुई। दावा किया गया है कि उनके घर पर छापे पड़े और परिवार को समन भेजे गए, जिसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। हालांकि इन दावों पर भी आधिकारिक तौर पर कोई ठोस पुष्टि नहीं है, लेकिन यह मामला संस्थाओं की स्वतंत्रता पर बहस को फिर से जिंदा कर देता है।किताब में अतीत के कुछ राजनीतिक प्रसंगों का भी जिक्र है। संजय राउत के अनुसार, गुजरात दंगों के बाद उस समय के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जेल भेजने की चर्चा के दौरान शरद पवार ने इसका विरोध किया था। उनका तर्क था कि लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मुख्यमंत्री को राजनीतिक मतभेद के कारण जेल भेजना उचित नहीं है। यह दावा भी अपने आप में राजनीतिक नैतिकता और फैसलों की दिशा को लेकर सवाल उठाता है।यही नहीं, अमित शाह से जुड़ा एक दावा भी किताब में सामने आया है। इसमें कहा गया है कि उन्हें जमानत दिलाने में शरद पवार और बाल ठाकरे की भूमिका रही थी, जबकि जांच एजेंसी इसका विरोध कर रही थी। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि अमित शाह ने खुद बाल ठाकरे से मदद मांगी थी और एक हस्तक्षेप ने उनके राजनीतिक भविष्य को बदल दिया। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह सियासत के अंदरूनी समीकरणों की झलक जरूर दिखाते हैं।देखा जाये तो इन सभी दावों का सामरिक महत्व काफी गहरा है। अगर किसी भी स्तर पर जांच एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल की बात सही साबित होती है, तो यह न केवल लोकतांत्रिक ढांचे बल्कि शासन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी असर डाल सकता है। इससे संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है।रणनीतिक नजरिए से देखें तो यह पूरा विवाद सत्ता और संस्थाओं के बीच संतुलन की बहस को फिर से तेज करता है। जब आरोप इस स्तर के हों कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को भी दबाव का सामना करना पड़ा, तो यह संकेत देता है कि सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। बहरहाल, संजय राउत की किताब ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि इन दावों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या कोई ठोस सबूत सामने आता है या यह मामला भी सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।उधर, संजय राउत ने अपनी पुस्तक के बारे में बताया है कि यह जेल में बंद रहने के दौरान के उनके अनुभवों पर आधारित है और इसके अंग्रेजी संस्करण में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा अचानक इस्तीफा देने के घटनाक्रम पर आधारित एक अध्याय भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि धनखड़ ने जुलाई 2025 में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस कदम से पूरा देश हतप्रभ रह गया था। हम आपको यह भी याद दिला दें कि संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2022 में धनशोधन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने जमानत पर रिहा होने के बाद मुंबई की आर्थर रोड जेल में अपने अनुभवों पर मराठी में ‘नरकटला स्वर्ग’ नाम से किताब लिखी जो पिछले साल प्रकाशित हुई थी। संजय राउत ने विस्तृत जानकारी दिये बिना बताया, ‘‘संशोधित (अंग्रेजी) संस्करण में धनखड़ पर एक अध्याय है। केंद्रीय एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों के पांच-छह और उदाहरण हैं।’’ इस पुस्तक ‘अनलाइकली पैराडाइज’ का विमोचन 23 मार्च को यानि आज नयी दिल्ली में होगा। किताब का विमोचन राज्यसभा सदस्य कपिल सिबल, संजय सिंह, डेरेक ओ‘ब्रायन और जया बच्चन करेंगे। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल होंगे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Delhi Weather | दिल्ली-NCR में मौसम का यू-टर्न! झमाझम बारिश के साथ 'येलो अलर्ट' जारी, जानें अगले कुछ घंटों का हाल
    Next Article
    Karnataka Politics में भूचाल: संत का बड़ा दावा, DK Shivakumar का साथ देने वाले मठों का Budget रोका

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment