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    मेरठ में 23 साल तक बंधक बनाकर कराई मजदूरी:8 फीट दीवार कूदकर भागा, मिली आजादी

    3 hours ago

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    जिले के दौराला थाना क्षेत्र से बंधुआ मजदूरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लखनऊ निवासी एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उसे 23 वर्षों तक बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराई गई। किसी तरह जान बचाकर भागे पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रोजगार की तलाश बनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल पीड़ित शिवनाथ, जो रहीमाबाद थाना क्षेत्र के रुसेना गांव का निवासी है, ने बताया कि करीब 23 साल पहले वह रोजगार की तलाश में मेरठ आया था। इसी दौरान वह रास्ता भटक गया, जहां उसे कथित तौर पर जबरन पकड़कर बंधक बना लिया गया। एक छोटी सी चूक उसकी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ गई। घर में कैद कर वर्षों तक कराया काम शिवनाथ का आरोप है कि आरोपी राहुल चौधरी और उसके परिवार ने उसे अपने घर में कैद रखा। उससे खेतों में मजदूरी और पशुओं की देखभाल जैसे काम लगातार कराए गए। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक उसे न तो कोई मजदूरी दी गई और न ही घर लौटने दिया गया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। डर, धमकी और खामोशी का दायरा पीड़ित के अनुसार, आरोपी उसे लगातार जान से मारने की धमकी देते थे, जिससे वह भय के साए में जीने को मजबूर रहा। उसने कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन हर बार डर ने उसे रोक दिया। यह मामला केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपे शोषण के कड़वे सच को भी उजागर करता है। 8 फीट दीवार कूदकर भागा, मिली आज़ादी शिवनाथ ने बताया कि 13 मार्च को एक व्यक्ति की मदद से उसे भागने का मौका मिला। उसने हिम्मत जुटाई और करीब 8 फीट ऊंची दीवार कूदकर वहां से फरार हो गया। वर्षों की कैद के बाद मिली यह आज़ादी उसके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। एक और शख्स के बंधक होने का दावा पीड़ित ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि उसी स्थान पर एक और व्यक्ति को भी बंधक बनाकर काम कराया जा रहा है। यदि यह सच है, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है और तत्काल कार्रवाई की मांग करता है। पुलिस जांच में जुटी, कई सवाल खड़े मामले में सियावा चौकी इंचार्ज सुभाष चंद ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर 23 वर्षों तक यह सब कैसे चलता रहा और किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी। यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि ऐसे मामलों को समय रहते पहचानना और रोकना बेहद जरूरी है।
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