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    प्रयागराज में पं.धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान:राजपीठ के लोग हों या संतों की पीठ के, विवाद नहीं संवाद करें ताकि सनातन की हंसी न हो

    3 hours ago

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    प्रयागराज में आयोजित हनुमंत कथा के पहले दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान पिछले दिनों हुए शंकराचार्य विवाद को लेकर उन्होंने बड़ी बात कही। कहा, चाहे वह राजपीठ के लोग हों, चाहे शंकराचार्य या संतों की पीठ के लोग, हम दोनों से प्रार्थना करेंगे कि आपस में सामंजस्य स्थापित कर संवाद का रास्ता चुनें, ताकि दूसरे मजहब के लोग हंसी न उड़ाएं। शंकराचार्य विवाद और उन पर दर्ज मुकदमों पर बिना नाम लिए उन्होंने कहा, हमें उस मामले की सत्यता का किंचित मात्र भी पता नहीं है, पर हम यही कहेंगे कि संतों को आपस में विवाद नहीं, संवाद करना चाहिए, ताकि सनातन की हंसी ना हो, अपने धर्म का उपहास ना हो। जब तीन नदियां एक हो सकती हैं तो हिंदू क्यों नहीं हिंदुओं में एकता नहीं है और हमारा यही सबसे बड़ा दुर्भाग्य और दुख है। इसी के लिए हम प्रयत्न कर रहे हैं। तीन दिन की कथा हिंदू एकता की है, त्रिवेणी संगम में सब एक हो रहे हैं। जब तीन नदियां एक हो सकती हैं, तो हम हिंदू भी एक हो सकते हैं। लेंसकार्ट विवाद पर बोले लेंसकार्ट विवाद पर उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों को भारत में रहने की अनुमति नहीं होनी चाहिए, उनको विदेशों में रहने की अनुमति होनी चाहिए। हमारे जितने भी तीर्थ देवालय हैं, वहां पर मुसलमान भी दुकान खोले हैं, वहां मुसलमान भी व्यापार कर रहे हैं। हमारी कथा में भी हो सकता है कई लोगों की आस-पास दुकानें हों, काशी में तो है हीं, है देने वाला कौन-हिंदू, तीर्थों में जाने वाला कौन-हिंदू? जब हम यह भेद नहीं करते तो कोई दूसरा कैसे कर सकता है। ऐसा करेंगे तो आने वाले दिनों में आपस का मतभेद भारत में बहुत बढ़ेगा। उससे भारत की स्थिति विचित्र होगी। हम उनसे यही कहेंगे कि सुधर जाओ, नहीं तो आने वाले दिनों में सुधर भी जाओगे, भारत का कानून छोड़ेगा नहीं। महाराष्ट्र का कानून बहुत अच्छा है और वहां के हमारे मुख्यमंत्री बहुत ही प्रिय, देवेंद्र फडणवीस वैचारिक रूप से अपनी परंपरा को बहुत प्रबलता से मानते हैं और जल्दी ही हमें भरोसा है कि वह इस पर कठोर कार्रवाई करेंगे। यदि मजहब को आगे लाया जाएगा तो देश की स्थिति-परिस्थिति बिगड़ जाएगी। यह हुआ तो हम हिंदुओं से भी अपील करेंगे कि अपनी-अपनी कंपनियों में सिर्फ हिंदुओं को ही काम… आप बताएं, क्या यह सही होगा? ईरान-इजरायल युद्ध पर बयान उन्होंने ईरान और इजरायल के बीच युद्ध को लेकर कहा, देखिए वैश्विक रूप से, तालाब में पत्थर फेंको या डायमंड, तरंग दोनों से उठती है। उसी प्रकार विश्व में कहीं पर भी युद्ध होगा, उसका स्पंदन हर-हर देश को होगा, तो भारत को भी होगा। हम जोड़ने की बात करते हैं तोड़ने की नहीं यूजीसी के नए रेगुलेशन पर उन्होंने कहा, “आप क्या सुनना चाह रहे हैं? हम देश में जोड़ने की बात करते हैं, तोड़ने की बात नहीं करते हैं। हमारा यही उद्देश्य है कि सरकार नीति, विधाएं और संविधान की पद्धति जो है, समान-समानता वाली हो। हम चाहते हैं कि हमें जातियों में ना बांटा जाए, हमको भारतीय रखा जाए।” माताओं के लिए जो भी पहल हो, उसे सपोर्ट करें नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पास न होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “देखिए यह तो राजनीतिक विषय है और राजनीति के विषय पर हम बोलते नहीं, पर मातृ धर्म पर हमारा इतना कहना है, जिस देश में जयकारा भी मातृ नाम से लिया जाए, भारत माता की, जहां गाय भी माता हो, गंगा भी माता हो, गायत्री भी माता हो, उस देश में माताओं की पूजा होनी ही चाहिए। जितने अधिकार माताओं को मिल सकें, वह माताओं के हित के लिए हैं। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’, हमारे शास्त्रों का यह सिद्धांत है। हमें लगता है माताओं की यदि सेवा होगी, पूजा होगी, उनके लिए कोई भी लॉ, कानून, आरक्षण बनता है तो इस देश के प्रत्येक पुरुष, प्रत्येक पार्टी, प्रत्येक व्यक्ति का...जो-जो अपनी माताओं के पुत्र हैं, उनको सपोर्ट करना चाहिए।” राष्ट्रवाद और एकता पर जोर उन्होंने कहा, देखिए...धर्म, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद होना चाहिए, लेकिन अपनी परंपराओं को भी मानना चाहिए। जैसे हम सनातन परंपरा को मानते हैं, उसका मतलब यह नहीं कि हम किसी को मारें। हमें व्यवहार से, आचरण से, वाणी से लोगों को जोड़ना चाहिए। हमें जातियों में नहीं, क्षेत्रों में नहीं, भाषाओं में नहीं एक तिरंगे के नीचे रहने की विचारधारा को स्थापित करना चाहिए। हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए निकालेंगे रथ यात्रा उन्होंने कहा, भारत हिंदू राष्ट्र होगा, उसके लिए प्रयत्न जारी है और 4 जुलाई को हम फिर से घोषणा करने वाले हैं। आगामी दिनों में रथ यात्रा की घोषणा की जाएगी। कहां निकलेगी, कब निकलेगी...यह उसी दिन बताएंगे और इस यात्रा के माध्यम से भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रयास जारी रहेगा। गोरक्षक नहीं गोसेवकों की जरूरत गोरक्षक नहीं अभी उत्तर प्रदेश में गोसेवकों की आवश्यकता है। गोरक्षक से ज्यादा गोमाता को हम लोग पूजते हैं, मानते हैं। देश में गोमाता को बचाना है तो केवल गोशाला नहीं, उपाय चाहिए।
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