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    National Award विजेता डायरेक्टर Bharathiraja का निधन, CM Vijay ने की राजकीय सम्मान के साथ विदाई की घोषणा

    14 hours ago

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    दिग्गज तमिल फिल्म निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक भारतीराजा का बुधवार को आयु संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा, विशेषकर तमिल फिल्म उद्योग ने एक ऐसे फिल्मकार को खो दिया जिसने तमिल सिनेमा को स्टूडियो की सीमाओं से निकालकर गांवों और वास्तविक परिवेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने पीछे समृद्ध सिनेमाई विरासत छोड़ गए। परिवार के सूत्रों के अनुसार, पद्मश्री से सम्मानित 84 वर्षीय भारतीराजा का निधन उनके चेन्नई स्थित आवास पर हुआ। वह कुछ समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके परिवार में पत्नी चंद्रलीला और बेटी जननी हैं। खुद तमिल सिनेमा के बड़े सितारे रहे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, दिग्गज अभिनेता रजनीकांत और कमल हासन सहित अनेक फिल्मी हस्तियां निर्देशक पी. भारतीराजा के आवास पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रजनीकांत और कमल हासन ने भारतीराजा के साथ उनकी सुपरहिट पहली फिल्म ‘16 वयाथिनिले’ समेत कई फिल्मों में काम किया था। इसके अलावा द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन सहित कई नेताओं ने भी भारतीराजा को श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अपने शोक संदेश में कहा कि वह ‘‘महान फिल्मकार भारतीराजा के निधन से बहुत दुखी हैं। वह एक सच्चे अग्रदूत थे, जिन्होंने अपनी अनूठी कहानी कहने की शैली और ग्रामीण जीवन के गहन चित्रण के जरिए तमिल सिनेमा को नयी दिशा दी।’’ मुख्यमंत्री विजय ने एक बयान में कहा, ‘‘तमिल फिल्म निर्देशक भारतीराजा के निधन का समाचार सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर फिल्मों में जीवन और यथार्थ का सशक्त चित्रण करने वाले भारतीराजा ने अपनी अनेक सफल फिल्मों के माध्यम से तमिल सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी। उनके योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री सहित कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त हुए।’’ मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सिनेमा जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए इस दिग्गज फिल्मकार को राजकीय सम्मान प्रदान किया जाएगा। स्टालिन ने अपने संदेश में भारतीराजा के निधन को तमिल सिनेमा के लिए ‘‘बहुत बड़ी क्षति’’ बताया। वहीं, अन्ना द्रमुक महासचिव ई के पलानीस्वामी ने कहा, ‘‘दक्षिण तमिलनाडु की धरती से निकलकर तमिल सिनेमा को नयी दिशा देने वाले इस महान कलाकार ने कैमरे का रुख गांवों की ओर मोड़ा और फिल्मी दुनिया को मिट्टी की सुगंध और उसकी आत्मा से भर दिया।’’ भारतीराजा को कहानी के चयन और उसके अनूठे प्रस्तुतीकरण के लिए पथप्रदर्शक माना गया। वह मुख्य रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि की कहानियों के लिए जाने जाने थे। अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भारतीराजा को 1977 में उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘16 वायाथिनिले’ से प्रसिद्धि मिली थी। इसके साथ ही उन्होंने मशहूर संगीतकार इलैयाराजा के साथ भी काम किया था तथा फिल्म के गाने खासकर ‘‘सेंथूरापूवे’’ ने धूम मचा दी थी। इस फिल्म में अभिनेता कमल हासन और श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थे जबकि सुपरस्टार रजनीकांत ने खलनायक का किरदार निभाया था। इस फिल्म ने लंबे समय तक बॉक्स ऑफिस पर राज किया था और आज भी इसे बेहतरीन तमिल फिल्मों में से एक गिना जाता है। एक फिल्मकार के रूप में भारतीराजा ने स्टूडियो तक सीमित फिल्म निर्माण की परंपरा को तोड़ते हुए तमिल सिनेमा में ग्रामीण जीवन की सादगी और यथार्थ को जीवंत रूप से पर्दे पर उतारा। उन्हें प्यार से ‘‘इयक्कुनर इमयम’’ कहा जाता था, जिसका सामान्य मतलब ‘‘निर्देशक जगत का शिखर पुरुष’’ होता है। परिवार के करीबी लोगों के अनुसार, मार्च 2025 में उनके पुत्र एवं अभिनेता-निर्देशक मनोज भारतीराजा के अचानक निधन के बाद लगे गहरे भावनात्मक आघात से उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी। 