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    इधर से USS Boxer Warship की एंट्री, उधर से Arabian Sea में UK ने उतारी परमाणु पनडुब्बी, घिर गया Iran

    3 hours from now

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    मध्य पूर्व में युद्ध की आहट अब खुले टकराव में बदलती दिख रही है और इस बार समुद्र ही असली रणभूमि बन चुका है। अमेरिका और ब्रिटेन ने जिस तरह अपनी सैन्य ताकत को इस क्षेत्र में झोंक दिया है, उसने साफ कर दिया है कि आने वाले दिन बेहद विस्फोटक हो सकते हैं। हम आपको बता दें कि ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने अपने बेहद खतरनाक युद्धपोत यूएसएस बॉक्सर की अगुवाई में एक शक्तिशाली नौसैनिक समूह को रवाना कर दिया है, जबकि ब्रिटेन ने परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बी एचएमएस एनसन को अरब सागर में उतारकर हालात को और ज्यादा भयावह बना दिया है।हम आपको बता दें कि यूएसएस बॉक्सर कोई साधारण जहाज नहीं है, बल्कि यह एक चलता फिरता सैन्य अड्डा है जो दुश्मन के गढ़ में घुसकर तबाही मचाने की क्षमता रखता है। इसे छोटे विमानवाहक पोत जैसा माना जाता है, क्योंकि यह अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों, हमला करने वाले हेलीकाप्टरों और ओस्प्रे विमानों को संचालित कर सकता है। इसका मतलब साफ है कि यह जहाज हवा और जमीन दोनों मोर्चों पर एक साथ हमला करने में सक्षम है। यही नहीं, यह सीधे दुश्मन के तट पर सैनिकों को उतारकर हमला करने की ताकत भी रखता है, जो इसे युद्ध के मैदान में सबसे घातक हथियारों में शामिल करता है।इसे भी पढ़ें: लिटिल इंडिया पर मिसाइल दाग ईरान ने दिया मैसेज या कर दी बड़ी भूल, अब Samson Option का इजरायल करेगा इस्तेमाल? सब हो जाएगा खत्मयूएसएस बॉक्सर अकेला नहीं है। इसके साथ यूएसएस पोर्टलैंड और यूएसएस कॉमस्टॉक जैसे जहाज भी हैं, जो मिलकर एक विशाल आधुनिक युद्ध समूह बनाते हैं। इस पूरे समूह में करीब चार हजार सैनिक और नाविक शामिल हैं, जिनमें ग्यारहवीं मरीन टुकड़ी के प्रशिक्षित जवान भी हैं। ये सभी हाल ही में कैलिफोर्निया के तट पर बड़े सैन्य अभ्यास कर चुके हैं और अब सीधे संघर्ष क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। यह तैनाती इतनी तेजी से की गई कि सैनिकों को अपनी छुट्टियां तक बीच में छोड़नी पड़ीं, जो इस बात का संकेत है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।रणनीतिक रूप से देखें तो यह कदम सिर्फ सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि सीधा दबाव बनाने की चाल है। अमेरिका पहले ही विमानवाहक पोत और अन्य युद्धपोत इस क्षेत्र में भेज चुका है। अब भीषण हमले की क्षमता वाले जहाजों की तैनाती यह संकेत देती है कि वह सिर्फ हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जरूरत पड़ने पर जमीन पर भी सीधा हमला कर सकता है। खासकर ईरान के नियंत्रण वाले द्वीप और तेल से जुड़े ठिकाने संभावित निशाने बन सकते हैं।दूसरी ओर ब्रिटेन ने भी अपने इरादे साफ कर दिए हैं। परमाणु शक्ति से चलने वाली पनडुब्बी एचएमएस एनसन अरब सागर के गहरे पानी में पहुंच चुकी है। यह पनडुब्बी टॉमहॉक मिसाइलों और भारी टारपीडो से लैस है, जो दूर से ही किसी भी लक्ष्य को तबाह कर सकती है। अगर ब्रिटिश प्रधानमंत्री की अनुमति मिलती है, तो यह पनडुब्बी अचानक सतह के करीब आकर मिसाइल दाग सकती है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा।हम आपको यह भी बता दें कि ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत भी दे दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि पश्चिमी शक्तियां मिलकर ईरान को घेरने की रणनीति पर काम कर रही हैं। हालांकि ब्रिटेन यह दावा कर रहा है कि वह सीधे युद्ध में नहीं कूदना चाहता, लेकिन उसके कदम कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं।उधर, ईरान भी चुप बैठने वाला नहीं है। उसने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई में ब्रिटेन शामिल हुआ, तो वह इसका करारा जवाब देगा। हम आपको यह भी बता दें कि पिछले सप्ताह ईरान ने डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर यह संकेत दे दिया कि उसकी मारक क्षमता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। करीब चार हजार किलोमीटर दूर स्थित इस ठिकाने को निशाना बनाना अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि ईरान अब लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो चुका है।रणनीतिक नजरिए से यह पूरा घटनाक्रम बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। एक तरफ अमेरिका अपने बहुआयामी युद्धपोतों के जरिए समुद्र से जमीन तक हमला करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर ब्रिटेन की परमाणु पनडुब्बी गहरे पानी में छिपकर घात लगाने को तैयार है। इसके जवाब में ईरान अपनी मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है।देखा जाये तो यह स्थिति सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बनती जा रही है। समुद्री रास्तों, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अब सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है, क्योंकि यही रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है। अगर यहां जरा भी अस्थिरता बढ़ती है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। बहरहाल, अब यह स्पष्ट है कि आने वाले हफ्ते निर्णायक होंगे। अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह संघर्ष किसी भी वक्त बड़े युद्ध में बदल सकता है, जिसमें समुद्र, आसमान और जमीन तीनों मोर्चों पर आग भड़क उठेगी।
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