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    अचानक बांग्लादेश से PM मोदी को आई सीक्रेट चिट्ठी, तुरंत चीन हुआ चौकन्ना

    3 hours from now

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    एक समय था जब बांग्लादेश और भारत के रिश्ते मिसाल माने जाते थे। खासतौर पर जब शेख हसीना सत्ता में थी। तब दोनों देशों के बीच भरोसा चरम पर था। आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम। सीमा विवाद का समाधान और आर्थिक सहयोग। दोनों देशों के बीच एक मजबूत साझेदारी बन चुकी थी। लेकिन फिर आया अगस्त 2024 जिसमें हुए छात्र आंदोलन ने सब कुछ बदल दिया। सरकार बदल गई। शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और नई अंतरिम सरकार बनाई गई। इसके बाद हालात धीरे-धीरे बिगड़ने लगे। भारत विरोधी बयान, हिंदू समुदाय पर हमले की खबरें और आपसी अविश्वास। रिश्तों में जो गर्मजोशी थी, वह ठंडेपन में बदल गई। फिर बांग्लादेश में चुनाव होते हैं और फिर सत्ता में आई बीएनपी और इसके साथ ही एक नया चेहरा सामने आया। इसे भी पढ़ें: Pakistan पर हमला करने आए लाखों शिया मुस्लिम, एक्शन में आया भारततारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदलने लगे। भारत के प्रतिरूप नरम हुआ। संवाद की शुरुआत हुई और कूटनीतिक संकेत मिलने लगे। खबर आई कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री को एक खास चिट्ठी लिखी है। यह सिर्फ एक औपचारिक पत्र नहीं था बल्कि इसमें छुपा था एक बड़ा संदेश कि हम रिश्ते सुधारना चाहते हैं। इस चिट्ठी में कहा गया कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ऐतिहासिक हैं। दोनों देशों के बीच गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव है और अब समय है कि इन्हें और मजबूत किया जाए। बता दें इस पूरे घटनाक्रम को कहा जा रहा है ईद डिप्लोमेसी। ईद के मौके पर दोनों देशों के नेताओं ने एक दूसरे को शुभकामनाएं दी। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि ईद हमें एकता दया और भाईचारे की याद दिलाती है और यही संदेश दोनों देशों के रिश्तों पर भी लागू होता है। इसे भी पढ़ें: सियासत के शिखर पुरुष...8931 दिन सत्ता का स्वाद चखा! PM मोदी ने कितने रिकॉर्ड बना दिए?दूसरी तरफ भारत की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई यानी त्यौहार के जरिए रिश्तों को सुधारने की कोशिश की गई। अब यह मामला सिर्फ पत्र तक सीमित नहीं रहा। दोनों प्रधानंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत हुई। उस स्तर पर संवाद हुआ और सबसे बड़ा संकेत शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर की मौजूदगी। यह सब दिखाता है कि भारत भी रिश्तों को सुधारने के लिए तैयार है। इस पत्र में तीन बड़े संकेत थे। पहला इतिहास और भरोसा। रिश्तों की नींव मजबूत है। बस उसे फिर से जगने की जरूरत है। दूसरा जनता के लिए सहयोग। दोनों देशों को मिलकर ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे आम लोगों को फायदा हो और तीसरा भविष्य की साझेदारी। शांति, स्थिरता और विकास के लिए साथ काम करना होगा। 
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