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    नोएडा में फैक्ट्री मालिक बोले- श्रमिक हिंसा नहीं कर सकते:तोड़फोड़ करने वाले बाहरी थे; वर्कर्स ने कहा- गांव लौट जाएंगे

    2 hours ago

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    नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार-मंगलवार को हिंसा हुई। उपद्रवियों ने फैक्ट्रियों पर पथराव और तोड़फोड़ की। 80 से अधिक जगह पर उपद्रव हुआ। पुलिस ने हंगामा करने वालों के खिलाफ नोएडा के 7 थानों में FIR दर्ज कराई। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने 4 महिलाओं समेत 396 लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक, करीब 42 हजार कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल थे। अब सवाल यह उठता है कि यह हिंसा खुद श्रमिकों ने की या सुनियोजित साजिश थी। क्या कर्मचारी उन फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ कर सकते हैं, जिनमें वह काम करते हैं, जिससे उनकी रोजी रोटी चलती है। फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि श्रमिक ऐसा नहीं कर सकते। उन्हें या तो उकसाया गया या फिर उपद्रव करने वाले बाहरी लोग थे। पुलिस ने जब इस एंगल पर जांच शुरू की तो हकीकत सामने आने लगी। जांच में सामने आया कि 2 वाट्सएप ग्रुपों से श्रमिकों के मरने की अफवाह फैलाई गई, इससे आंदोलन उग्र हो गया। जांच में पता चला कि उपद्रव करने वाले पूरी तरह से ट्रेंड थे। इनका काम प्रदर्शनकारियों को उकसा कर हिंसा भड़काना होता है। इनमें छात्र, अधिवक्ता और अन्य पेशे से जुड़े लोग शामिल हैं। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया- इस मामले में हर एंगल से जांच की जा रही है। नक्सलवाद से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं। कुछ ऐसे ट्रेंड ग्रुप हैं, जो इस तरह की गतिविधि कर सकते हैं। इसकी भी जांच की जा रही है। क्या नोएडा हिंसा सुनियोजित थी? श्रमिकों का इस मामले में क्या कहना है? यूनियन का इस हिंसा को लेकर क्या पक्ष है? पढ़िए रिपोर्ट… नक्सलवाद से जुड़े लोगों के शामिल होने की जांच हो रही पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि कुछ संगठित समूह देशभर में सक्रिय हैं। जो ऐसे आंदोलनों में घुसकर माहौल को खराब करने का काम करते हैं। ये समूह प्रदर्शनकारियों को उकसाकर हिंसा भड़काने की कोशिश करते हैं। जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सके। इन समूहों में छात्र, अधिवक्ता और अन्य पेशे से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ये लोग ट्रेंड हैं। पुलिस नक्सलवाद से जुड़े लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने से भी इनकार नहीं कर रही है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कहीं इन गतिविधियों के पीछे किसी बड़े नेटवर्क की फंडिंग तो नहीं है। पुलिस सोशल मीडिया के 75 अकाउंट्स और वाट्सएप के 60 ग्रुप्स की जांच कर रही है। ऐसी आशंका है कि इन अकाउंट्स और ग्रुप्स के जरिए या तो भ्रामक जानकारी फैलाई गई या फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों को उकसाया गया। राजनीतिक दल से जुड़े सोशल मीडिया समन्वयक पर FIR नोएडा पुलिस कमिश्नर ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर गलत और भ्रामक सूचना देकर अफवाह फैलाने वालों में एक राजनीतिक दल का नामित सोशल मीडिया समन्वयक भी शामिल है। सेक्टर-20 थाने में समन्वयक मीर इलियास के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। केस मीडिया सेल के उपनिरीक्षक अनिल कुमार ने दर्ज कराया है। शिकायत के अनुसार, सोमवार को X (ट्विटर) पर दो अकाउंट्स से भड़काऊ पोस्ट की गईं। एक पोस्ट में एक राजनीतिक दल के सोशल मीडिया समन्वयक नामित मीर इलियास ने लिखा कि यूपी पुलिस की फायरिंग में 14 लोगों की मौत और 32 लोग घायल हुए हैं। वहीं, अनुषि तिवारी नाम के हैंडल से भी इसी तरह की पोस्ट शेयर की गई। जांच में सामने आया है कि दोनों अकाउंट्स का एक ही राजनीतिक पार्टी से संबंध हो सकता है। इन पोस्ट्स के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों में आक्रोश बढ़ गया, जिससे हालात बिगड़ गए। इसके बाद पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। श्रमिक बोले- महंगाई बढ़ी मगर सैलरी नहीं श्रमिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए। 