Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    नक्सलियों ने किडनैप किया, सच्चाई जानकर खाना खिलाया,पैसे भी दिए:कमर में इंजरी ने क्रिकेटर बनने का सपना तोड़ा, 20 हजार किमी की पैदल यात्रा की

    1 hour ago

    1

    0

    कमर में हुई इंजरी ने क्रिकेटर बनने का सपना तोड़ दिया। योग की मदद से ठीक हुए तो सभी को जागरूक कपने का संकल्प लिया। इसके लिए पैदल यात्रा पर निकल पड़े। ये हैं मैसूर (कर्नाटक) के रहने वाले 32 साल के कृष्णा नायक। अपनी यात्रा के दौरान ये जयपुर पहुंचे हैं। कृष्णा नायक ने बताया कि 16 अक्टूबर 2022 को मैसूर से पैदल यात्रा शुरू की थी। तीन साल से ज्यादा समय में करीब 20 हजार किलोमीटर चलकर नेपाल और भूटान समेत भारत के 25 राज्यों तक पहुंच चुका हूं। इस दौरान छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने किडनैप भी किया। हकीकत सामने आई तो प्यार से खाना खिलाया, पैसे भी दिए। आगे पढ़िए कृष्णा नायक से पूरी बातचीत… सवाल - योग के प्रति आम जनता को जागरूक करने का यह सफर कहां से और कब शुरू किया? कृष्णा नायक - 16 अक्टूबर साल 2022 को मैं मैसूर से अपनी इस योग यात्रा की शुरुआत की थी। भारत के साथ मैं नेपाल और भूटान में भी आम जनता को योग के प्रति जागरूक करने के लिए यात्रा की है। अब तक मैं 1251 दिनों की यात्रा को पूरा कर चुका हूं। इस दौरान मैं नेपाल और भूटान की यात्रा पूरी कर ली है। फिलहाल में भारत के 25वें राज्य में प्रवेश कर यहां के अलग-अलग शहरों में आम जनता को योग के प्रति जागरूक कर रहा हूं। इस दौरान में अब तक लगभग 20 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुका हूं। मैं चाहता हूं कि भारत में बच्चा-बच्चा और यूथ यह जाने की योग कितना महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ में देश के स्कूल-कॉलेज में पहुंच उन्हें योग की जानकारी देता हूं। सवाल - तीन देशों की यात्रा करने से पहले आपको बैक इंजरी हुई थी। ऐसे वक्त में यात्रा करने की सोच कैसे आई? कृष्णा नायक - योग पथ पर आने से पहले मैं बतौर क्रिकेटर अपने जीवन को जी रहा था। अचानक मेरी पीठ में इंजरी हो गई। इसकी वजह से मैं ठीक ढंग से खड़ा तक नहीं हो पा रहा था। उस वक्त न मैं क्रिकेट खेल पा रहा था, न ठीक ढंग से उठ और सो पा रहा था। उस वक्त मैं योग के माध्यम से न सिर्फ अपनी इंजरी को ठीक किया, बल्कि खुद को और बेहतर और स्वस्थ भी महसूस किया। इसके बाद मुझे योग ने अपनी ओर बहुत ज्यादा आकर्षित किया। लोग मुझे बोलते थे कि मुझे योग की वजह से नया जीवन मिला है। इसके बाद मैंने अलग-अलग तरह के योग अभ्यास सीखे और यूथ को ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया था। सवाल - 20 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा के दौरान किस तरह की समस्या का सामना करना पड़ा। छत्तीसगढ़ में आपको नक्सलियों ने भी पकड़ लिया था? कृष्णा नायक - मैंने अपनी यात्रा की शुरुआत मैसूर से की थी। इसके बाद केरला, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश को मैंने अच्छे से पार कर लिया था। जैसे ही मैंने छत्तीसगढ़ में एंट्री ली। उसके कुछ दिन बाद मैं वहां नक्सली क्षेत्र में पहुंचा था। वहां इंद्रावती नेशनल पार्क जो आज भी रेड अलर्ट एरिया है। उसके जंगल के बीच से गुजर रहा था। तभी कुछ नक्सलियों ने मुझे किडनैप कर लिया। वह लोग मुझे पकड़ के जंगल के बीच में ले गए। पूछताछ करने