Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    बिना सदस्यता BJP प्रदेश उपाध्यक्ष कैसे बनीं पूजा पाल:पार्टी ने अपने कड़े नियम तोड़े; सपा के 7 बागियों को क्या-कुछ मिला?

    20 hours ago

    1

    0

    यूपी में भाजपा ने विधायक पूजा पाल को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा ने पूजा पाल के लिए अपने ही कड़े नियमों को ताक पर रख दिया? क्योंकि 14 अगस्त, 2025 को सपा से निष्कासित होने के बाद पूजा पाल की कभी भाजपा की सदस्यता लेते हुए तस्वीर सामने नहीं आई। दरअसल, भाजपा के संविधान के मुताबिक संगठन में कोई भी पदाधिकारी तभी बन सकता है, जब वह पार्टी का 'सक्रिय सदस्य' हो। सक्रिय सदस्य बनने के लिए कम से कम 100 सामान्य सदस्य बनाना अनिवार्य है। लेकिन, पूजा पाल को सपा से निकाले जाने के महज 10 महीने और 12 दिन बाद ही सीधे प्रदेश संगठन में इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई। पूजा पाल इस समय विधानसभा में संबद्ध विधायक हैं। मतलब- तकनीकी रूप से पूजा पाल सदन में स्वतंत्र विधायक हैं। तो क्या उन्होंने भाजपा जॉइन की है? ये सवाल जब पूजा पाल से दैनिक भास्कर ने पूछा। तो उन्होंने कहा, ’मैं भाजपा की सदस्य बन चुकी हूं।' हालांकि, कब और कहां सदस्यता ली, इस पर उन्होंने स्थिति साफ नहीं की। मंत्री नहीं, पूजा की भाजपा संगठन में ‘पैराशूट एंट्री’ भाजपा में प्रदेश स्तर का पदाधिकारी बनने के लिए मूल कैडर के कार्यकर्ताओं को सालों तक मंडल, जिला और क्षेत्र की टीमों में जमीन पर काम करना पड़ता है। इसके लिए देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह का उदाहरण ले सकते हैं। वो पिछले एक दशक से लखनऊ में भाजपा संगठन के लिए जमीन पर पसीना बहा रहे हैं। बड़े अभियानों को सफल बनाने के बाद उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष का पद मिला। दूसरी तरफ पूजा पाल को सपा से औपचारिक निष्कासन के 11 महीने भी पूरे नहीं हुए थे कि उन्हें सीधे उपाध्यक्ष की कुर्सी दे दी गई। सूत्र कहते हैं, योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के वक्त कयास लगाया जा रहा था कि पूजा पाल को मंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन, भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की तरफ से निर्णय के बाद पूजा को मंत्री नहीं बनाया गया। सदस्यता कब ली, इसका सटीक जवाब नहीं पूजा पाल की सदस्यता को लेकर हमने कौशांबी के भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य से बात की। वह कहते हैं, ’पूजा पाल कौशांबी से भाजपा की सदस्य नहीं बनी हैं। वह प्रदेश कार्यालय स्तर पर ही सदस्य बनी होंगी, इस बारे में प्रदेश मुख्यालय ही बता सकता है।’ लखनऊ में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह कहते हैं, ’पूजा पाल भाजपा की सदस्य हैं, इसीलिए उन्हें पदाधिकारी बनाया गया है। कई बार जॉइनिंग की फोटो जारी होती है और कई बार नहीं होती।’ भाजपा 2 बड़े सियासी संदेश दे रही 1. सपा के 'माफियाराज' से पीड़ित चेहरा बनाना पूजा पाल यूपी की राजनीति में सपा के कथित 'गुंडाराज' की पीड़ित रहने का सबसे बड़ा और जीवित उदाहरण हैं। 25 जनवरी, 2005 को शादी के महज 10 दिन बाद उनके पति और तत्कालीन विधायक राजू पाल की अतीक अहमद के गुर्गों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद 24 फरवरी, 2023 को उनके ममेरे भाई उमेश पाल को भी सरेआम मार दिया गया। विधानसभा चुनाव में भाजपा पूजा पाल को आगे कर जनता को याद दिलाएगी कि कैसे सपा समर्थित माफियाओं ने एक महिला को प्रताड़ित किया। 2. यूपी के 'पाल' वोट बैंक पर नजर उत्तर प्रदेश में पाल बिरादरी का बड़ा वोट बैंक है, जिसे साधने के लिए विपक्षी दलों ने भी पूरी ताकत झोंक रखी है। वर्तमान में श्यामलाल पाल सपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं, तो विश्वनाथ पाल बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। विपक्ष की इसी घेराबंदी को तोड़ने के लिए भाजपा ने यह दांव चले हैं- राज्यसभा चुनाव 2024 में सपा के कुल 7 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर बगावत की थी। हालांकि इनाम पाने के मामले में सभी की किस्मत एक जैसी नहीं रही। पूजा पाल का सियासी करियर ------------------------ ये खबर भी पढ़ें - कौन हैं पूजा पाल, जो भाजपा उपाध्यक्ष बनीं:10 महीने पहले सपा से निकाली गईं, पहला चुनाव पति के हत्यारे के खिलाफ लड़ा सपा से निकाली गईं विधायक पूजा पाल को भाजपा ने गुरुवार को प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया। यूपी की राजनीति में पूजा पाल की कहानी त्रासदी और संघर्ष भरी रही है। वह शादी के 9 दिन बाद ही विधवा हो गई थीं। न चाहते हुए भी राजनीति में आना पड़ा।पति के हत्यारे के खिलाफ पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। फिर भी पूजा ने हिम्मत दिखाई, लड़ाई लड़ी। अगले चुनाव में जीत हासिल की। पढ़िए पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    मायावती के दरवाजे से लौटे राजेंद्र पाल यूपी-कांग्रेस प्रभारी बने:अविनाश पांडेय की छुट्‌टी; प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी हटाए जा सकते हैं
    Next Article
    मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ:राम मंदिर चढ़ावा चोरी- चंपत राय का इस्तीफा; ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम सार्वजनिक; NCERT किताब से संविधान प्रस्तावना हटी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment