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    पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी हाउस अरेस्ट:देवरिया बरहज आंदोलन से पहले सपा नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई

    10 hours ago

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    देवरिया जिले के बरहज तहसील में प्रस्तावित समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदर्शन से पहले पुलिस प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कुशीनगर में पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को उनके पिपरा झाम स्थित आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इसके अतिरिक्त, देवरिया में सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव सहित कई अन्य नेताओं को भी आधी रात को उनके घरों में नजरबंद किया गया। यह कार्रवाई बरहज तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की मौत के मामले से जुड़ी है। समाजवादी पार्टी ने इस मामले को लेकर 30 अप्रैल को तहसील घेराव का ऐलान किया था। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए नेताओं को घरों से बाहर निकलने से रोका है। अधिकारियों के अनुसार, जनपद में निषेधाज्ञा लागू है, जिसके कारण किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस टीम रात करीब 12 बजे सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव के आवास पर पहुंची और उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया। उनके आवास पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बरहज तहसील परिसर में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी ने अपनी नजरबंदी को लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है और यह अधिनायकवाद की शुरुआत है। वहीं, व्यास यादव ने इसे "आवाज दबाने की साजिश" करार देते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता अन्याय के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने जिले में बढ़ते अपराधों और निर्दोषों पर दर्ज मुकदमों के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने का आरोप लगाया। क्या है पूरा मामला 5 अप्रैल को लक्ष्मीपुर गांव में जमीन की पैमाइश के दौरान अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि एसडीएम से कहासुनी और कथित अभद्रता के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया, जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं एक अन्य पक्ष के अनुसार जमीन विवाद के दौरान धक्का-मुक्की में वह घायल हुए थे। मृतक के बेटे की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान राजेश यादव समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। इस घटना के विरोध में सपा ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए बरहज तहसील घेराव का ऐलान किया था। हालांकि प्रशासन ने इसे अनुमति नहीं दी और एहतियातन नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया। प्रशासन का पक्ष वही अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। निषेधाज्ञा लागू होने के चलते किसी भी तरह की भीड़ या प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। हाउस अरेस्ट की कार्रवाई के बाद जिले में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। सपा इसे लोकतंत्र का दमन बता रही है, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहा है।
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