300-400 रुपए में एक किलो गैस मिल रही है। बच्चों की पढ़ाई, कॉपी-किताबें महंगी हो गईं। घर का सामान भी महंगा हो गया। महंगाई बढ़ रही है। मगर हमारी सैलरी नहीं बढ़ रही। कम पैसे में घर चलाना मुश्किल है। हम तो शांति पूर्वक सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे थे। घटना के बाद कुछ श्रमिक अपने गांव लौट रहे हैं। दरअसल, उन्हें डर है कि वे पुलिस की कार्रवाई में न फंस जाएं। श्रमिकों ने बताया कि हम सोमवार को काम पर गए थे। इसी दौरान आंदोलन उग्र हो गया। हम वहां थे, लेकिन आंदोलन में शामिल नहीं थे। बावजूद इसके वो अपने घर जा रहे है। ट्रेड यूनियन क्या बोले, वो पढ़िए- आंदोलन से यूनियन का लेना-देना नहीं ऑल इंडिया सेंटर काउंसिल ट्रेड यूनियन के जिलाध्यक्ष अमर सिंह ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम से यूनियन का कोई लेना देना नहीं है। आंदोलन स्वतः श्रमिकों द्वारा किया गया था। इसमें यूनियन शामिल नहीं थी। फैक्ट्री है तो वर्कर हैं, इसलिए फैक्ट्रियां खुलेंगी। श्रमिक काम पर लौटेंगे। हिंसा किसने की? यह जांच का विषय है। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस की है। मौजूदा महंगाई को देखते हुए श्रमिकों की न्यूनतम सैलरी 20 हजार रुपए होनी चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। एनईए के अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बताया कि हमारी इंडस्ट्री में पहले भी श्रमिक काम कर रहे थे। आज भी करेंगे। वो ऐसे नहीं कि अपनी ही फैक्ट्री को तोड़ें। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन नोएडा के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहाटा ने बताया कि सेक्टर-1 से 6 तक इंडस्ट्री खुल रही है। बुधवार से सभी सेक्टरों की इंडस्ट्री फुल फ्लैश खुलेंगी। श्रमिकों को कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि जो ये घटना हुई है, वह निंदनीय है। अब जानिए नोएडा में हुए बवाल के बारे में नोएडा में सोमवार को फैक्ट्री कर्मचारियों ने हिंसक प्रदर्शन किया। 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में फैक्ट्रियों में पथराव, तोड़फोड़ की। कर्मचारियों ने कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और करीब 50 से ज्यादा फूंक दीं। पुलिस की गाड़ियां भी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने उन पर पथराव कर दिया। फिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कर्मचारियों का कहना था कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, वो रुकेंगे नहीं। पुलिस ने करीब 300 कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। 60 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। खास बात है कि इस प्रदर्शन का कोई चेहरा या लीडर नहीं था। 18 से 30 साल के युवा हिंसक प्रदर्शन कर रहे थे। नोएडा आंत्रप्रेन्योर एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन के मुताबिक करीब 350 से ज्यादा इंडस्ट्री में तोड़फोड़ और 150 वाहन तोड़े गए हैं। सबसे पहले हिंसा कहां और कैसे भड़की, वो जानिए- सबसे पहले फेज-2 इलाके में हालात खराब हुए। सुनवाई न होने से कर्मचारी उग्र हो गए। पथराव कर दिया। फेज-2 के बाद धीरे-धीरे प्रदर्शन नोएडा के करीब 10 इंडस्ट्रियल इलाकों और आसपास के जिलों में फैल गया। कर्मचारियों ने नोएडा सेक्टर-57 में 30 से ज्यादा फैक्ट्रियों और दफ्तरों में तोड़फोड़ की। सेक्टर- 40 और 60 में कंपनियों का घेराव किया। सेक्टर 85 में डिक्सन कंपनी का गेट तोड़ दिया। सेक्टर 1, 15, 62 और DND फ्लाइओवर के पास सड़क जाम कर दी। हालात को काबू करने के लिए कुछ इलाकों में RAF और PAC उतार दी गई। डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। ……………………….. ये खबर भी पढ़िए- नोएडा में दूसरे दिन भी बवाल, पुलिस से झड़प, पथराव:15 कंपनियों की फोर्स, 26 पुलिस अफसर भेजे; राहुल बोले- ये श्रमिकों की आखिरी चीख नोएडा, यानी गौतमबुद्ध नगर में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कर्मचारी मंगलवार को भी सड़कों पर उतर आए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो झड़प हो गई। भीड़ ने 2–3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया। हालांकि पुलिस ने थोड़ी देर में ही हालात पर काबू पा लिया। प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ दिया। फिलहाल, पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवान इंडस्ट्रियल इलाकों में सुबह 5 बजे से फ्लैग मार्च कर रहे हैं। CCTV और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा, पीएसी और RAF की 15 कंपनियां, 26 अफसर (8 एडिशनल एसपी और 18 डीएसपी) नोएडा भेजे गए हैं। आज ज्यादातर कंपनियां बंद हैं। पढ़ें पूरी खबर
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