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    मथुरा में भीषण गर्मी:भगवान को पहनाई जा रही फूलों की पोशाक, आज मिल सकती है गर्मी से कुछ राहत

    1 hour ago

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    सूरज की तपन लोगों को झुलसा रही है। भीषण गर्मी से हाल बेहाल है,लू के थपेड़ों से बचने के लिए तरह तरह के प्रयत्न किए जा रहे हैं। भगवान को गर्मी से बचाने के लिए उनको फूलों से बनी पोशाक धारण कराई जा रही है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को आंधी और मध्यम बारिश की संभावना से तापमान में गिरावट हो सकती है। आराध्य को शीतल सुख के लिए किए जा रहे जतन भीषण गर्मी से इंसान जीव जंतु परेशान हैं। लोग खुद को सूरज की झुलसा देने वाली तपन से बचाने को अलग अलग यत्न कर रहे हैं। वहीं अपने आराध्य को शीतल सुख देने के भाव स्वरूप कई तरह से उनकी सेवा की जा रही है। बांके बिहारी मंदिर में जहां दोनों समय प्रतिदिन सुगंधित और शीतलता प्रदान करने वाले फूलों से सजावट की जा रही है। वहीं अब ज्यादा गर्मी हो जाने की बजह से भगवान को फूलों से बनी आकर्षक पोशाक व फूलों से बने आभूषण धारण कराए जा रहे हैं। ऐसे होता है फूल श्रृंगार बांके बिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि भीषण गर्मी के दौरान भगवान का फूल श्रृंगार किया जाता है। इस फूल श्रृंगार में बढ़ के पत्ते के ऊपर रायबेल, कन्नेर आदि फूलों की कलियों स तरह तरह की मनमोहक आकृति बनाई जाती है। फूल पोशाक में साड़ी,लहंगा,ओढ़नी, इकलाई,पटका, जामा,चित्रपट,पजामा,चोली आदि काले कपड़े पर कलियों के माध्यम से बनाई जाती है। भगवान के श्रृंगार के लिए बेस्ट,बिंदी,बाजूबंद, कण्ठा,मुकुट पांची,कमरबंद,कुंडल,चंद्रिका,हार,गूंजा,मांग, टिपारी,कटारे,मोर पंखी, पाग, चोटी,कलंगी आदि बड़ के पत्ते पर कलियों से हर दिन बनाई जाती हैं। शीतलता प्रदान करने वाले पदार्थों का लगाया जा रहा भोग ब्रज के मंदिरों में भीषण गर्मी से अपने आराध्य को राहत देने के लिए न केवल फूलों से सजाया जा रहा है बल्कि भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग में भी बदलाव किया गया है। बांके बिहारी मंदिर में जहां ठंडाई, शर्बत और मौसमी फलों का रस भोग में अर्पित किया जा रहा है वहीं नंदगांव स्थित नंदबाबा मंदिर में भगवान को सत्तू,मौसमी फलों के अलावा दही की सिकन का भोग लगाया जा रहा है। दक्षिण भारतीय शैली के श्री रंगनाथ मंदिर में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए गर्भ गृह में चंदन का लेपन किया गया है। इसके अलावा शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का भोग लगाया जा रहा है। पेड़ की छांव का ले रहे लोग सहारा भीषण गर्मी से बचने के लिए सम्पन्न लोग जहां A C , कूलर,पंखे आदि का सहारा ले रहे हैं वहीं कई ऐसे भी हैं जिनके लिए पेड़ की छांव ही मिल जाए तो राहत बन जाती है। भरी दोपहरी में रिक्शा चलाकर या मेहनत मजदूरी कर अपना पेट भरने वाले लोग पेड़ की छांव मिलते ही वहीं लेट जाते हैं और कुछ सकून के पल गुजार कर फिर लग जाते हैं रोजी रोटी कमाने में।
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