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    पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की उम्मीदों को झटका:सीएम बोले- मामला सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में, संघर्ष समिति ने बुलाई आपात बैठक

    12 hours ago

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    पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को सोमवार को बड़ा झटका लगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय संघर्ष समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान साफ कर दिया कि किसी भी प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना का मामला उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार से जुड़ा है। इसमें प्रदेश सरकार की किसी प्रकार की भूमिका नहीं होती है। मुख्यमंत्री के इस रुख के बाद अधिवक्ताओं में मायूसी है और आंदोलन की आगे की दिशा को लेकर मंगलवार को केंद्रीय संघर्ष समिति ने आपात बैठक बुलाई है। अब विस्तार से पढ़िए... मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात से पहले ही सोमवार सुबह अधिवक्ताओं और पुलिस-प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल सुभारती विश्वविद्यालय की ओर रवाना हो रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। बस को घेरकर अधिवक्ताओं को आगे बढ़ने से रोका गया। बस में चढ़ने और प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मिलने देने को लेकर पुलिस अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मुलाकात के आश्वासन पर शांत हुए अधिवक्ता करीब एक घंटे तक कचहरी से कमिश्नरी चौराहे तक हंगामा चलता रहा। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखने पर जोर दिया, जबकि पुलिस-प्रशासन की ओर से उन्हें रोकने का प्रयास किया जाता रहा। स्थिति बिगड़ती देख अधिकारियों ने दोपहर में मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया, जिसके बाद अधिवक्ता शांत हुए। दोपहर में प्रतिनिधिमंडल की सीएम से मुलाकात पुलिस-प्रशासन के आश्वासन के बाद केंद्रीय संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लंबे समय से चली आ रही हाईकोर्ट बेंच की मांग और इसके पीछे अधिवक्ताओं के आंदोलन का पक्ष मुख्यमंत्री के सामने रखा। अधिवक्ताओं को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री की ओर से इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार की भूमिका को लेकर सकारात्मक संकेत मिलेंगे। हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना का विषय उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है और इसमें प्रदेश सरकार का कोई योगदान नहीं होता। मुख्यमंत्री के इस कथन के बाद प्रतिनिधिमंडल के सामने आंदोलन को लेकर नई स्थिति पैदा हो गई। अब मंगलवार को तय होगी आंदोलन की अगली दिशा मुख्यमंत्री के बयान के बाद केंद्रीय संघर्ष समिति ने मंगलवार को आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। बैठक में मुख्यमंत्री के रुख और सोमवार को हुए घटनाक्रम पर चर्चा की जाएगी। साथ ही यह तय किया जाएगा कि हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता लंबे समय से क्षेत्र में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने की मांग करते रहे हैं। आंदोलन के दौरान न्यायिक कार्य से विरत रहने से लेकर विभिन्न स्तरों पर सरकार और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मांग उठाई जाती रही है। अब मुख्यमंत्री के स्पष्ट बयान के बाद संघर्ष समिति के सामने आंदोलन को नए सिरे से धार देने की चुनौती है। सुबह की उम्मीद, शाम तक हुई चकनाचूर मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे अधिवक्ताओं को पुलिस ने रोका, बस को घेरने के बाद नोकझोंक और हंगामा हो गया। किसी तरह अफसर मानें और मुलाकात का भरोसा दिलाया। दोपहर में प्रतिनिधिमंडल सुभारती यूनिवर्सिटी भी पहुंच गया लेकिन शाम होते होते सारी उम्मीदों को झटका लग गया। इसी के चलते मंगलवार को आपात बैठक बुलाई गई है। भाजपा जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार का ऐलान हाईकोर्ट बैंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति को मुख्यमंत्री से निराशा हाथ लगने के बाद बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। संघर्ष समिति ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। बैंच नहीं तो वोट नहीं का बैनर जारी किया गया है, जिसमें मेरठ कचहरी प्रांगण में भाजपा सांसद, विधायक और पदाधिकारियों का प्रवेश निषेध किया गया है।
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