लगे। तब मुझे ठीक ढंग से हिंदी बोलना नहीं आता था। उन्हें ठीक ढंग से इंग्लिश समझ नहीं आ रही थी। मैं वहां काफी परेशान हो गया, रोने लगा। उन लोगों ने मुझे कहा सही-सही बताओ, यहां क्यों आए हो वरना तुम्हें जान से मार देंगे। आखिर में उन लोगों ने मेरे बारे में गूगल किया। लगभग 4 घंटे बाद उन्हें मेरी यात्रा की जानकारी मिली। तब उन्हें मुझ पर विश्वास हुआ। इसके बाद उन लोगों को मेरी सोच अच्छी लगी। उन्होंने न सिर्फ मुझे छोड़ा, बल्कि मुझे अच्छा खाना भी दिया। कुछ पैसे भी दिए। ताकि मैं अपने सफर को ठीक ढंग से पूरा कर सकूं। इसके बाद मणिपुर में भी मुझे इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ा। मैं तिरंगा लेकर अपनी पैदल यात्रा पर था। कुछ लोगों ने मुझे हिरासत में ले लिया। उन्होंने मुझे कहा कि यह भारत का हिस्सा नहीं है। उन लोगों ने मुझे काफी परेशान भी किया। इस तरह समस्याओं का सामना करना पड़ा। फिलहाल मेरी यात्रा भगवान की कृपा से जारी है। मैं देश की 800 से ज्यादा IIT-NIT और स्कूल-कॉलेज में जाकर हजारों बच्चों को योग के प्रति जागरूक कर चुका हूं। सवाल - लंबे वक्त से आप योग यात्रा पर हैं। आखिर आपको मोटिवेट और मदद कौन कर रहा है? जवाब - भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी जवागल श्रीनाथ सर ही मुझे सबसे ज्यादा सपोर्ट कर रहे हैं। उन्होंने ही मेरी यात्रा को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया था। वो ही मेरी यात्रा के सबसे बड़े मददगार हैं। मेरे सफर के दौरान मेरे खाने और पीने का सारा खर्चा वही उठा रहे हैं। उनके साथ परिवार और दोस्त मुझे सपोर्ट करते हैं। मुझे कर्नाटक गवर्नमेंट ने पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट भी दे रखा है। इसकी वजह से मैं जहां भी जाता हूं, वहां के स्कूल, कॉलेज, मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारे में मुझे रुकने दिया जाता है। मैं जंगल और पुलिस स्टेशन में भी रात बिता चुका हूं। सवाल - आपकी यात्रा कहां तक जाएगी और कब खत्म होगी? जवाब - नेपाल, भूटान के साथ ही भारत के 25 राज्यों की यात्रा को अब तक पूरा कर चुका हूं। फिलहाल मैं राजस्थान के बाद गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आखिर में चेन्नई पहुंचूंगा। लगभग 6 महीने का वक्त मुझे अभी अपनी यात्रा को पूरा करने में लगेगा। इसके बाद मैं चेन्नई में अपनी यात्रा का समापन करूंगा। सवाल - 3 साल से ज्यादा वक्त बीत गया है। क्या परिवार वालों से मुलाकात हुई। इस दौरान क्या कभी कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल किया? जवाब - मैं 100% पैदल यात्रा पर हूं। मेरे पास खुद का जीपीएस ट्रैकर है। फैमिली मेंबर्स से मेरी बात होती है। बीच में एक बार वह लोग मुझसे मिलने भी आए थे। मैं भी सब लोगों को मिस करता हूं। लेकिन पूरा देश मेरी फैमिली है। मैं चाहता हूं कि सभी स्वस्थ और तंदुरुस्त रहें। इसी सोच के साथ सबको जागरूक करने के लिए लगातार पैदल चल रहा हूं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    असम- मंत्री का टिकट कटा, भाजपा छोड़ कांग्रेस जॉइन की:केरल में भाजपा नेता के 'हिंदू विधायक' वाले बयान पर विवाद, चुनाव आयोग ने एक्शन लिया
    Next Article
    मंडी की गलियों से चमकते बॉलीवुड तक, जानें 4 नेशनल अवॉर्ड्स जीतने वाली कंगना रनौत का सफर

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment