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    मदरसा आधुनिकीकरण 22 हजार शिक्षकों को मिलेगी नौकरी:बरेली में मौलाना रजवी ने सराहना की, बोले- सरकार सही दिशा में

    3 hours ago

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    बरेली स्थित ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उत्तर प्रदेश सरकार के हालिया रुख की सराहना की है। उन्होंने कहा- मदरसा आधुनिकीकरण योजना, जिसकी नींव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने रखी थी। उसका असली उद्देश्य छात्रों को दीनी तालीम के साथ-साथ मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना था। सरकार का शिक्षकों को राहत देने का फैसला इसी विजन को आगे बढ़ाता है। शिक्षकों के 26 महीने के संघर्ष पर लगेगा विराम योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन 22 हजार मदरसा शिक्षकों को राहत देने का मन बनाया है, जिनकी सेवाएं केंद्र सरकार की फंडिंग रुकने के बाद समाप्त हो गई थीं। पिछले 26 महीनों से ये शिक्षक आर्थिक तंगी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे थे। मुख्यमंत्री के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने वाले शिक्षकों के योगदान को व्यर्थ नहीं जाने देगी। 1995 से शुरू हुई योजना का सफर और चुनौतियां मौलाना शहाबुद्दीन ने योजना के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1995 में शुरू हुई इस स्कीम का मकसद मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को बढ़ावा देना था। यूपी में तैनात करीब 22 हजार एडहॉक शिक्षक इसी का हिस्सा थे। साल 2023-24 में फंडिंग के अभाव में योजना बंद होने से भारी बेरोजगारी पैदा हुई थी, जिसे अब सरकार के नए मंसूबों से दूर करने की कोशिश की जा रही है। सुधार से निकलेगा समाधान, बंदी से नहीं मौलाना बरेलवी ने जोर देकर कहा कि मदरसों को बंद करना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। असली जरूरत व्यवस्था में सुधार लाने और आधुनिक विषयों को अनिवार्य बनाने की है। सरकार के इस सकारात्मक रुख से पूरे मदरसा जगत में खुशी की लहर है, क्योंकि इससे न केवल शिक्षकों का घर बचेगा, बल्कि हजारों छात्र भी आधुनिक शिक्षा से वंचित होने से बच जाएंगे।
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