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    पश्चिमी बंगाल के चुनाव नतीजों पर संतों ने जताई खुशी:स्वामी नरेंद्रानंद बोले- मतदाताओं ने बढ़ाई लोकतंत्र की ताकत, घुसपैठ पर सख्ती जरूरी

    3 hours ago

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    पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों को लेकर देशभर में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये नतीजे जनता की जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में मतदाता पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो चुका है और स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहा है। उनके मुताबिक, इस बार का उच्च मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत है कि लोगों का लोकतंत्र में विश्वास और उत्साह दोनों बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले चुनावों में दबाव और अनियमितताओं के आरोप लगते थे, लेकिन इस बार चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों की सक्रियता से लोगों को निर्भय होकर मतदान करने का मौका मिला। हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों को “साम, दाम, दंड, भेद” जैसी रणनीतियों से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार, जीत और हार लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है और हार के बाद आरोप लगाना विपक्ष की पुरानी प्रवृत्ति रही है। सीमा से घुसपैठ रोकना जरूरी सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बंगाल के रास्ते अवैध प्रवासन एक गंभीर समस्या है और इस पर सख्त नियंत्रण जरूरी है। उनके मुताबिक, इससे स्थानीय संसाधनों पर दबाव पड़ता है और गरीब वर्ग के अधिकार प्रभावित होते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने के प्रयासों का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर पर्याप्त सहयोग न करने का आरोप भी लगाया। समाज को जोड़ने का काम करता है ब्राह्मण वर्ग? नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि जब समाज संगठित होता है, तब सकारात्मक परिवर्तन संभव होते हैं। उन्होंने कहा कि जो शक्तियां धर्म और परंपरा के विरुद्ध काम करती हैं, वे अंततः कमजोर पड़ जाती हैं। तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने एम.के. स्टालिन के पुराने बयानों की आलोचना की और कहा कि धर्म के प्रति नकारात्मक सोच समाज में विभाजन पैदा कर सकती है। ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार इस वर्ग का विरोध हुआ है, लेकिन इसे एक विचारधारा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य समाज का कल्याण है, न कि किसी विशेष जाति या वर्ग का हित।
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