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    नोएडा हिंसा के लिए महिलाओं को किया गया था ट्रैंड:फुटेज छिपाने के लिए दुप्पटे का प्रयोग, एसआईटी कर रही जांच

    4 hours ago

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    श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा मामले में जांच चल रही है। जिसमें नई जानकारी मिली है। आरोपियों की तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में कैद न हो इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया था। उनका काम था कि सीसीटीवी कैमरे के ऊपर दुपट्टा या कोई कपड़ा डालना। पुलिस को ऐसी कई फुटेज और वीडियो मिली है जिसमें महिलाएं कैमरे के ऊपर कपड़ा डाल रही हैं। या कैमरा तोड़ रही है। दावा है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में विरोध प्रदर्शन के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश को बदनाम करने की साजिश थी। हिंसा में दर्ज मुकदमों की जांच कर रही एसआईटी हिंसक प्रदर्शन के दौरान जितने भी मुकदमे दर्ज हुए हैं उसके लिए जिला पुलिस की ओर से एक एसआईटी गठित की गई है। इसमें एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। दर्ज मुकदमे एसआईटी के पास आते हैं और यहां से उसके आगे का प्रारूप तैयार किया जाता है। अभी तक जिन आरोपियों को चिन्हित किया गया है उनकी गिरफ्तारी के लिए स्वॉट, सीआरटी समेत छह टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। युवतियों से पूछताछ जारी आरोपी रूपेश राय के कोर ग्रुप की सदस्य मनीषा, आकृति और सृष्टि गुप्ता को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लाकर पुलिस ने पूछताछ शुरु की। प्रदर्शन में युवतियों की भूमिका समेत अन्य पहलुओं पर पुलिस ने पूछताछ की। सवालों की सूची पीसीआर के लिए याचिका लगाने के बाद ही तैयार कर ली गई थी। युवतियों के आदित्य आनंद से संबंध पर भी पुलिस ने जानकारी जुटाई। 24 अप्रैल को होगी कस्टडी पर सुनवाई यह भी पता चला है कि मजदूर बिगुल संगठन श्रमिकों को भड़काने के लिए अपने आनलाइन पोर्टल व वेबसाइट का भी दुरुपयोग करता था। इसके जरिए श्रमिकों को भड़काने का काम किया जाता था ।वहीं मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद की पुलिस कस्टडी रिमांड पर 24 अप्रैल को सुनवाई होगी। पुलिस ने आदित्य की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। गूगल से मांगी जानकारी आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल और लैपटॉप की जांच जारी है। कुछ संवेदनशील डाटा के लिए जिला पुलिस ने गूगल प्रबंधन से भी संपर्क साधा है। पुलिस के मेल का जवाब अभी तक नहीं आया है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही प्रबंधन से जवाब आएगा। इसके बाद जांच में कई और तथ्य सामने निकलकर आएंगे।
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