17 जुलाई 1941 को तमिलनाडु के थेनी जिले के अल्लीनगरम में चिन्नासामी के रूप में जन्मे भारतीराजा ने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिशा ही बदल दी। 1970 के दशक के उत्तरार्ध में उनके आगमन से पहले तमिल सिनेमा मुख्य रूप से स्टूडियो सेट्स, अत्यधिक नाटकीय मेलोड्रामा और शहरी कथानकों तक सीमित था। भारतीराजा ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘‘16 वयाथिनिले’’ (16 वर्ष की आयु में) के साथ इस स्थापित ढांचे को तोड़ दिया। उन्होंने कैमरों को स्टूडियो से निकालकर वास्तविक गांवों की धूलभरी, धूप से भरी पगडंडियों तक पहुंचाया और मुख्यधारा के दर्शकों को ग्रामीण जीवन की सादगी और वास्तविकता से परिचित कराया। युवा कमल हासन, रजनीकांत और श्रीदेवी अभिनीत यह फिल्म सांस्कृतिक घटना बन गई और इसने व्यावसायिक सिनेमा की नयी गढ़ी। करीब पांच दशकों के अपने शानदार करियर में भारतीराजा ने तमिल, तेलुगु और हिंदी भाषाओं में 40 से अधिक फीचर फिल्मों का निर्देशन किया। उन्होंने ग्रामीण नाटकों से लेकर मनोवैज्ञानिक थ्रिलर तक विभिन्न शैलियों में अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी उल्लेखनीय तमिल फिल्मों में ‘सिगप्पु रोजाक्कल’ (1978) शामिल है, जो एक परिष्कृत और प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक थ्रिलर थी और जिसने उनकी ग्रामीण फिल्मों की छवि को तोड़ा। ‘अलैगल ओइवथिल्लै’ (1981) जाति और धार्मिक बाधाओं पर आधारित एक संवेदनशील प्रेम कहानी थी, जिसे व्यापक सराहना मिली। ‘मुधल मरियाथै’ (1985) महान अभिनेता शिवाजी गणेशन अभिनीत प्लेटोनिक प्रेम पर आधारित एक उत्कृष्ट और परिपक्व फिल्म थी। वहीं करुथम्मा (1994) कन्या भ्रूण हत्या और बालिका हत्या जैसी सामाजिक बुराई पर तीखा प्रहार करने वाली फिल्म थी। कैमरे के पीछे अपनी तकनीकी दक्षता के अलावा भारतीराजा को फिल्म उद्योग में एक महान ‘‘स्टार मेकर’’ के रूप में भी जाना जाता था। उनमें नयी प्रतिभाओं को पहचानने की अद्भुत क्षमता थी और उन्होंने कलाकारों की ऐसी पीढ़ी तैयार की जिसने आगे चलकर भारतीय सिनेमा को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एक दिलचस्प और कुछ हद तक अंधविश्वास से जुड़ी परंपरा के तहत वह अक्सर अपने प्रमुख कलाकारों के नाम अंग्रेजी अक्षर ‘‘आर’’ से शुरू होने वाले रखते थे। इसी अनूठी परंपरा के माध्यम से उन्होंने राधिका, रेवती, राधा और रेखा जैसी प्रसिद्ध अभिनेत्रियों को पहचान दिलाई। उन्होंने कार्तिक और पांडियन जैसे अभिनेताओं के साथ-साथ कई प्रसिद्ध तकनीशियनों, हास्य कलाकारों और चरित्र अभिनेताओं के करियर को भी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने करियर के उत्तरार्ध में भारतीराजा ने सहजता से कैमरे के पीछे से सामने आने तक का सफर तय किया और खुद को एक प्रभावशाली चरित्र अभिनेता के रूप में स्थापित किया। पर्दे पर उनकी दमदार उपस्थिति और विशिष्ट संवाद अदायगी ने नयी पीढ़ी के दर्शकों और समीक्षकों का भी दिल जीत लिया। उन्होंने मणिरत्नम की राजनीतिक ड्रामा फिल्म आयुधा एझुथु (2004) में एक चतुर राजनेता की भूमिका निभाकर यादगार अभिनय किया। इसके अलावा पांडियानाडु (2013) और सुपरहिट फिल्म थिरुचित्राम्बलम (2022) में भी उनके अभिनय को खूब सराहा गया। उनकी अभिनय प्रतिभा उनकी अंतिम फिल्मों में भी देखने को मिली, जिनमें हाल की ब्लॉकबस्टर थ्रिलर महाराजा और सुपरस्टार मोहनलाल अभिनीत मलयालम फिल्म थुडरुम शामिल हैं। फिल्म जगत के वरिष्ठ लोगों ने उनके निधन को भारतीय सिनेमा के एक स्वर्णिम युग के अंत के रूप में वर्णित किया है। उनके अंतिम संस्कार और अन्य अंत्येष्टि संबंधी कार्यक्रमों की घोषणा परिवार द्वारा आज बाद में किए जाने की संभावना है।
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