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    मायावती के दरवाजे से लौटे राजेंद्र पाल यूपी-कांग्रेस प्रभारी बने:अविनाश पांडेय की छुट्‌टी; प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी हटाए जा सकते हैं

    1 day ago

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    कांग्रेस ने शुक्रवार शाम यूपी के प्रभारी अविनाश पांडेय को उनके पद से हटा दिया। उनकी जगह राजेंद्र पाल गौतम को यूपी प्रभारी बनाया गया है। वे 19 मई को बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया के साथ अचानक बिना अपॉइंटमेंट लिए बसपा प्रमुख मायावती से मिलने पहुंचे थे। ऐसे में उन्हें बिना मिले वापस लौटना पड़ा था। राजेंद्र पाल दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे हैं। सितंबर, 2024 में आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। सूत्रों का दावा है कि पार्टी जल्द ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को भी उनके पद से हटा सकती है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस किसी ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) या मुस्लिम चेहरे को यूपी की कमान सौंप सकती है। इमरान मसूद और राकेश राठौर यूपी अध्यक्ष की रेस में सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों यूपी के कांग्रेस सांसदों ने दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात की थी। इस दौरान सांसदों ने इमरान मसूद और राकेश राठौर में से किसी एक को यूपी का अध्यक्ष बनाने की मांग की थी। इमरान मसूद वेस्ट यूपी की सहारनपुर सीट से सांसद हैं। वे वेस्ट यूपी के कद्दावर मुस्लिम नेता हैं। इन्हें अध्यक्ष बनाकर पार्टी मुस्लिम वोटबैंक को पूरी तरह अपने पाले में बनाए रखना चाहती है। वहीं, राकेश राठौर सीतापुर से सांसद हैं। ओबीसी वर्ग से आने वाले बड़े नेता हैं। इन्हें जिम्मेदारी देकर राहुल गांधी की 'पिछड़ा राजनीति' और जातिगत जनगणना के नैरेटिव को जमीन पर मजबूत किया जा सकता है। अजय राय 3 साल से यूपी अध्यक्ष अजय राय को 17 अगस्त, 2023 को बृजलाल खाबरी की जगह यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। आने वाले अगस्त में उनका 3 साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। अजय राय बेहद सक्रिय नेता माने जाते हैं। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर दी थी, जिससे उनका सियासी कद काफी बढ़ गया था। अजय राय भूमिहार समाज से आते हैं, जिसकी आबादी यूपी में बहुत कम है। साथ ही भूमिहार वोटबैंक को भाजपा के फेवर में माना जाता है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव के जातीय समीकरण साधने के लिए किसी अल्पसंख्यक या ओबीसी चेहरे को यूपी कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है। सोशल इंजीनियरिंग साधने की कवायद पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यूपी कांग्रेस में फेरबदल का फैसला आगामी विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए लिया गया है। अभी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी अविनाश पांडेय दोनों ही सवर्ण जाति से हैं। जबकि राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना और 'जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' का मुद्दा उठा रहे हैं। ऐसे में यूपी जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में दोनों शीर्ष पदों पर सवर्णों का होना पार्टी की इस रणनीति के अनुकूल नहीं बैठ रहा था। 2027 की लड़ाई मजबूती से लड़ने के लिए कांग्रेस अब यूपी प्रभारी के रूप में दलित चेहरे को लाकर राज्य के दलितों को आकर्षित करना चाहती है। जानिए कौन हैं राजेंद्र पाल गौतम कांशीराम जंयती कार्यक्रम से राहुल के नजर में आए राजेंद्र कांग्रेस ने इस बार कांशीराम जयंती (13 मार्च) 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' के रूप में मनाई थी। पार्टी ने इस दिन लखनऊ में बड़ा कार्यक्रम किया था। राहुल गांधी इसमें मुख्य अतिथि थे। उस आयोजन के पीछे राजेंद्र पाल गौतम ही थे। तब से वे राहुल गांधी की नजर में आ गए थे। राहुल ने मंच से राजेंद्र की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने समस्या के साथ समाधान भी बताया है। अब राजेंद्र की प्रदेश प्रभारी के तौर पर नियुक्ति को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। अब मायावती के दरवाजे से लौटने वाला घटनाक्रम जानिए… 10 मिनट इंतजार करते रहे, मोबाइल नंबर लिखवाकर वापस आए लखनऊ में कांग्रेस मुख्यालय पर 19 मई को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की बैठक हुई थी। इसके बाद विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया समेत अन्य नेता अचानक मायावती के घर पहुंचे थे। गेट पर सिक्योरिटी गार्ड से मायावती के निजी सचिव मेवालाल गौतम को फोन करके मायावती से मिलने का समय मांगा था। सूत्रों की मानें तो करीब 10 मिनट तक कांग्रेस नेता गेट पर इंतजार करते रहे। फिर अंदर से मैसेज आया कि बहनजी (मायावती) बिजी हैं, अभी मीटिंग नहीं हो पाएगी। इसके बाद कांग्रेस नेता नाम और मोबाइल नंबर गेट पर लिखवाकर लौट गए थे। इसकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। तब इसके सियासी मायने निकाले जाने लगे थे। खबर फैली कि कांग्रेस यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को छोड़कर बसपा के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। 19 मई को राहुल गांधी भी रायबरेली में थे। ऐसे में सीधे दावा किया गया कि ये नेता उनका कोई संदेश लेकर मायावती से मिलना चाहते थे। कांग्रेस को करना पड़ा था डैमेज कंट्रोल मायावती के घर से खाली हाथ लौटने के बाद कांग्रेस को डैमेज कंट्रोल करना पड़ा था। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 20 मई को सफाई देते हुए कहा था- यह उन नेताओं का पर्सनल कार्यक्रम था। पार्टी की ओर से कोई ऑफिशियल आदेश नहीं दिया गया था। वहीं, राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि मायावती दलित समाज की पूर्व मुख्यमंत्री हैं। इसलिए उनका हालचाल जानने के लिए वह मुलाकात करने गए थे। बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया ने भी इसे ‘जनरल विजिट’ बताया था। उन्होंने कहा था कि बहनजी हमारे समाज की सीनियर नेता हैं। उनकी उम्र 70 साल की हो चुकी है। हम उनकी तबीयत पूछने गए थे। ----------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… राम मंदिर चढ़ावा चोरी- ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का इस्तीफा:ट्रस्टी अनिल मिश्रा की छुट्टी; 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